--- हरेन्द्र शुक्ला, वाराणसी।
(●) मर्ज, मरीज और समाजसेंवा ही है प्रो• विजयनाथ मिश्र का जुनून
वाराणसी, 28 दिसंबर। महामना के मानसपुत्र एवं मरीजों के मसीहा नाम से चर्चित बीएचयू के न्यूरोलाजिस्ट प्रो• विजयनाथ मिश्र का "आला" मरीजों का मर्ज तो दूर करता ही है लेकिन अब उनका "आला" गांवों के गरीब बस्तियों में पहुंचकर असहाय, बेसहारा लोगों को राहत पहुंचा रहा है। चाहे वह चंदौली का सुदूर इलाका नौगढ़ का आदिवासी इलाका हो, मिर्जापुर के गांव हो या बांदा चित्रकुट का जंगली इलाका। जहां गरीब मरीजों का नि:शुल्क इलाज कर उनके दर्द पर सहानुभूति का मरहम लगा रहे है।
एक तरफ जहां वर्तमान दौर में चिकित्सकों को "आर्थिक यमराज" के रुप में लोग देख रहे हैं वहीं प्रोफेसर मिश्र की यह दीवानगी तब भी देखने को मिलती है जब वह राह चलते भी मरीजों का दर्द सुनकर कागज मांगकर दवा लिख देते है साथ ही यह पूछना भी नहीं भुलते कि "दवा के पईसा हव की ना", मरीज द्वारा ना कहने पर वह दवा भी खरीदकर देते है। इसी अदा ने उनको मरीजों का मसीहा बना दिया है।
युवा तुर्क के नाम से विख्यात पूर्व प्रधानमंत्री स्व• चन्द्रशेखर जी के गृह जनपद बलिया में ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत बुधवार को जिस तरिके से ग्रामीणों का जनसैलाब उमड़ा वह अद्भुत था। क्या बुढ़े क्या जवान और क्या बुजुर्ग मरीजों का आत्मीयता के साथ प्रो• विजयनाथ मिश्र के नेतृत्व में बीएचयू के चिकित्सकों का दल ने निदान किया। ग्रामीणों का असीम दर्द सोख लिये आप सर, दवा लिखने का यह भाव बिरले चिकित्सकों में ही देखने को मिलता है। तभी तो आप "मरीजों के मसीहा" के नाम को चरितार्थ करते हुये हमेशा नजर आते हैं।
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