02 जनवरी 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
देश में क्रूज पर्यटन को बढ़ावा देने तथा भारत को आकर्षक क्रूज पर्यटन स्थल बनाने के उद्देश्य से गृह मंत्रालय ने शिपिंग मंत्रालय के अनुरोध पर ई-वीजा के साथ आने वाले क्रूज पर्यटकों को तीन वर्षों की अवधि के लिए यानी 31-12-2020 तक बायोमेट्रिक नामांकन आवश्यकता से छूट दे दी है। इससे ऐसे यात्रियों का तेजी से अप्रवासन मंजूरी मिलेगी और उन्हें तटों पर और अधिक समय बिताने का अवसर मिलेगा। यह एक महत्वपूर्ण कारक भी है जिससे क्रूज लाइनों को अपने भ्रमण कार्यक्रमों में कोई स्थान शामिल करने या न करने के बारे में निर्णय लेने में मदद मिलेगी।
शिपिंग मंत्रालय अप्रवासन मंजूरी प्रक्रिया को सरल बनाने की दिशा में काम कर रहा है और भारतीय तटों से आने-जाने वाले उपभोक्ताओं को बाधा रहित लॉजीस्टिक प्रदान कर रहा है। 5 प्रमुख बंदरगाहों-मुम्बई, मरमुगाव, नया मंगलोर, कोच्चि तथा चेन्नई पर ई-वीजा का प्रबंधन किया गया है। अभी तक अप्रवासन मंजूरी के लिए यात्रियों के प्रथम आगमन पर बायोमेट्रिक नामांकन आवश्यक होता था। लेकिन इन बंदरगाहों पर क्रूज टर्मिनलों की वर्तमान सुविधाओं के साथ अप्रवासन प्रक्रिया में अधिक समय लग रहा था जो अप्रवासन मंजूरी के अंतर्राष्ट्रीय स्वीकार्य अधिकतम 90 मिनट की अवधि से अधिक था। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि क्रूज मौसम 2017-18 तथा 2019-20 के लिए क्रूज जहाजों के आगमन समय के अनुसार भारत आने वाले अधिकतर क्रूज जहाज 2000 से 4000 यात्री क्षमता वाले हैं। अधिकतर क्रूज यात्री ई-वीजा पर आएंगे और इन यात्रियों के बायोमेट्रिक नामांकन से अप्रवासन मंजूरी की गति धीमी होगी। इसलिए छूट की आवश्यकता समझी गई।
सरल अप्रवासन मंजूरी प्रक्रिया प्रमुख बंदरगाहों पर क्रूज यात्रियों को आकर्षित करने की दिशा में उठाए गए कदमों का हिस्सा है। पहले क्रूज के लिए मानक संचालक प्रक्रियाओं में संशोधन किया गया था। अब इसे सभी बंदरगाहों पर एक समान लागू किया जा रहा है। नवंबर 2017 में भारत में क्रूज लाइनों को आकर्षक बनाने के लिए प्रमुख बंदरगाहों ने तीन वर्षों के लिए 42-67 प्रतिशत टैरिफ में कमी की है। अब प्रमुख बंदरगाह प्रति जीआरटी 0.35 अमेरिकी डॉलर की समान दर से चार्ज करते हैं।
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