इज़राइल दूतावास के एलुमनाई सम्मेलन में डॉ. कविता मीणा ने साझा किए फेलोशिप के अनुभव



वाराणसी-उत्तर प्रदेश
इंडिया इनसाइड न्यूज।

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के आयुर्विज्ञान संस्थान स्थित ट्रॉमा सेंटर के एनेस्थीसियोलॉजी विभाग की प्रोफेसर डॉ. कविता मीणा को भारत स्थित इज़राइल दूतावास द्वारा आयोजित एमएएसएचएवी एलुमनाई मीट में विशिष्ट पैनलिस्ट के रूप में आमंत्रित किया गया। इस कार्यक्रम में इज़राइल में विभिन्न एमएएसएचएवी फेलोशिप कार्यक्रमों में भाग ले चुके पूर्व प्रतिभागियों ने अपने अनुभवों तथा उनके व्यावसायिक प्रभावों को साझा किया।

पैनल चर्चा के दौरान डॉ. मीणा ने वर्ष 2018 में इज़राइल के हाइफ़ा स्थित रैम्बम मेडिकल सेंटर में आयोजित "ट्रॉमा सिस्टम्स एवं मास कैजुअल्टी मैनेजमेंट" फेलोशिप के अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि इस प्रशिक्षण ने ट्रॉमा प्रबंधन के प्रति उनकी सोच को एक नई दिशा प्रदान की तथा उन्हें एकीकृत ट्रॉमा प्रणाली, वैज्ञानिक ट्रायेज व्यवस्था, सिमुलेशन आधारित प्रशिक्षण, बहुविषयक टीमवर्क और सतत आपदा तैयारी की संस्कृति से परिचित कराया।

डॉ. मीणा ने कहा कि इज़राइल में उन्हें सबसे अधिक प्रभावित वहाँ की अत्याधुनिक तकनीक ने नहीं, बल्कि "तत्परता की संस्कृति" ने किया, जहाँ वरिष्ठ चिकित्सकों से लेकर नर्सिंग स्टाफ और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों तक प्रत्येक व्यक्ति आपातकालीन परिस्थितियों में अपनी भूमिका को भली-भांति समझता है। उन्होंने विशेष रूप से नर्सिंग नेतृत्व, प्री-हॉस्पिटल सेवाओं, आपातकालीन विभाग, ट्रॉमा टीमों तथा पुनर्वास इकाइयों के बीच उत्कृष्ट समन्वय की सराहना की।

उन्होंने बताया कि फेलोशिप से प्राप्त ज्ञान को उन्होंने अपने संस्थान में व्यवहारिक रूप से लागू किया। इज़राइली ट्रॉमा मॉडल से प्रेरित होकर उन्होंने पुराने ट्रायेज क्षेत्र का पुनर्गठन कर समर्पित ट्रॉमा बे की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा पुनर्जीवन क्षेत्र का विस्तार कराया। इसके अतिरिक्त विस्तारित ट्रायेज व्यवस्था, सामूहिक दुर्घटनाओं के लिए पृथक आपूर्ति भंडार, अस्पताल में कमांड एवं कंट्रोल सिस्टम को सुदृढ़ करना, नर्सिंग कोऑर्डिनेटर प्रणाली विकसित करना, सिमुलेशन आधारित आपदा प्रशिक्षण को बढ़ावा देना तथा आपदा प्रबंधन योजनाओं एवं मानकीकृत चेकलिस्ट को लागू करने जैसे महत्वपूर्ण कदम उठाए गए।

डॉ. मीणा ने अपने संबोधन में कहा कि ट्रॉमा प्रबंधन में प्रभावी सुधार केवल अतिरिक्त संसाधनों से नहीं, बल्कि बेहतर योजना, नियमित प्रशिक्षण, टीमवर्क और उपलब्ध संसाधनों के कुशल उपयोग से भी संभव है। उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों को संदेश दिया कि "आज से शुरुआत करें, वर्तमान मानव संसाधन को प्रशिक्षित करें और आपदा तैयारी की संस्कृति विकसित करें।"

कार्यक्रम में उपस्थित प्रतिभागियों ने भारतीय स्वास्थ्य व्यवस्था में अंतर्राष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं को सफलतापूर्वक अपनाने तथा ट्रॉमा प्रबंधन में व्यावहारिक सुधार लाने के उनके प्रयासों की सराहना की। एमएएसएचएवी–रैम्बम फेलोशिप से प्राप्त ज्ञान को भारतीय चिकित्सा व्यवस्था में प्रभावी रूप से लागू करने तथा ट्रॉमा देखभाल के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए कार्यक्रम के दौरान डॉ. कविता मीणा को आयोजकों द्वारा सम्मानित भी किया गया।

यह कार्यक्रम भारत और इज़राइल के बीच स्वास्थ्य सेवा, आपातकालीन चिकित्सा एवं क्षमता निर्माण के क्षेत्र में निरंतर बढ़ते सहयोग का प्रतीक बना। डॉ. कविता मीणा जैसे प्रतिष्ठित एलुमनाई ज्ञान के अंतरराष्ट्रीय आदान-प्रदान तथा ट्रॉमा एवं आपदा प्रबंधन में नवाचार को बढ़ावा देने वाली महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में उभरीं।

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