--- हरेन्द्र शुक्ला, वाराणसी।
(★) पण्डित मदनमोहन मालवीय जयंती पर आयोजित दो दिवसीय पुष्प प्रदर्शनी उद्धघाटित
काशी, 25 दिसंबर। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्थापक महामना पण्डित मदनमोहन मालवीय की जयंती के अवसर पर सोमवार को मालवीय भवन में लगी पुष्प प्रदर्शनी में गुलाब अपनी रंगों और मखमली और खुश्बुओं से इठला रहा था वहीं रजनीगंधा और चमेली भी अपनी भिनी भिनी खुश्बुओं से इतरा रही थी। क्या बुढ़े क्या जवान रंग-बिरंगे फूलों से सजी महामना की बगीया बरबस ही अपनी ओर खिंच रही थी। ऐसा पहली बार यह हुआ है कि महामना की जयंती समारोह कुलपति विहीन रहा। हालांकि पुष्प प्रदर्शनी उद्घघाटन की औपचारिकता मालवीय भवन में आयोजित दो दिवसीय पुष्प प्रदर्शनी का औपचारिक उद्घाटन कार्यवाहक कुलपति डा• नीरज त्रिपाठी एवं चिकित्सा विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो• वी• के• शुक्ला ने किया।
पुष्प प्रदर्शनी आयोजन के सचिव प्रोफेसर अनिल कुमार सिंह ने बताया कि मालवीय स्मृति पुष्प प्रदर्शनी में गुलदावदी के गमले एवं फूलों के संग्रह, कोलियस, विभिन्न प्रकार के 5 हजार शोभाकारी पौधे एवं रंगीन पत्तियों के समूह सजाये गये है। गुलदावदी के कटे फूल, गुलाब के कटे फूल लीलियम, जरेबरा, कार्नेशन, ग्लैडियोलस, रजनीगंधा, बर्ड आॅफ पैराडाईज, गेंदा, गुलाब आदि पुष्पों के गमलें, रिफ्लैक्स्ड, इनकवर्ड, इनकर्विंग, स्पाइडर, पोममौन, स्पून, एनिमोन आदि 2 हजार से अधिक प्रारूपों में प्रदर्शित किया गया था। गुलाब के फूलो में प्रदर्शनी का सबसे सुन्दर गुलाब किंग आफ दी शो, प्रदर्शनी का सबसे सुन्दर द्वितीय गुलाब क्वीन आफ दी शो, प्रदर्शनी का सबसे सुन्दर तृतीय गुलाब प्रिंस आफ दी शो तथा प्रदर्शनी का सबसे सुन्दर चतुर्थ गुलाब प्रिंसेस आफ दी शो मुख्य आकर्षण का केन्द्र रहा। इसके अलावा विभिन्न प्रकार के फल एवं सब्जियां, कलात्मक पुष्प सज्जा, मण्डप, फूलों से सुसज्जित रंगोली, सुकर्तन कला (टाॅपियरी) बोनसाई और हरी पत्तियों के संग्रह, मालवीय जी पर आधारित वास्तुकला के नमूने मानव पक्षी एवं जल प्रपात आदि भी प्रदर्शित किया गया है।
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