05 जनवरी 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
(●) साइलेंट जोन बनाने का उड़ रहा मजाक
(●) झील के 20 बीघा जमीन को पाट कर बने है अवैध निर्माण
(●) वैगन कारखाने का गंदा जल भी गिरता है झील में
--- उमेश तिवारी, हावड़ा : सांतरागाछी पक्षी अभयारण्य का आस्तित्व खतरे में है। इसके चारो ओर कुकुरमुत्ते की छत की तरह उग आए कंक्रिट के जंगल धीरे-धीरे इस झील को अपने आगोश में ले रहे हैं। सिर्फ यही नहीं आसपास का गंदा पानी भी इसी झील में समा रहा है, जिससे यह झील प्रदूषित हो गया है और यही कारण है कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष प्रवासी पक्षियों का आगमन बहुत कम हुआ है। पिछले 8 दिसंबर को कलकत्ता उच्च अदालत ने सांतरागाछी झील सह विभिन्न झील को ‘साइलेंट जोन’ बनाने का निर्देश दिया था। परन्तु झील के आसपास धड़ल्ले से बन रहे अवैध निर्माण व माइक की आवाज से अदालत का यह निर्देश धरा का धरा रह जाने की आशंका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वाहनों के हार्न की आवाज व रेल लाइन के किनारे कोना एक्सप्रेस होने के कारण हजारों वाहनों का आवागमन होता है जिससे वाहनों के आवाज को दबाया नहीं जा सकता। इसके अलावा आसपास के इलाकों से निकले कूड़ा-कर्कट व गंदे पानी से यह झील भर गया है। पानी में बह रहे मरे जीव जन्तु भी पक्षियों के लिए हानिकारक हो गए है।
अवैध क्लबों में विवाह समारोह : झील के दक्षिण-पूर्व में भी कई क्लब घर बन गए हैं। साथ ही कई मोबाइल टावर भी छतों पर बैठाए गए हैं। लोगों का आरोप है कि इन क्लब घरों के ऊपर भी छत बनाए गए हैं, जिसे शादी विवाह के लिए भाड़े पर दिया जाता है। यहां तक कि आयोजन में बचे हुए भोजन भी इसी झील में उड़ेल दिया जाता है। इसलिए सिर्फ साइलेंटल जोन बनाने का निर्देश देना ही काफी नहीं है। इसके लिए सबसे पहले इन अवैध क्लबों को उखाड़ फेंकने की जरूरत है।
छोट्टो दल क्लब के सचिव स्वपन राय का कहना है कि पहले लोगों के अन्दर झील को लेकर कोई जागरूकता नहीं थी। हमलोगों ने ही झील बचाने की मुहिम शुरू की।
पक्षी प्रेमी गौतम पात्र का कहना है कि झील के दक्षिण-पश्चिम में एक और झील था जिसे भरकर वहां बिल्डिंग बना दिया गया है। झील पर प्रमोटरों की निगाह है। झील को अवैध रूप से भरा भी जा रहा है। सांतरागाछी पुलिस थाना व स्थानीय प्रशासन से शिकायत करने के बाद भी कोई फायदा नहीं हुआ है।
क्या कहना है लोगों का : स्थानीय व्यक्ति दिलीप गुहा के अनुसार 98 बीघा जमीन पर फैले इस झील के 20 फीसदी भाग को भर दिया गया है। यही नहीं झील को भरकर दुकान, होटल, कारखाना, साइकिल गैरेज बनाया गया है, जिससे निकलनेवाला सारा तेलयुक्त पानी सीधे झील में जाता है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार दक्षिण भाग में स्थित वैगन कारखाना से जला हुआ तेल भी इसी झील में गिरता है। 2012 में इस वैगन कारखाने को बंद करने का निर्देश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दिया था लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। आज भी तेज आवाज के साथ कारखाने में उत्पादन होता है।
क्या कहतीं है पार्षद : यह झील हावड़ा नगर निगम के 48 नम्बर वार्ड के अन्तर्गत आता है। वार्ड की पार्षद नसरीन खातुन का कहना है कि झील क्षेत्र को साइलेंट जोन बनाए जाने का निर्देश स्वागत योग्य है। झील को जितना हो सके साफ रखने की चेष्टा की जाएगी। उन्होंने कहा कि झील को साफ करने के लिए रेलवे से अनापत्ति पत्र की जरूरत पड़ेगी।
हावड़ा जिला वन दफ्तर के एक अधिकारी विमान विश्वास का कहना है कि पहले वन विभाग झील की सफाई का काम करता था लेकिन अब यह हमारे हाथ में नहीं है।
दक्षिण-पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी संजय घोष का कहना है कि हम अदालत के निर्देश का इंतजार कर रहे हैं। अभी तक कोर्ट की कॉपी नहीं मिली है। कोर्ट की कॉपी मिलने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
https://www.indiainside.org/post.php?id=1372