एक दशक बाद न्याय



--प्रदीप फुटेला
रुद्रपुर - उत्तराखंड, इंडिया इनसाइड न्यूज

नेपाल के मशहूर डीजे और कलाकार युवराज भंडारी, जिन्हें “डीजे युवा” के नाम से जाना जाता है, को एक दशक लंबे अंतरराष्ट्रीय कानूनी संघर्ष के बाद बड़ी कानूनी राहत मिली है। नेपाल की सर्वोच्च अदालत ने अपने फ़ैसले में उन्हें उनकी दिवंगत पत्नी स्व. विवेक इट्ज़ेन मेयर की संपूर्ण संपत्ति का एकमात्र वैध उत्तराधिकारी घोषित किया।

डीजे युवराज भंडारी की पत्नी स्व. विवेक इट्ज़ेन मेयर का वर्ष 2010 में काठमांडू स्थित टीचिंग अस्पताल में निधन हो गया था। इसके बाद नॉर्वे में स्थित उनकी संपत्तियों को लेकर उत्तराधिकार विवाद उत्पन्न हुआ। मेयर के पूर्व पति और उनके परिजनों ने नॉर्वे की अदालत में संपत्ति पर दावा करते हुए प्रोबेट प्रक्रिया शुरू कराई, जिसमें डीजे भंडारी को कथित रूप से बिना सूचना दिए उत्तराधिकार सूची से बाहर कर दिया गया। प्रोबेट दस्तावेज़ों में उनकी वैवाहिक स्थिति को “तलाक़शुदा” दर्शाया गया, जबकि भंडारी ने इसे तथ्यात्मक रूप से ग़लत बताया।

भंडारी का आरोप है कि इस प्रक्रिया में विवाह और वसीयत से जुड़े अहम दस्तावेज़ों को छिपाया गया और अवैध रूप से प्रोबेट प्रमाणपत्र हासिल किया गया। इस मामले में जिला और पुनरावेदन अदालतों से प्रतिकूल फ़ैसले आने के बाद भंडारी ने सर्वोच्च अदालत का रुख किया। सर्वोच्च अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि मेयर की मृत्यु के समय उनका स्थायी निवास नेपाल में था, इसलिए अंतरराष्ट्रीय निजी क़ानून के सिद्धांतों के अनुसार नेपाली क़ानून ही लागू होगा। अदालत ने नॉर्वे में की गई निजी प्रोबेट प्रक्रिया को अवैध करार देते हुए उसे अमान्य घोषित किया।

अदालत ने यह भी कहा कि नेपाली क़ानून के अनुसार मृतक की संपत्ति पर पति या पत्नी का प्रथम अधिकार होता है, और इसी आधार पर युवराज भंडारी को एकमात्र वैध उत्तराधिकारी माना गया। इस फ़ैसले के बाद नॉर्वे के ओस्लो स्थित रेनहोल्ड्ट एडवोकेट फ़र्मा के अधिवक्ता थॉमस रेनहोल्ड्ट ने मेयर के बच्चों और उनके कानूनी प्रतिनिधियों को औपचारिक नोटिस भेजा है। नोटिस में 14 दिनों के भीतर संपत्ति हस्तांतरण की माँग की गई है, अन्यथा आगे कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

भंडारी अब ओस्लो जिला अदालत में नॉर्वे, इटली और स्पेन में स्थित संपत्तियों को लेकर क्षतिपूर्ति दावे के साथ नया मुकदमा दायर करने की तैयारी में हैं। उनका कहना है कि अमान्य प्रोबेट प्रमाणपत्र के आधार पर यदि संपत्ति का बँटवारा हुआ है, तो वह पूरी प्रक्रिया अवैध मानी जाएगी।

सर्वोच्च अदालत के फ़ैसले के बाद युवराज भंडारी ने कहा कि उन्हें न्याय तो मिला है, लेकिन इसकी क़ीमत बेहद भारी रही। उनके अनुसार, दस वर्षों की कानूनी लड़ाई में उनका करियर, आर्थिक स्थिति और निजी जीवन गंभीर रूप से प्रभावित हुआ। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अब वे दोबारा संगीत जगत में सक्रिय होने की योजना बना रहे हैं।

यह मामला नेपाल और नॉर्वे दोनों देशों में अंतरराष्ट्रीय उत्तराधिकार कानून, प्रोबेट प्रक्रिया, वैवाहिक मान्यता और सीमा-पार संपत्ति विवादों को लेकर नई कानूनी बहस का विषय बन गया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फ़ैसला भविष्य में ऐसे अंतरराष्ट्रीय मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण नज़ीर साबित हो सकता है।

https://www.indiainside.org/post.php?id=10398