हनुमत कथा के अंतिम दिन पत्रकारों से कथित दुर्व्यवहार, कवरेज को लेकर उठे सवाल



हावड़ा-पश्चिम बंगाल
इंडिया इनसाइड न्यूज।

पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के लिलुआ रेलवे वर्कशॉप मैदान में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री की ओर से आयोजित तीन दिवसीय हनुमत कथा कार्यक्रम के अंतिम दिन पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला सामने आया है। कार्यक्रम की कवरेज के लिए पहुंचे कुछ संवाददाताओं ने आरोप लगाया कि उन्हें कार्यक्रम स्थल में प्रवेश करने से रोका गया, जबकि कुछ पत्रकारों को बीच रास्ते से ही वापस लौटा दिया गया।

आरोप है कि जब एक संवाददाता कार्यक्रम स्थल से बाहर निकलकर मंत्री सुकांत मजूमदार का साक्षात्कार लेने की कोशिश कर रहे थे, तभी मालीपांचघड़ा थाना क्षेत्र के एक पुलिस अधिकारी ने उनके साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया और कॉलर पकड़कर बाहर निकाल दिया।

बताया गया कि इसी दौरान बाली थाना के एक पुलिस अधिकारी ने संबंधित संवाददाता को छोड़ने के लिए कहा। इस पर कथित तौर पर उक्त अधिकारी ने धमकी भरे लहजे में कहा कि वह इसकी शिकायत पुलिस कमिश्नर से करेंगे। हालांकि, पूरे घटनाक्रम को लेकर संबंधित पुलिस अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष अभी सामने नहीं आया है।

पत्रकारों के साथ कथित इस व्यवहार को लेकर पत्रकार समुदाय में नाराजगी जताई जा रही है। सवाल उठाया जा रहा है कि धार्मिक और सार्वजनिक कार्यक्रमों की कवरेज के लिए पहुंचे पत्रकारों को यदि उनके कार्य से रोका जाता है या उनके साथ दुर्व्यवहार किया जाता है, तो यह पत्रकारिता की स्वतंत्रता और मीडिया की सुरक्षा के लिहाज से गंभीर विषय है।

गौरतलब है कि कार्यक्रम के प्रथम दिन आयोजित संवाददाता सम्मेलन में बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री ने पत्रकारों को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ बताते हुए पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर सरकार से आग्रह करने की बात कही थी। ऐसे में उन्हीं के कार्यक्रम में पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार की घटना को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

पत्रकारों का कहना है कि किसी भी बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम में मीडिया कवरेज के लिए स्पष्ट व्यवस्था और पत्रकारों के लिए निर्धारित प्रवेश व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखते हुए पत्रकारों को अपना काम करने में परेशानी न हो।

आयोजकों को भी चाहिए कि पत्रकारों के लिए समुचित व्यवस्था करें ताकि वह अपना काम किसी को सुविधा पहुंचाएं कर सके।

फिलहाल, पूरे मामले में पुलिस और कार्यक्रम आयोजकों की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही घटना की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। हालांकि आज कथा का तीसरा और अंतिम दिन होने के कारण काफी संख्या में भक्तों की भीड़ उम्र पड़ी जिसके कारण हो सकती है कि यह दुर्व्यवहार हुआ हो या लोगों को असुविधा हुई हो।

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