--- रंजीत लुधियानवी, कोलकाता।
हमारे देश में प्राचीन काल से लेकर आज तक एक ऐसी मानसिकता बन चुकी है कि आम तौर पर लड़कियों की दिनचर्या में सुबह उठकर बर्तन मांजने, कपड़े धोने, घर की साफ-सफाई करने को मुख्य काम माना जाता है। लेकिन सायरा पुरातन परंपराओं की धज्जियां उड़ाते हुए सुबह उठते ही मैदान में जाकर फुटबाल को एक हिस्से से दूसरे हिस्से में पहुंचाने लग जाती हैं। पुरुलिया जिले के मानबाजार थाना इलाके के जबला गांव के अंसारी परिवार वाले जब लड़की को घर के काम करने के लिए तैयार करने में समझा-बुझा कर थक गए तब उन्होंने तय किया की लड़की की शादी कर दी जाए। शादी के मुद्दे को लेकर घर में विवाद बढ़ गया तो 15 वर्षीय सायरा सीधे 14 किलोमीटर दूर पुलिस थाने पहुंची और कहा कि न तो मुझे शादी करनी है और न ही घर जाना है।
जिला चाइल्ड लाइन के को-आर्डिनेटर अशोक महतो ने पत्रकारों को बताया कि इस बारे में सूचना मिलने के बाद सायरा के माता-पिता को बुला कर करीब डेढ़ घंटे तक समझाया गया। इसके बाद परिवार वाले मुचलका देकर लड़की को ले गए। लड़की की मां नसीमा का कहना है कि मेरी बेटी पढ़ने के साथ ही खेलने में भी माहिर है। इसलिए जल्दी शादी करने की जरुरत नहीं है। वहीं पिता का कहना है कि काफी दिनों से सुबह घर से निकल जाती थी। लेकिन वह खेलने के लिए जा रही है, मन नहीं मानता था। मुझे लगता था कि वह किसी बदमाश लड़के से मिलने के लिए सुबह-सवेर निकल जाती है। इसलिए शादी के बारे में सोच रहे थे। पुलिस थाने में सायरा ने दृढ़ता के साथ एलान करते हुए कहा कि पढ़ाई पूरी करने के बाद पुलिस में भर्ती होकर माता-पिता की सेवा करनी है।
मालूम हो कि पुरूलिया जिले में रेखा कालिंदी, वीणा कालिंदी, अफसाना खातून जैसी लड़कियों ने कम उम्र में विवाह के खिलाफ विद्रोह करके एक नई लहर शुरू की है, जिले राज्य सरकार कन्याश्री परियोजना की सफलता बताती है। सायरा ने भी उसी रास्ते पर अपना कदम बढ़ाया है।
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