--- रंजीत लुधियानवी, कोलकाता।
जीडी बिड़ला स्कूल में हुए यौन शोषण कांड के बाद स्कूलों में छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार और सख्त हो रही है। खास तौर पर प्राइवेट स्कूलों पर अंकुश लगाने के लिए राज्य सर्वशिक्षा मिशन के 18 सूत्रीय सुरक्षा दायरे में लाया जा रहा है। इसके साथ ही चेतावनी दी गई है कि मिशन के निर्देश नहीं मानने वाले स्कूलों की मान्यता भी राज्य सरकार रद्द कर देगी। डीएम की ओर से जिला विद्यालय पर्यवेक्षक (डीआइ) व स्कूल के प्राधानाध्यापकों को यह निर्देश भेजने के साथ ही प्रशासनिक अधिकारियों को भी इसकी प्रतियां भेजी गई हैं।
सरकारी निर्देश के मुताबिक स्कूल में पढ़ने वालों की सुरक्षा के मद्देनजर कांट्रेक्ट पर रखे गए शिक्षा कर्मचारियों की नियुक्ति से पहले या बाद में पुलिस वेरिफिकेशन जरुरी है। इतना ही नहीं, स्कूल वैन या बस चालकों के लिए परिचयपत्र (सचित्र) रखना भी जरुरी किया गया है। हालांकि परिचयपत्र होने के बाद भी वैन या बस चालक स्कूल प्रांगण में नहीं घुस सकेंगे। छात्र-छात्राओं के साथ यौन शोषण की शिकायत मिलने पर 2012 में बनाए गए कानून के मुताबिक जांच और आवश्यक कदम उठाने होंगे। इस तरह की सुरक्षा में पुलिस के पास अनुभव सबसे ज्यादा माना जा रहा है। इसलिए स्कूलों से कहा गया है कि वे स्थानीय पुलिस थानों से संपर्क करके शिक्षकों, शिक्षा कर्मचारियों और छात्र-छात्राओं को साथ लेकर जागरुकता शिविर का आयोजन करें। साथ ही यह भी कहा गया है कि सुरक्षा की जिम्मेवारी सिर्फ तीसरे पक्ष में छोड़ने से काम नहीं चलेगा। छात्र-छात्राओं को आत्मरक्षा के तरीके सिखाने के लिए नियमित तौर पर स्कूल में शिविर का आयोजन किया जाना चाहिए। इससे सुरक्षा के मामले में वे काफी हद तक आत्मनिर्भर हो सकेंगे।
सूत्रों का कहना है कि समस्या सिर्फ यौन शोषण को लेकर ही नहीं है। हाल में कई प्रसिद्ध स्कूलों में नशीले पदार्थों के व्यवहार की जानकारी भी मिली है। इसलिए किसी तरह का गैर कानूनी सामान हो या नशीला पदार्थ, इसका पता लगाने के लिए स्कूलों को पूरी स्वतंत्रता प्रदान की जा रही है। इसलिए निर्देश में कहा गया है कि स्कूल में काम करने वाले शिक्षक, शिक्षा कर्मचारियों के साथ ही अभिभावकों और स्कूल में आने वाले बाहरी लोगों की भी तलाशी ली जा सकती है। जरुरत पड़ने पर मेटल डिटेक्टर का भी प्रयोग कियाजा सकता है। इसके साथ ही दुर्घटना टालने के लिए भी कई निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत छत के पंखों, लाइटों की नियमित जांच करवा कर उसका सर्टीफिकेट लेना भी शामिल है।
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