--- रंजीत लुधियानवी, कोलकाता।
पांच लाख रुपये की कीमत शून्य हो गई है, ऐसा शायद कानूनी मामलों में पहली बार हुआ हो कि इतनी बड़ी रकम जीरो हो गई हो। खादिम अपहरण कांड में खादिम के अधिकारी की ओर से बरामद की गई रकम को अपनी मानने से इंकार करने के बाद पांच लाख रुपये की कीमत कुछ भी नहीं रही क्योंकि इस रकम का मालिक कोई नहीं है। कागजों में पुलिस की ओर से पांच लाख रुपये फिरौती की रकम बरामद दिखाई गई थी लेकिन अधिकारी की ओर से नकार दिया गया कि यह रकम उसने दी थी। इसलिए कहाजा रहा है कि हाल में ऐसा कोई मामला दिखाई नहीं दिया जब किसी ने इतनी बड़ी रकम के बारे में ऐसा कहा हो और उसकी कीमत शून्य हो गई है।
मालूम हो कि 2001 में खादिम के पार्थ राय बर्मन का अपहरण किया गया था। अलीपुर विशेष अदालत ने 2009 में आफताब अंसारी, हैपी सिंह (जिसकी बाद में प्रेसीडेंसी जेल में हत्या हो गई थी) समेत पांच लोगों को उम्र कैद की सजा सुनाई थी। अदालत ने 17 लोगों को निर्दोष करार दिया था। कलकत्ता हाइकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बहाल रखा था। बाद में और आठ लोगों को गिरफ्तार किए जाने के बाद 2011 में दोबारा न्यायिक कार्रवाई शुरू हुई। सोमवार को आठ लोगों को भी उम्र कैद की सजा सुना ई गई है।
इस मामले के दौरान सीआइडी ने हैदराबाद में एक व्यक्ति से एक लाख 40 हजार, दूसरे से दो लाख रुपये बरामद किए थे। अपहरण मामलों में शामिल दूसरे कई लोगों से कुल मिलाकर एक लाख 60 हजार रुपये बरामद किए गए थे। कुल मिलाकर जांच एजेंसी ने अदालत में पांच लाख रुपये बरामद करके पेश किए थे। लेकिन खादिम के अधिकारी ने बरामद रकम अपनी मानने से इंकार कर दिया, इसके पांच लाख रुपये की कीमत जीरो हो गई है। एक सरकारी वकील के मुताबिक बरामद रकम का जब कोई दावा करने वाला नहीं है, तब कानून के मुताबिक वह रकम किसी समय नष्टकर दी जाएगी।
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