--- रंजीत लुधियानवी, कोलकाता।
किसी फिल्म की कथा-पटकथा को लेकर विरोध जताया जाता रहा है तो किसी फिल्म का विरोध इसलिए किया जाता रहा है कि किसी जीवित या मृत किरदार को लेकर बनाई जा रही फिल्म में उक्त व्यक्ति के चरित्र को गलत तरीके से पेश कियाजा रहा है। लेकिन अब विरोध करने वालों का दायरा बढ़ता ही जा रहा है। ‘हिंदू जागरण मंच’ ने एक बांग्ला फिल्म के किरदारों के नाम को लेकर विरोध जताया है। संगठन का कहना है कि ‘रंग बेरोंगेर कोरी’ के मुख्य अभिनेताओं का नाम परिवर्तित किया जाना चाहिए। दूसरी ओर, फिल्म के निर्देशक रंजन घोष ने किसी तरह के फेरबदल से इंकार करते हुए कहा कि उनकी सृजन की आजादी में बेमतलब का विरोध किया जा रहा है।
‘पद्मावती’ फिल्म का विरोध करने के बाद मंच की ओर से बांग्ला फिल्म का विरोध किया जा रहा है।
इस बारे में केंद्रीय सूचना व प्रसारण मंत्री, सीबीएफसी और सेंसर बोर्ड की कोलकाता शाखा को भी पत्र लिख कर विरोध जताया गया है। मालूम हो कि बांग्ला फिल्म चार छोटी कहानियों को लेकर ‘कोलाज’ बनाई गई है। इस फिल्म का उद्देश्य लोगों के संबंधों के बीच की उथल-पुथल को दिखाना है। इसमें एक कहानी के दो किरदारों में एक का नाम ‘राम’ तो दूसरे का नाम ‘सीता’ रखा गया है। आदिवासी युवक-युवती के बीच प्रेम और बिछड़ने को लेकर यह कहानी बनाई गई है। नायक-नायिका का नाम राम-सीता होने पर मंच ने विरोध जताया है। उनका कहना है कि ऐसी फिल्म को ‘सेंसर बोर्ड’ से मंजूरी नहीं मिलनी चाहिए। इस पर ‘पाबंदी’ लगाई जानी चाहिए।'
हालांकि फिल्म के निर्देशक घोष का कहना है कि ऋतुपर्णा सेनगुप्ता, चिरंजित, सोहम चक्रवर्ती, अरुणिमा घोष, ऋत्विक चक्रवर्ती, अर्जून चक्रवर्ती जैसे जाने माने कलाकार फिल्म में काम कर रहे हैं और अपर्णा सेन फिल्म की ‘क्रिएटिव कंसलटेंट’ हैं। जिस कहानी को लेकर विरोध जताया जा रहा है, उसका रामायाण या राम-सीता से कोई संबंध नहीं है। आदिवासी युवक-युवती को लेकर एक सामान्य कहानी लिखी गई है। हमारे देश में लोगों का नाम राम-सीता होता ही है, इसमें अनोखा या विरोध करने लायक कोई तत्व नहीं है। क्या पहले लोगों ने नहीं सुना कि लोगों का नाम राम है ? इसके अलावा अभी तक फिल्म का सेंसर शो भी नहीं हुआ है, किसी ने फिल्म को देखा भी नहीं है। ‘दुबई’ के फिल्म फेस्टीवल की मार्केट और ‘गोवा’ के अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह के पेवेवियन में ही इसे दिखाया गया है। मंच के विरोध के औचित्य पर सवाल उठाते हुए निर्देशक ने कहा कि ऐसा होने पर तो लोगों को फिल्म बनाना ही बंद कर देना चाहिए ?
प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि फिल्मकारों की ओर से हिंदू देवी-देवताओं के नाम को लेकर या हिंदू धार्मिक चरित्रों के नाम का व्यवहार किए जाने से लोगों की भावनाएं प्रभावित होती हैं।
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