--अभिजीत पाण्डेय
पटना - बिहार, इंडिया इनसाइड न्यूज।
■26 सितंबर से शुरुआत, 10 अक्टूबर को समापन
महापर्व पितृ पक्ष इस वर्ष एक बेहद दुर्लभ और अद्भुत संयोग लेकर आ रहा है। इस वर्ष पितृ पक्ष की शुरुआत और इसका समापन, दोनों ही शनिवार के दिन हो रहे हैं। शनिवार से शुरू होकर शनिवार को ही इसका समाप्त होना सीधे तौर पर कर्म और न्याय के देवता शनि देव की विशेष कृपा से जुड़ता है।
वर्ष 2026 का पितृ पक्ष धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से एक महान और दुर्लभ अवसर है। कुंडली में 'पितृ दोष' और 'शनि दोष' दो ऐसे कड़े दोष हैं, जो इंसान की तरक्की, संतान सुख और आर्थिक उन्नति को पूरी तरह रोक देते हैं। इस बार शनिवार के इस दुर्लभ संयोग में तर्पण करने से इन दोनों ही दोषों से एक साथ मुक्ति मिल सकती है। तिथियों को लेकर भ्रमित होने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है, पूर्णिमा से लेकर अमावस्या तक पूरे 16 दिनों का यह चक्र कुल की समृद्धि और पूर्वजों की पूर्ण तृप्ति के लिए अचूक है।
पितृ दोष मुक्ति और पूर्वजों के आशीर्वाद के लिए पितृ पक्ष अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिसमें श्रद्धापूर्वक तर्पण करने से घर में खुशहाली आती है। सनातन धर्म में पूर्वजों के प्रति सम्मान, तर्पण और कृतज्ञता प्रकट करने का महापर्व पितृ पक्ष साल 2026 में एक बेहद दुर्लभ और अद्भुत संयोग लेकर आ रहा है। इस वर्ष पितृ पक्ष की शुरुआत और इसका समापन, दोनों ही शनिवार के दिन हो रहे हैं। इस अनोखे संयोग के कारण जहां एक ओर देश भर के ज्योतिषियों और विद्वानों के बीच एक बड़ी धार्मिक चर्चा छिड़ गई है, वहीं दूसरी ओर आम जनता में इस बात को लेकर भारी असमंजस है कि इस साल श्राद्ध पक्ष 15 दिनों का होगा या 16 दिनों का।
पंचांगीय गणना के अनुसार, इस साल पितृ पक्ष की शुरुआत 26 सितंबर 2026, शनिवार को पूर्णिमा श्राद्ध के साथ हो रही है, जबकि इसका समापन 10 अक्टूबर 2026, शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा। दोनों मुख्य तारीखों पर शनिवार का होना इस बार के श्राद्ध को ज्योतिषीय और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यधिक शक्तिशाली और फलदायी बना रहा है।
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