जापान में आर्थिक प्रगति ने पर्यावरण को पहुंचाया नुकसान - हिरामत्सु



--- हरेन्द्र शुक्ला, वाराणसी।

(●) बीएचयू में जापान के भारत में राजदूत का विशेष व्याख्यान

वाराणसी, 21 दिसंबर। जापान में अत्यधिक आर्थिक प्रगति से पर्यावरण का बुरी तरह ह्रास हुआ है। जापानी सरकार ने प्रदूषण जनित रोगों जैसे कि मिनामाटा एवं वायु प्रदूषण से निजात पाने के लिए राष्ट्रीय एवं स्थानीय स्तर पर सख्त नियम एवं कानून बनाकर उसको लागू किया है। यह बात गुरुवार को काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के पर्यावरण धारणीय विकास संस्थान की ओर से डा• के• एन• उडप्पा सभागार में आयोजित विशेष व्याख्यान में भारत में जापान के राजदूत केन्जी हिरामत्सु ने कही।

उन्होंने कहा कि जापान सरकार ने पर्यावरण हितेषी यान एवं शहरी कचरा प्रबधन पर विशेष जोर दिया है। जापान में पर्यावरण के क्षेत्र में 4093 एन•जी•ओ• कार्यरत है। इसके साथ ही जापान में 75 प्रतिशत लोग पर्यावरण के विषयों में रुचि रखते है। उन्होंने कहा कि जापान सरकार ने भारत सरकार को वातावरण को स्वच्छ बनाने हेतु ऑफिसियल डेवलपमेंट असिस्टेंस (ओ•डी•ए•) परियोजना के तहत तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग दिया गया है। इसी क्रम में दिल्ली में मेट्रो रेल तथा अहमदाबाद में इंटेलिजेंट परिवहन तंत्र तथा गंगा एक्सन प्लान के लिए सहयोग आदि शामिल है।

उन्होंने जापान सरकार द्वारा उनके देश में पर्यावरण के संरक्षण हेतु परियोजनाओं एवं तकनीकों के बारे में विस्तार से चर्चा किया।

इस अवसर पर कार्यवाहक कुलपति डा• नीरज त्रिपाठी ने बताया कि विश्वविद्यालय में पर्यावरण के संरक्षण हेतु शोध (जैसे कि कचरा प्रबंधन, सतत कृषि, वायु प्रदुषण नियंत्रण और जैव ईंधन), परियोजनाएं (जैव विविधता पार्क, राजीव गांधी दक्षिणी परिसर) एवं संस्थाएं जैसे की महामना मालवीय गंगा, नदी विकास एवं जल संसाधन प्रबंधन शोध केंद्र और महामना जलवायु परिवर्तन उत्कृष्ट शोध केंद्र कार्यरत हैं।

संगोष्ठी की अध्यक्षता प्रो• कविता शाह एवं संचालन ए• एस• रघुवंशी ने किया। प्रो• जी• एस• सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।

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