--राजीव रंजन नाग
नई दिल्ली, इंडिया इनसाइड न्यूज।
अमृत काल में एक बार फिर जेबें ढीली करने को तैयार हो जाइये। यूपीआई की सेवायें अब मुफ्त में नहीं मिलेंगी। सरकार ने बताया है कि मर्चेंट पेमेंट के लिए ₹2,000 से ज़्यादा के यूपीआई ट्रांज़ैक्शन पर थोड़ा चार्ज लगेगा, लेकिन पर्सन-टू-पर्सन ट्रांज़ैक्शन पर कोई चार्ज नहीं लगेगा। नया यूपीआई मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) फ़्रेमवर्क 15 अक्टूबर से लागू होगा।
नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (एनपीसीआई) के नए यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफ़ेस (यूपीआई) नियमों के अनुसार, नए फ़्रेमवर्क में ग्राहकों द्वारा मर्चेंट को किए जाने वाले ट्रांज़ैक्शन पर 0.4% चार्ज लगाने का सुझाव दिया गया है। यह चार्ज प्रति ट्रांज़ैक्शन ₹300 तक सीमित है, और वित्त मंत्रालय ने बैंकों को सलाह दी है कि वे यह पक्का करें कि मर्चेंट इस चार्ज का बोझ ग्राहकों पर न डालें।
रेलवे, टेलीकॉम सर्विस, इंश्योरेंस और फ्यूल जैसी मर्चेंट कैटेगरी के लिए, एनपीसीआई ने कहा है कि ₹2,000 से ज़्यादा के यूपीआई पेमेंट पर ₹5 का फ़्लैट रेट लगेगा। एनपीसीआई ने कहा, "ग्राहक पहले की तरह ही यूपीआई का इस्तेमाल करके मुफ़्त में ट्रांज़ैक्शन करते रहेंगे। पर्सन-टू-पर्सन (पी2पी) ट्रांज़ैक्शन और ₹2,000 तक के पर्सन-टू-मर्चेंट (पी2एम) ट्रांज़ैक्शन एमडीआर के दायरे से बाहर रहेंगे।"
आसान शब्दों में, अगर आप किसी मर्चेंट के पास ₹2,000 से ज़्यादा का ट्रांज़ैक्शन करते हैं, तो उस सेलर को 0.4% का चार्ज देना होगा। लेकिन अगर आप यूपीआई के ज़रिए अपने दोस्त को पैसे भेजते हैं, तो इसे पर्सन-टू-पर्सन ट्रांज़ैक्शन माना जाएगा और यह मुफ़्त रहेगा, भले ही रकम ₹2,000 से ज़्यादा हो। इस घोषणा से यूपीआई यूज़र्स के लिए एक अस्पष्ट स्थिति साफ़ हो गई है। सरकार ने पहले कहा था कि ₹2,000 तक के यूपीआई पेमेंट मुफ़्त रहेंगे, लेकिन यह नहीं बताया था कि ज़्यादा रकम वाले ट्रांज़ैक्शन का क्या होगा।
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