--विजया पाठक
एडिटर - जगत विजन
भोपाल - मध्यप्रदेश, इंडिया इनसाइड न्यूज।
■कमलनाथ सरकार ने बढ़ाया ओबीसी आरक्षण, अब युवाओं को नियुक्तियों का इंतजार
■2019 में कमलनाथ का 27% ओबीसी आरक्षण फैसला, 2026 में राहुल गांधी के सामने गूंजा छात्रों का मुद्दा
मध्यप्रदेश में ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर सार्वजनिक और राजनीतिक विमर्श के केंद्र में है। इस बार इसकी गूंज इंदौर में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम से उठी, जहां विद्यार्थियों ने शिक्षा, रोजगार और सरकारी नियुक्तियों से जुड़े सवाल लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के सामने रखे। इसके बाद 22 सितंबर 2026 को राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर 27 प्रतिशत OBC आरक्षण से जुड़े लंबित मामलों और चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्तियों का समाधान करने की मांग की। इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में वर्ष 2019 का वह निर्णय महत्वपूर्ण हो जाता है, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ के नेतृत्व वाली मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार ने ओबीसी आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने की पहल की थी। मार्च 2019 में सरकार ने इस संबंध में अध्यादेश जारी किया। बाद में जुलाई 2019 में मध्यप्रदेश विधानसभा ने ओबीसी आरक्षण को 27 प्रतिशत करने वाला विधेयक सर्वसम्मति से पारित किया। इस तरह प्रदेश में ओबीसी आरक्षण को 27 प्रतिशत तक ले जाने की नीतिगत पहल कमलनाथ सरकार के कार्यकाल में हुई। यह निर्णय इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि उस समय मध्यप्रदेश में ओबीसी वर्ग के लिए 14 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान था। कमलनाथ सरकार ने इसमें 13 प्रतिशत की वृद्धि करते हुए इसे 27 प्रतिशत करने का फैसला किया। जुलाई 2019 में कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री कमलनाथ की अध्यक्षता में विधेयक को मंजूरी देने के बाद इसे विधानसभा में प्रस्तुत किया गया था।
●2019 में लिया गया फैसला बना आज का आधार
27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के लिए अध्यादेश लाना और उसके बाद विधानसभा में विधायी प्रक्रिया पूरी करना उस नीति को संस्थागत स्वरूप देने की दिशा में उठाया गया कदम था। हालांकि इसके बाद न्यायालय में इसकी संवैधानिक वैधता को चुनौती मिली और मामला लंबी कानूनी प्रक्रिया में चला गया। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में भी 2019 के संशोधन अध्यादेश और बाद में बने कानून का उल्लेख है, जिसके माध्यम से ओबीसी आरक्षण 14 से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया गया था। यही वह बिंदु है, जहां कमलनाथ सरकार की पहल और वर्तमान ओबीसी अभ्यर्थियों की समस्या एक-दूसरे से जुड़ती है। आज जिन 27 प्रतिशत आरक्षण की बात हो रही है, उसकी विधायी शुरुआत 2019 में कमलनाथ सरकार के कार्यकाल में हुई थी। इसके बाद आरक्षण के क्रियान्वयन से संबंधित विवाद न्यायालयों में पहुंचा और अलग-अलग भर्ती प्रक्रियाओं पर अंतरिम आदेशों का प्रभाव पड़ा। 2022 में भी मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के एक आदेश में 27 प्रतिशत के बजाय 14 प्रतिशत तक ओबीसी आरक्षण सीमित रखने संबंधी अंतरिम व्यवस्था का उल्लेख हुआ।
●इंदौर में फिर सामने आया वही सवाल
सितंबर 2026 में इंदौर में राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में जब विद्यार्थियों ने ओबीसी आरक्षण के तहत रुकी नियुक्तियों का सवाल उठाया, तो 2019 में शुरू हुई यह नीति एक बार फिर युवाओं के रोजगार के सवाल से सीधे जुड़ गई। राहुल गांधी को छात्रों ने बताया कि चयन प्रक्रिया पूरी करने के बावजूद ओबीसी आरक्षण से जुड़े 13 प्रतिशत पदों पर नियुक्तियां लंबित हैं। राहुल गांधी के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को लिखे पत्र के अनुसार, 87:13 व्यवस्था के तहत इन पदों को रोके जाने से चयनित अभ्यर्थी लंबे समय से नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं और कुछ अभ्यर्थियों के संबंध में 2022 से प्रतीक्षा का उल्लेख किया गया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि 27 प्रतिशत आरक्षण की बहस अब केवल आरक्षण के प्रतिशत की बहस नहीं रह गई है। इसके साथ हजारों युवाओं की शिक्षा, परीक्षा, चयन और नियुक्ति का सवाल जुड़ा हुआ है। किसी अभ्यर्थी के लिए परीक्षा पास करना और चयन सूची में स्थान प्राप्त करना उसके वर्षों के परिश्रम का परिणाम होता है। ऐसे में नियुक्ति प्रक्रिया के कानूनी विवाद में लंबा खिंचाव युवाओं के भविष्य पर सीधा असर डालता है।
●आरक्षण से आगे रोजगार का सवाल
इंदौर में विद्यार्थियों की ओर से उठाया गया सवाल इस बहस को एक व्यापक सामाजिक संदर्भ देता है। आरक्षण का उद्देश्य केवल सरकारी नियमों में प्रतिशत तय करना नहीं है। उसके साथ शिक्षा में अवसर, प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रतिनिधित्व और चयन के बाद नियुक्ति जैसे प्रश्न भी जुड़े हैं। राहुल गांधी के पत्र में भी इसी पहलू पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों ने शिक्षा, रोजगार और भविष्य से जुड़े मुद्दे उठाए तथा ओबीसी आरक्षण के तहत लंबित नियुक्तियों को प्रमुख चिंता के रूप में सामने रखा। उन्होंने मुख्यमंत्री से छात्रों की बात सुनने और चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्तियों का रास्ता निकालने का आग्रह किया।
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