--- हरेन्द्र शुक्ला, वाराणसी।
वाराणसी, 16 दिसंबर। भारत अध्ययन केन्द्र, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के सभागार में यौगिक क्रियाओं का परिणाम प्रत्येक व्यक्ति में अलग-अलग दिखाई देता है। इसको समझने के लिए हमें नाभिविज्ञान को समझना आवश्यक है क्योंकि नाभी में ही वैश्वानर अग्नि होती है जिसके कूपित होने पर ही अनेक बीमारियाँ उत्पन्न होती हैं। मन ही समस्त रोगों का कारण है। यह बात शनिवार को काशी हिंदू विश्वविद्यालय के भारत अध्ययन केन्द्र की ओर से आयोजित विशिष्ट व्यख्यान में गंगोत्री, हिमालय से आये विशिष्ट अतिथि नाड़ी विज्ञान एवं नाभी विज्ञान तथा जड़ी-बूटी के विशेषज्ञ स्वामी अपरोक्षानन्द सरस्वती ने कही।
उन्होंने कहा कि रोग से मुक्त होने के लिए दो प्रकार का इलाज है सुधारात्मक और सुरक्षात्मक। आधुनिक चिकित्सा सिर्फ सुधारात्मक निदान प्रस्तुत करने का प्रयास करता है जबकि योग सुरक्षात्मक के माध्यम से सुधारात्मक प्रक्रिया को सम्पन्न करता है। क्योंकि मानव शरीर का जीवन मनशरीर और प्राणशरीर से संचालित होता है। योग का प्रभाव मनशरीर और प्राणशरीर दोनों पर पड़ता है। उन्होंने बताया कि भारतीय शास्त्रों में इनके सूत्र उपलब्ध हैं। भारत की संस्कृति में इसका व्यवहार युगों युगों से होता चला आ रहा है। आज कल लोग में आधुनिक चिकित्सा के प्रति विशेष आग्रह और प्राचीन संस्कृति से विचलन ने इस महत्त्वपूर्ण ज्ञान के व्यवहार से हमें दूर कर दिया है।
उन्होंने यह भी बताया कि हमारी जीवन पद्धति में मन चिकित्सा के लिए आहार चिकित्सा का ज्ञान जनमानस में प्रवाहमान था जो अब विलुप्त होता जा रहा है। यही कारण है कि आज स्वास्थ के क्षेत्र में अनिश्चितता बनी हुई है। मन को प्रसन्न रख कर, श्वास-प्रवास की गति के द्वारा आॅक्सीजन की पूर्ति कर, अच्छी नींद और समय तथा ऋतु के अनुकूल आहार लेकर हम आजीवन रोग मुक्त रह सकते है और किसी भी रोग से यदि आपको मुक्त होना है तो मन को अमन करना होगा। इसके लिए उन्होंने अपने बनाये हुए योग से रोग मुक्ति के पऋच सूत्र कार्यक्रम पर विस्तार से चर्चा की।
संचालन भारत अध्ययन केन्द्र के समन्वयक प्रो• सदाशिव द्विवेदी एवं अतिथि परिचय शताब्दी पीठ के आचार्य प्रो• युगल किशोर मिश्र ने दिया। इस अवसर प्रो• कमलेशदत्त त्रिपाठी, स्वामी हरि ओमानन्द, स्वामी योगेश ब्रह्मचारी, प्रो• राकेश उपाध्याय तथा आयुर्वेद संकाय के वरिष्ठ प्राध्यापकों में डाॅ• रानी सिंह, डाॅ• ममता तिवारी, डाॅ• निरू नथानी, डाॅ• हेमलता पाण्डेय, डाॅ• विजय लक्ष्मी, डाॅ• सूर्यकान्त त्रिवेदी सहित केन्द्र के सभी विजिटिंग फेलो तथा अन्य संकायों से आये हुए शोधछात्र एवं छात्रायें उपस्थित थे।
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