डॉ डी एम मिश्र.
योग कोई नई चीज़ नहीं । इससे हर शख्स वाकिफ़ है । लेकिन आज जिस तरह योग के उपयोग पर चर्चा -दर- चर्चा चल रही है , वैसा शायद योग दर्शन के रचयिता महर्षि पतंजलि ने भी सोचा न रहा होगा । पर इतना जरूर है , ईसा से लगभग दो शताब्दी पूर्व जब महर्षि पतंजलि , पुष्यमित्र शुंग जैसे शासक के राजकीय पुरोहित थे समझ गये होंगे कि लोगों से कसरत कराना बड़े काम की चीज साबित हो सकती है । अच्छे -अच्छे लोगों को बड़े आराम से लंबे समय तक उलझाया जा सकता है । उनके पूर्ववर्ती महर्षि पाणिनी और कात्यायन महान व्याकरण के रचयिता वह हासिल नहीं कर पाये जो महर्षि पतंजलि पा गये । संस्कृत के कुछ छात्रों को छोड़कर महर्षि पाणिनी और कात्यायन को जानने वाला आज कोई नहीं । मौजूदा दौर में सर्वप्रथम योगगुरू बाबा रामदेव ने इस रहस्य को समझा । चंद कसरतों को सीखकर उन्होने वह साम्राज्य खड़ा कर लिया जो बड़े -बडे राजा -महराजा और उद्योगपति भी न कर पाये । उस पर उनकी झूठी शुचिता का डंका अलग बजता रहा । वैसे इत्तफाक से दो बार उनकी असलियत सामने आ चुकी है । एक तब जब उन्हें रामलीला मैदान से सलवार पहन कर जान बचाने के लिए भागना पड़ा । दूसरा अभी हाल में नेपाल ने उनके द्वारा भेजी गयी कई दवाओं को वापस कर दिया यह कहते हुए कि स्वास्थ्य के मानक पर वह खरी नहीं उतरीं । यह वही दवायें हैं जिनका स्वयं योगगुरू बाबा रामदेव विभिन्न चैनलों पर रातदिन प्रचार करते हुए देखे जाते हैं । इसी योग के बल पर योगी आदित्यनाथ भी उ0 प्र0 के सिंहासन तक जा पहुँचे । फिर समय की नब्ज़ को सर्वाधिक पहचानने वाले मोदी का क्या कहना ? वह तो स्वयं अनेक योगासनों में प्रवीण हैं । राष्ट्रीय स्वयं सेवक के रूप में पहले भी उन्होने काफी कसरत की है । प्रधानमंत्री आवास पर उनकी दिनचर्या कसरत से ही शुरू होती है । विदेश दौरे पर भी जब वह जाते हैं कसरत करना नहीं भूलते । उन्होनें योग को अन्तर्राष्ट्रीय बना दिया । इसीलिए हमारे देश में अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया। असल में आज मोदी अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के सबसे बडे ब्रांड अम्बेसडर बन चुके हैं । योगपुरूष के नये अवतार मंे मोदी जी , बाबा रामदेव से अब इक्कीस पड रहे हैं । लखनऊ का विशाल रमाबाई मैदान इसका उदाहरण है ।
योग का उपयोग आम लेागों के लिए अभी तक बेहतर स्वास्थ्य की दृष्टि से होता था ।
ल्ेकिन मेादी ने इसे सियासी और व्यावसायिक भी बना दिया । उन्होने अपने योग प्रदर्शन के लिए लखनऊ को चुना । यहाँ उ0प्र0 के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं । इससे मुफीद जगह योग प्रदर्शन के लिए दूसरी कहाँ हो सकती थी ? आगामी लोकसभा चुनाव को बड़ी आसानी से योग के प्रभाव से जीता जा सकता है । विपक्ष के पास इसका कोई विकल्प नहीं । विपक्ष को योगासन से राजासन तक पहुँचने की कला कहाँ आती है ? यही योजना लेकर मोदी ने बारिश में भींगकर लखनऊ वासियों के साथ योग किया । बच्चे , युवा , बुजुर्ग सब मोदी के साथ योग में भाग लिये । मोदी ने विभिन्न मुद्राओं में अलग- अलग आसन किये । मोदी जैसा आसन करने के लिए लोगों में होड़ मची थी । लोगों को इस बात का भी दुख था कि लखनऊ सबसे अधिक लोगों के साथ योग करने का रिकार्ड बनानें में चूक गया । 51 हजार से अधिक लोगों ने पंजीकरण कराया था लेकिन बारिश के कारण यह संख्या पूरी नहीं हो सकी । बड़े- बडे नेता बडी- बडी चुनावी रैलियों में तमाम रूपया खर्च करके जो नहीं कर पाते उसे मोदी ने अपने तरीके से आसानी से घंटे भर में कर लिया । इसके लिए कुछ खर्च भी नहीं करना पड़ा। मोदी समर्थकों को मोदी -भक्त यूँ ही नहीं कहा जाता ।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी चिर परिचित वेशभूषा में ही आसन किये । बाकी राज्यपाल रामनाइक , दोनो उप मुख्यमंत्री , कितने मंत्री और आला दर्जे के अफसर निर्धारित योग सूट में मोदी के साथ योग में लीन हुए । सबका मकसद एक ही दिख रहा था । मोदी को प्रभावित करना । योगी ने , मोदी का विशेष स्वागत करते हुए कहा कि मोदी जी योग के जरिये देश को महा शक्ति बनाने के लिए दृढसंकल्प है । आज जहाँ अमरिका और रूस जैसे कई बड़े देशों के प्रतिनिधि यहाँ उपस्थित है वहीं पूरा उत्तर पदेश इस योग दिवस को एक जन आन्दोलन के रूप में देख रहा है। शहर , कस्बा , मुहल्ला व गाँव - गाँव में आज योग का कार्यक्रम चल रहा है । ऐसा पहली बार हो रहा है । मोदी ने अपने भाषण में योग के फायदे गिनाये । उनका कहना था योग से विश्व में रोजगार का नया बाजार खुलेगा । लोगों को नौकरियाँ मिलेगी । फिर कहा मात्र 50-60 मिनट योग करके जीवन को स्वस्थ व नीरोगी बनाया जा सकता है । भेाजन में स्वाद व पोषण के लिए जो स्थान नमक का है वही स्थान जीवन में नियमित व्यायाम और योगाभ्यास का हैं । न तो कोई नमक की जरूरत को नकार सकता है न ही योग कीं । अब सवाल उठता है कि यदि योग का महत्व नमक के बराबर है तो यह बात पहले क्यों नहीं बतायी गयी । किसी चिकित्सक ने भी कभी नहीं कही । नमक के बिना तो एक निवाला भी निगला जा सकता । लेकिन योग के बिना तो चल सकता है । गुजरात में वह काफी दिन वह मुख्यमंत्री रहे तब तो यह बात उन्होने नहीं कही ं। कभी योगाभ्यास भी नहीं कराया वहाँ की जनता को । वर्ष 2014 से वह देश के प्रधानमंत्री हैं । फिर वह योग जो नमक के समान उपयोगी है उसे बताने में इतना विलम्ब क्यों ? कहीं ऐसा तो नहीं किसान जब एक तरफ पुलिस की गोलियाँ खा रहा है या बैंक कर्जें के भार से आत्महत्या कर रहा है तो एक सेाची समझी योजना के तहत प्रधानमंत्री द्वारा लोगों का ध्यान हटाने का उपक्रम किया जा रहा हो । ताकि असल मुद्दा गौण हो जाय। (लेखक जाने -माने कवि व साहित्यकार हैं.)
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