--विजया पाठक
एडिटर - जगत विजन
भोपाल - मध्यप्रदेश, इंडिया इनसाइड न्यूज।
■महीने में दो बार राशन वितरण व्यवस्था लागू कर गरीबों के हिस्से का राशन चट कर रहे राजपूत
■हर महीने 15 से 20 करोड़ रुपये का राशन रसूखदारों और व्यापारियों को बेच रहे मंत्री राजपूत
■आखिर किसके इशारे पर चल रही थी मंत्री राजपूत की यह राशन वितरण व्यवस्था?
अंत्योदय और गरीब कल्याण का मंत्र लेकर कार्य कर रही मध्यप्रदेश में बीजेपी की सरकार के मंसूबो से पर्दाफाश हो गया है। दरअसल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कैबिनेट के सदस्य और मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने किस तरह से गरीबों को वितरित किये जाने वाले राशन के साथ बंदरवाट किया है उसका खुलासा हो गया है। अपने विधानसभा क्षेत्र से लेकर राजधानी भोपाल और तमाम जिलों में गोविंद सिंह राजपूत ने गरीब कल्याण के लिए दिये जाने वाले राशन में भी भ्रष्टाचार का जाल बिछा दिया। यही नहीं राजपूत ने इस बार कोई छोटा-मोटा जाल नहीं बिछाया बल्कि यह जाल इतना बड़ा है कि इसकी चपेट में राशन हितग्राही बड़ी ही आसानी से लपेटे में आ गये। दरअसल गोविंद सिंह राजपूत ने बड़े ही योजनाबद्ध तरीके से महीने में एक बार मिलने वाले राशन का बंटवारा महीने में दो बार करने की योजना बनाई। पिछले कई महीनों से यह सुविधा प्रदेशभर की राशन वितरण की दुकानों पर लागू कर दी गई और इससे आमजनता को राशन लेने के लिए अब दो-दो बार लाइन में लगना होता है। यही नहीं राशन की दुकान के संचालक पहली बार में ही गरीब व्यक्ति को मिलने वाले राशन की पर्ची निकलवा लेते हैं लेकिन उन्हें राशन दिया सिर्फ आधा ही दिया जाता है। आधा राशन उन्हें दोबारा लाइन में लगकर फिर से लेना पड़ता है।
●मुख्यमंत्री से बगैर पूछे ले लिया वितरण व्यवस्था में बदलाव का फैसला
गोविंद सिंह राजपूत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यकाल के दौरान एक अलग ही तेवर में दिखाई दे रहे हैं। पिछले कुछ समय से हाशिये पर रहे राजपूत ने भ्रष्टाचार का ऐसा जाल बिछाया कि मुख्यमंत्री भी बगैर फंसे इसमें रह नही गये। मुख्यमंत्री को आधी-अधूरी जानकारी देकर उन्होंने मौखिक रूप से ही हामी भरवाकर राशन वितरण की व्यवस्था को बदल दिया। जबकि इसमें मुख्यमंत्री से लेकर कैबिनेट की सिफारिश उपरांत ही व्यवस्था बदलने का अधिकार होता है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या राजपूत के पंख इतने निकलने लगे कि वे बगैर कैबिनेट और मुख्यमंत्री की परमीशन के इतना बड़ा फैसला स्वतः ले सकें।
●करोड़ों रुपये के राशन का बंदरवाट
मंत्री राजपूत द्वारा बनाई गई इस राशन वितरण व्यवस्था में करोड़ों रुपये का बंदरवाट होता है। सिर्फ राशन का बंदरवाट ही नहीं बल्कि बड़े बड़े अनाज साहूकारों को पीछे के रास्ते से मोटे रुपये के एवज में गरीबों के हिस्सों में आने वाला यह राशन बांट दिया जाता है। राजपूत द्वारा पिछले चार महीने से भी अधिक समय से इस खेल को खेला जा रहा है। राशन वितरण प्रणाली के इस खेल में राजपूत ने अब तक लगभग 65 करोड़ रुपये का घोटाला किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को इस मामले पर तुरंत संज्ञान लेते हुए इसकी जांच करवाते हुए राजपूत पर कड़ी कार्यवाही करना चाहिए।
●कोयले की खदान में सिंधिया के हाथ काले
गरीब कल्याण के लिए वितरण किये जाने वाले अन्न वितरण के इस कार्य में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का संरक्षण है। उनके इशारे पर ही राजपूत ने वितरण प्रणाली को बदलने का प्रयास किया और वह अपने मंसूबों पर सफल भी हो गये। लेकिन जैसे-जैसे राजपूत के कारनामें आमजनता को समझ आने लगे तो लोगों ने इसका विरोध शुरू किया। आलाम यह हुआ कि राजपूत ने सागर जिले के सुरखी विधानसभा सीट से उठी इन आवाजों को यह तो पैसे का लालच देकर चुप कर दिया या फिर डरा-धमकाकर उन्हें आवाज उठाने से रोक दिया।
●राजपूत की वितरण व्यवस्था को ऐसे समझे
दरअसल एक वर्ष पहले तक राशन की दुकान में प्रत्येक माह की 4 तारीख से 30 तारीख तक राशन दिया जाता था। ऐसे में हर व्यक्ति को एक बार में ही उनके पात्रता अनुसार राशन दिया जाता। लेकिन मंत्री राजपूत ने इस व्यवस्था को बदलते हुए पर्याप्त अन्न उपलब्ध न होने का कहते हुए व्यवस्था को अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया। यानि कि 04 से 15 तक गेंहू का वितरण और 16 से 30 तक चावल का वितरण। लेकिन प्रति व्यक्ति पात्रता अनुसार जो भी खाद्य उन्हें मिलना है उसकी पर्ची बायोमेट्रिक मशीन से एक बार में ही काट ली जाती है। ऐसे में यदि व्यक्ति किसी काम के चलते अन्न लेने न पहुंचे तो उस माह का उसके हिस्से का अन्न राजपूत के वेयरहाउस में पहुंच जाता है और वहां से साहूकारों और अनाजमील मालिकों तक सीधे पहुंचा दिया जाता है जिसके बदले में उनसे मोटी रकम ली जाती है।
●दूसरे राज्यों में नहीं है यह व्यवस्था
मध्यप्रदेश के अलावा दूसरे किसी भी राज्य में राशन वितरण प्रणाली पूर्व की तरह संचालित है। सभी राज्यों में राशन की दुकानों पर पात्र व्यक्ति को एक बार में ही पर्याप्त राशन दिया जाता है और जिसके बाद उन्हें दोबारा आने की आवश्यकता नहीं होती।
●5 करोड़ से अधिक लोगों को मिलता है राशन
खाद्य विभाग अनुसार मध्य प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत लगभग 1.32 करोड़ राशन कार्ड परिवार और करीब 5.36 करोड़ से अधिक लाभार्थी सरकारी राशन का लाभ उठा रहे हैं। ऐसे में सोचने वाली बात यह है कि आखिर इतने बड़ी संख्या में बंटने वाले राशन के साथ कैसे गोविंद सिंह राजपूत खिलवाड़ कर रहे हैं। जांच का विषय यह है कि इस पूरे खेल में मंत्री राजपूत और सिंधिया के अलावा कौन-कौन नेता और व्यापारी शामिल हैं सभी के नाम सामने आने चाहिए।
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