--विजया पाठक
एडिटर - जगत विजन
रायपुर - छत्तीसगढ़, इंडिया इनसाइड न्यूज।
■मंत्री कश्यप के संरक्षण में चल रही राज्य में जंगलों की अंधाधुंध कटाई
■केदार कश्यप पर विपक्ष के आरोपों से गरमाई सियासत, सरकार से पारदर्शिता और जवाबदेही की बढ़ी मांग
छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों वन एवं परिवहन मंत्री केदार कश्यप को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्ष ने उन पर विभिन्न मामलों में गंभीर आरोप लगाए हैं और इन आरोपों को लेकर सरकार से जवाब मांगा है। इन घटनाक्रमों ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब किसी मंत्री पर सार्वजनिक रूप से आरोप लगाए जाते हैं, तो सरकार की प्रतिक्रिया क्या होनी चाहिए और जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए कौन से कदम आवश्यक हैं। वन विभाग के कामकाज, जंगलों के संरक्षण, भूमि आवंटन और परिवहन व्यवस्था से जुड़े कुछ मुद्दों पर भी सरकार को घेरा है। विपक्ष का कहना है कि इन मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि कहीं कोई अनियमितता हुई है तो दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए। सूत्रों के अनुसार मंत्री कश्यप ने 200 करोड़ से अधिक की अवैध वसूली महज ट्रांसफर पोस्टिंग के माध्यम से कर डाली, जिसके मुख्य सूत्रधार उनके ओएसडी रहे हैं।
●पहले भी रह चुके हैं विवादों में कश्यप
हाल के दिनों में जगदलपुर सर्किट हाउस के एक संविदा रसोइये द्वारा मंत्री के साथ कथित विवाद का मामला चर्चा में रहा। इसके बाद विपक्ष ने ट्रांसफर-पोस्टिंग की प्रक्रिया को लेकर भी मंत्री और उनके कार्यालय पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि स्थानांतरण से जुड़े मामलों में पारदर्शिता नहीं बरती गई। इन आरोपों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
●जनता को जवाब दें- मंत्री कश्यप या भाजपा
लोकतंत्र में विपक्ष का दायित्व केवल आलोचना करना नहीं, बल्कि सरकार से जवाबदेही सुनिश्चित कराना भी है। वहीं सरकार की जिम्मेदारी है कि वह उठाए गए प्रश्नों का तथ्यों और आधिकारिक जानकारी के साथ उत्तर दे। यदि आरोप निराधार हैं तो उन्हें प्रमाण सहित खारिज किया जाना चाहिए, और यदि किसी शिकायत में प्रथमदृष्टया आधार मिलता है तो निष्पक्ष जांच कराकर उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
●मुख्यमंत्री के सुशासन प्रणाली को धूमिल कर रहे कश्यप
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली सरकार लगातार सुशासन, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहिष्णुता की बात करती रही है। ऐसे में विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों के बीच सरकार के सामने यह अवसर भी है कि वह स्पष्ट और तथ्यात्मक जवाब देकर जनता का विश्वास और मजबूत करे। पारदर्शिता केवल राजनीतिक आवश्यकता नहीं, बल्कि सुशासन की आधारशिला है। राज्य में औद्योगिक विकास, वन संरक्षण और प्रशासनिक निर्णयों से जुड़े मामलों में जनविश्वास सबसे महत्वपूर्ण तत्व है। इसलिए किसी भी विवाद की निष्पक्ष जांच और समयबद्ध निष्कर्ष लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करते हैं। जांच एजेंसियों और संबंधित विभागों को स्वतंत्र रूप से कार्य करने का अवसर मिलना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार का संदेह समाप्त हो सके।
●उद्योगों को फायदा पहुंचाना चाहते हैं कश्यप
मंत्री कश्यप का लालच इस हद तक बढ़ गया है कि उन्होंने राज्य के अंदर जंगलों की सफाई का अभियान शुरू कर दिया है। सूत्रों के अनुसार हसदेव में जो जंगलों की कटाई हुई है। वह मंत्री कश्यप के आते ही और तेज हो गई है। वह चाहते तो पेड़ों की कटाई पर रोक लगा सकते थे, लेकिन चूंकि उद्योग संचालित करने वाले मालिकों से इनकी दोस्ती है। इसलिए वह उद्योगों को फायदा पहुंचाने के लिए ही सारे काम करते हैं। इन्हें जनहित के काम से या जंगलों को नष्ट किए जाने से कोई फर्क नहीं पड़ता। नए पेड़ लगाने के भी जो दावे किए जा रहे हैं। वह भी किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। जो पेड़ काटे गए हैं वह सैकड़ों वर्ष पुराने हैं, जिनकी भरपाई नए पेड़ लगाकर कभी भी नहीं हो सकती। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने राज्य के वन विभाग से एक रिपोर्ट मांगी। पीईकेबी कोयला ब्लॉक 1,898 हेक्टेयर वन भूमि में फैला हुआ है। चरण 1 का खनन 762 हेक्टेयर पर पूरा हो चुका है जबकि चरण 2 शेष 1,136 हेक्टेयर पर चल रहा है। साल 2012 और 2022 के बीच खनन के पहले चरण में कुल 81,866 पेड़ काटे गए। चरण 2 के तहत 113 हेक्टेयर पर लगभग 17,460 पेड़ काटे गए हैं। पेड़ों के नुकसान की भरपाई के लिए 53 लाख से अधिक पौधे लगाए गए हैं।
●पारदर्शी प्रशासनिक प्रकिया अपनाये मंत्री कश्यप
राजनीतिक जीवन में सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्तियों से सामान्य नागरिकों की अपेक्षाएं अधिक होती हैं। इसलिए मंत्री हों या अन्य जनप्रतिनिधि, उन पर लगे आरोपों का जवाब केवल राजनीतिक बयान से नहीं, बल्कि पारदर्शी प्रशासनिक प्रक्रिया से दिया जाना चाहिए। इससे न केवल सरकार की विश्वसनीयता बढ़ती है, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का भरोसा भी मजबूत होता है। यह पूरा प्रकरण मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की शासन व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनविश्वास की कसौटी भी है। जनता चाहती है कि आरोपों और प्रत्यारोपों की राजनीति से आगे बढ़कर तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट की जाए। यदि जांच की आवश्यकता है तो वह निष्पक्ष हो, और यदि आरोप निराधार हैं तो उन्हें सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाए। यही लोकतंत्र की स्वस्थ परंपरा है और यही सुशासन का मूल आधार भी।
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