--राजीव रंजन नाग
नई दिल्ली, इंडिया इनसाइड न्यूज।
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की देश की युवाओँ पर काक्रेच की टिप्पणी के बाद एक महीने के अंदर बनी क्राक्रोच जनता पार्टी की ताकत देख कर सरकार में अफरा-तफरी की स्थिति पैदा हो गई है। सरकार को आशंका थी कि अमेरिका से लैट रहे अभिजीत दिपके को प्रर्दशन की अनुमति नहीं दी गई तो हजारों की भीड़ बेकाबू हो सकती हो लिहाजा उन्हें हवाई अड्डे पर प्रदर्शन की अनुमति का आदेश उपलब्ध करा दिया गया।
काक्रेच को लेकर कॉक्रोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने केंद्र को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हटाने के लिए सात दिन की नई डेडलाइन तय कर दी है। साथ ही, चेतावनी दी है कि अगर कोई कार्रवाई नहीं की गई तो उनका आंदोलन पूरे देश में फैल जाएगा। जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के बाद सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि शनिवार को हुआ प्रदर्शन सिर्फ़ एक "ट्रेलर" था। चेतावनी दी कि अगर सरकार उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं करती है तो आंदोलन और तेज़ हो जाएगा। तपती गर्मी के बावजूद जंतर-मंतर पर भीड़ हर घंटे बढ़ती दिखी। सुबह, हवाई अड्डे पर अधिकारियों से मुलाकात के बाद दिल्ली पुलिस ने काक्रोच पार्टी के प्रमुख अभिजीत दिपके को शाम 5 बजे तक जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की अनुमति दे दी। शुरुआत में भीड़ संसद मार्ग पुलिस स्टेशन पर जमा हुई थी।
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके के पहले शाम 5 बजे के अल्टीमेटम के बारे में सवालों के जवाब में, रांका ने कहा कि संगठन अब केंद्र को धर्मेंद्र प्रधान को हटाने या इस्तीफ़े के लिए सात दिन का समय दे रहा है। उन्होंने कहा, “अगर उनमें भारतीय लोकतंत्र के लिए थोड़ी भी इज़्ज़त है, तो उन्हें इज़्ज़त से इस्तीफ़ा दे देना चाहिए या प्रधानमंत्री मोदी को उन्हें पद से हटा देना चाहिए।” और कहा “नहीं तो, यह आंदोलन पूरे देश में फैल जाएगा।”
पर्यावरण एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के फाउंडर अभिजीत दिपके की अगुवाई में हो रहे विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने के लिए जंतर-मंतर पहुंचे। हजारों प्रदर्शनकारी यहां शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर इकट्ठा हुए थे।
दिल्ली पुलिस ने दिपके के अमेरिका से इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट टर्मिनल 3 पर पहुंचने के तुरंत बाद विरोध प्रदर्शन की इजाज़त दे दी थी। दिपके ने प्रदर्शनकारियों से सीधे जंतर-मंतर पहुंचने को कहा।
सीजेपी ने केंद्र को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हटाने के लिए सात दिन की नई डेडलाइन दी और चेतावनी दी है कि अगर कोई कार्रवाई नहीं की गई तो उनका आंदोलन पूरे देश में फैल जाएगा। रांका ने कहा, "यह एक लंबी लड़ाई है, लेकिन आज हमने रीसेट बटन दबा दिया है।" दिपके ने कहा कि वह प्रोटेस्ट के बाद घर जा रहे हैं। उन्होंने वादा किया कि मूवमेंट जारी रहेगा। सीजेपी को कई विपक्षी नेताओं का समर्थन मिला।
एक्स पर एक पोस्ट में, अभिजीत डिपके ने कहा कि वह एक साल से ज़्यादा समय में पहली बार अपने माता-पिता से मिलने घर जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि उनके परिवार को पिछले दो हफ़्तों में काफ़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा है और कथित धमकियों के कारण उन्होंने कुछ समय के लिए अपना घर छोड़ दिया है। उन्होंने लिखा, "आज का प्रोटेस्ट तो बस एक ट्रेलर था" यह इशारा करते हुए कि आने वाले दिनों में और भी लोग इकट्ठा हो सकते हैं।
इस बीच, आम आदमी पार्ठी के नेता अरविंद केजरीवाल ने सीजेपी प्रोटेस्ट का समर्थन करते हुए अपने एक्स पर एक पोस्ट में, कहा कि "कॉकरोच मूवमेंट" देश भर के युवाओं के गहरे गुस्से और निराशा को दिखाता है। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने जंतर-मंतर पर युवाओं के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शन का समर्थन करते हुए कहा है कि सरकार को छात्रों को हटाने के बजाय उनकी बात सुननी चाहिए।
दरअसल, 'कॉकरोच जनता पार्टी' - जो एक मज़ाकिया ऑनलाइन आंदोलन के तौर पर शुरू हुई थी और तेज़ी से ज़ेन-Z (नई पीढ़ी) को अपनी ओर खींचकर एक राजनीतिक घटना बन गई - ने अपने 2.2 करोड़ इंस्टाग्राम फ़ॉलोअर्स को अपने पहले ऑफ़लाइन विरोध प्रदर्शन के लिए तैयार किया। वे केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग कर रहे थे, जिनकी देखरेख में हाल ही में सीबीएसई और नीट की परीक्षाएं बुरी तरह नाकाम रहीं। भारी सुरक्षा के बीच यह विरोध प्रदर्शन चला।
इसके फ़ाउंडर अभिजीत दिपके आज भारत लौटे और एयरपोर्ट पर उतरते ही कहा कि वह 'सभी से मिलने के लिए उत्साहित' हैं। ज़्यादातर छात्रों और युवा पेशेवरों से बने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए दिपके ने नारे लगाए, "देश के युवा अब डरेंगे नहीं, वे लड़ेंगे। कॉकरोच न तो डरते हैं और न ही कभी मरते हैं।" दिपके ने लोगों से कहा, "आइए उन्हें बता दें कि हम उनकी डर की राजनीति से अब नहीं डरेंगे... धर्म की राजनीति बंद करो! 'हिंदू-मुसलमान' की राजनीति बंद करो!" लोगों ने जवाब में "बंद करो" के नारे लगाए।
दिपके ने कहा, "सोशल मीडिया पर प्रधान के इस्तीफ़े की मांग शुरू किए हुए एक महीना हो गया है, लेकिन ये लोग इतने बेशर्म हैं कि कार्रवाई करने के बजाय, वे ध्यान भटकाने वाली दूसरी चीज़ों पर ध्यान दे रहे हैं। हमारे अकाउंट हैक करना और हमारी पोस्ट डिलीट करवाना।" मोदी सरकार ने सीजेपी की तेज़ी से बढ़ती ऑनलाइन पहुंच को रोकने की कोशिश की है। दिपके ने आरोप लगाया है कि उनके अकाउंट हैक करने की कोशिशें की गईं, जबकि सत्ताधारी पार्टी के अधिकारियों ने झूठा दावा भी किया है कि सीजेपी के ज़्यादातर फ़ॉलोअर्स पाकिस्तान या भारत के बाहर के अन्य देशों से हैं।
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