'वे वो सुनते हैं जो प्रधानमंत्री नहीं कहते': कांग्रेस और शशि थरूर के बीच नया टकराव



--राजीव रंजन नाग
नई दिल्ली, इंडिया इनसाइड न्यूज।

कभी किसी वैश्विक मुद्दे पर साथ, तो कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन और फिर एक-दूसरे पर तीखे हमले। पिछले दो सालों में शशि थरूर और कांग्रेस के रिश्ते का यही अजीब पैटर्न रहा है। भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर प्रधानमंत्री मोदी के जी7 संदेश का समर्थन करने से यह कड़वाहट और बढ़ गई है। कांग्रेस इससे नाराज़ है और उसने अपनी नाराज़गी साफ़-साफ़ ज़ाहिर भी की है।

पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा ने अपने सीनियर साथी को खरी-खोटी सुनाने का जिम्मा उठाया। थरूर पर तंज कसते हुए उन्होंने लिखा, "मेरे सीनियर साथी डॉ. शशि थरूर की प्रधानमंत्री मोदी के लिए तारीफ़ लगता है कि भौतिक दुनिया की सीमाओं से भी आगे निकल गई है। अब वे वो बातें भी सुन सकते हैं जो मोदी ने कभी कहीं ही नहीं।" उन्होंने आगे कहा, "थरूर जी को न जाने कैसे ज़ोरदार दावे, मज़बूत विरोध और बिना समझौता किए कूटनीति की बातें सुनाई दे गईं, जो कभी आधिकारिक रिकॉर्ड में आईं ही नहीं। शायद हम बाकी लोग आम इंसानी इंद्रियों तक ही सीमित हैं।" अपनी वाक्पटुता और अंग्रेज़ी शब्दावली पर ज़बरदस्त पकड़ के लिए मशहूर थरूर, खेड़ा के शब्दों के इस खेल से प्रभावित नहीं हुए।

उन्होंने साफ़ किया, "जो लोग मानते हैं कि मैंने वे शब्द 'सुने' जो नरेंद्र मोदी ने जी-7 में कभी कहे ही नहीं, उन्हें बता दूँ कि मैं तो बस उनकी टिप्पणियों के बारे में व्यापक रूप से छपी रिपोर्टों का ज़िक्र कर रहा था।" कांग्रेस के अपने साथी के हमले से बेपरवाह, करियर डिप्लोमैट से राजनेता बने थरूर ने कहा कि वे अमरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ मोदी की उस बैठक के बारे में अपनी बात पर कायम हैं, जिसमें उन्होंने भारतीय नाविकों की सुरक्षा के बारे में बात की थी। उन्होंने आगे कहा, "मैं बहुत पढ़ता हूँ और जो पढ़ता हूँ उसे याद रखता हूँ। मुझ पर कभी भी किसी तथ्य या बयान को गलत तरीके से पेश करने या तोड़-मरोड़कर बताने का आरोप नहीं लगा है। प्रिंट मीडिया में इन टिप्पणियों के बारे में मैंने जो पढ़ा, उसके आधार पर दी गई अपनी समरी पर मैं कायम हूँ; ये टिप्पणियाँ तब की हैं जब हमारे प्रधानमंत्री बगल में बैठे थे।"

खेड़ा की टिप्पणी से कुछ घंटे पहले, थरूर ने अफ़सोस जताया था कि उनका बयान पक्षपाती राजनीति का मुद्दा बन गया है। "सच कहूँ तो, मुझे यह बात अजीब लगती है कि भारतीय नागरिक नाविकों की सुरक्षा के बारे में दिए गए बयान को एक राजनीतिक विवाद का रूप दिया जा रहा है। तीन भारतीयों की जान चली गई। मेरी बात हमारे नागरिकों की सुरक्षा और इस सिद्धांत के बारे में थी कि नागरिक नाविकों को कभी भी सैन्य कार्रवाई का निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा था अगर कुछ लोग इस चिंता पर ध्यान देने के बजाय राजनीतिक फ़ायदा उठाने में ज़्यादा दिलचस्पी रखते हैं, तो यह मेरे बारे में नहीं, बल्कि उनके बारे में ज़्यादा बताता है।"

● थरूर ने क्या कहा था ?

कांग्रेस के रुख से अलग राय रखते हुए, थरूर ने कहा था कि पीएम मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति के सामने भारत का पक्ष साफ़ कर दिया था। पीएम मोदी ने राष्ट्रपति के साथ सार्वजनिक और निजी, दोनों तरह की मुलाकातों में अपनी बात साफ़ तौर पर रखी। उन्होंने कहा - यह संदेश देना ज़रूरी है कि युद्ध के समय, कमर्शियल जहाज़ों पर मौजूद नागरिक नाविक लड़ाई का निशाना नहीं बनने चाहिए। वे सैनिक नहीं हैं, और यही संदेश पीएम मोदी ने दिया।"

बीजेपी ने थरूर की टिप्पणी को पीएम मोदी की तारीफ़ के तौर पर देखा। "शशि थरूर ने राहुल गांधी की पोल खोल दी है। पार्टी के प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कांग्रेस नेता खुलेआम पीएम नरेंद्र मोदी की कूटनीति की तारीफ़ कर रहे हैं! जब भारत के राष्ट्रीय हित की रक्षा की बात आती है, तो पीएम मोदी सबसे आगे होते हैं। जब भारत के राष्ट्रीय हित के ख़िलाफ़ बोलने की बात आती है, तो राहुल गांधी सबको पीछे छोड़ देते हैं।"

ऑपरेशन सिंदूर के ठीक बाद थरूर और उनकी पार्टी के बीच तनाव शुरू हो गया, क्योंकि बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार ने भारत का पक्ष रखने के लिए एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने के लिए उन्हें चुना था। वे इस पैनल के लिए कांग्रेस पार्टी की पसंद नहीं थे, लेकिन फिर भी वे विदेश गए। कांग्रेस सांसद एम. मणिकम टैगोर ने तब एक्स पर एक पोस्ट लिखा था जो थरूर पर तंज़ जैसा लग रहा था। उड़ने के लिए इजाज़त मत मांगो। पक्षियों को ऊपर उठने के लिए मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं होती... लेकिन आज, एक आज़ाद पक्षी को भी आसमान पर नज़र रखनी पड़ती है। टैगोर ने लिखा था बाज़, गिद्ध और 'ईगल' हमेशा शिकार की तलाश में रहते हैं। आज़ादी मुफ़्त नहीं मिलती, खासकर तब जब शिकारी देशभक्ति को पंखों की तरह ओढ़कर घूमते हों।" इस साल जनवरी में, थरूर ने कहा कि उन्होंने कभी भी पार्टी के तय रुख का उल्लंघन नहीं किया है।

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