हावड़ा, 07 जनवरी 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
--- रंजीत लुधियानवी। मुकुल राय के दल में शामिल होने के बाद सबंग में तीसरे नंबर पर रहने के बाद भी वोटों की संख्या में भारी वृद्धि होने से उत्सााहित भाजपा का मानना है कि उलबेड़िया लोकसभा सीट के उपचुनाव में वह हिंदू वोटों के सहारे जीत जाएगी। मालूम हो कि लोकसभा इलाके में आगामी 29 जनवरी को मतदान होने वाला है और यहां करीब 43 फीसद मुस्लिम मतदाता हैं। लेकिन भाजपा का मानना है कि उसे मुस्लिम मतदाताओं को लुभाने की जरुरत नहीं है।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष के मुताबिक हम लोग मुस्लिम मतदाताओं के बारे में नहीं सोच रहे हैं। उनका कहना है कि हम क्यों उनके बारे में सोचें ? हमलोग इलाके के 55 फीसद वोट बटोरने की कोशिश में हैं। उपचुनाव में उक्त लोकसभा सीट को जीतने के लिए इतने वोट हमारे लिए काफी हैं।
सूत्रों का कहना है कि पिछले दो सालों के दौरान उलबेड़िया और इसके आसपास के इलाकों में सांप्रदायिक तनाव की कई घटनाएं हुई हैं। दिसंबर 2016 मेंं धुलागढ़ में दो संप्रदाय के बीच भड़की हिंसा को लेकर भी भाजपा ने सोशल मीडिया पर काफी प्रचार किया था। यह जगह उलबेड़िया से महज 17 किलोमीटर की दूरी पर है। सूत्रों ने बताया कि पिछले साल जनवरी में उलबेड़िया के तेहट्ट इलाके में नवी दिवस और सरस्वती पूजा को लेकर दो समुदाय के छात्रों में खासा विवाद हुआ था। स्कूल प्रबंधन ने नवी दिवस मनाने की मंजूरी नहीं दी। इसके बाद तनाव को देखते हुए स्कूल बंद कर दिया गया था, जिससे सरस्वती पूजा भी नहीं हो सकी। बताया जाता है कि इसके नजदीक सांकराईल इलाके में भी 2008 में सांप्रदायिक तनाव की घटनाएं हुई थी। भाजपा को उम्मीद है कि बीते कुछ सालों के दौरान इलाके में सांप्रदायिक तनाव का फायदा वोटों के ध्रुवीकरण के तौर पर उसे जरुर हासिल होगा।
मालूम हो कि तृणमूल कांग्रेस, कांग्रेस और माकपा की ओर से पहले ही इलाके से अपने उम्मीदवार का एलान कर दिया है और तीनों दलों का उम्मीदवार मुस्लिम समुदाय से है। भाजपा की ओर से रविवार तक उम्मीदवार का एलान नहीं किया गया था, लेकिन माना जा रहा है कि वह भी किसी मुस्लिम उम्मीदवार को ही चुनाव मैदान में उतारेगी।
हालांकि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष का कहना है कि मुसलमानों के वोट तृणमूल कांग्रेस, माकपा और कांग्रेस में तीन हिस्सों में बंट जाएंगे। दूसरी ओर, हम लोगों ने इलाके में अपना संगठन मजबूत कर लिया है। विश्व हिंदू परिषद और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की ओर से भी वहां अपनी गतिविधियां तेज कर दी गई हैं। धुलागढ़ की हिंसा चुनाव में खास भूमिका निभाएगी। हमारा मानना है कि माहौल हमारे अनुकूल है और स्थिति हमारे लिए फायदेमंद है।
इधर, विश्व हिंदू परिषद की ओर से उपचुनाव के लिए कुछ किए जाने से इंकार किया है। परिषद के उपाध्यक्ष नांदियाल लोहिया का कहना है कि बीते 30 सालों से उलबेड़िया में हमारा संगठन है और हमेशा समुदाय के लिए काम करता रहा है। उन्होंने माना है कि संगठन की गतिविधियां पहले के मुकाबले बढ़ी हैं। उनका कहना है कि बीते तीन सालों के दौरान हमारी गतिविधियां भी बढ़ी हैं और हम एक स्कूल खोलने में भी सफल रहे हैं।
दूसरी ओर, राजनीतिक विश्लेषक और रवींद्र भारती विश्वविद्यालय में राजनीतिक विज्ञान के प्रोफेसर विश्वनाथ चक्रवर्ती का मानना है कि उलबेड़िया और नोवापाड़ा दोनों सीटों पर होने वाले उपचुनाव का खासा महत्व है। दोनों जगह तृणमूल कांग्रेस जीत जाएगी और भाजपा दूसरा स्थान कायम करने में सफल रहेगी। मुकुल के आने के बाद भाजपा की हालत में सुधार होगा। जबकि बीते कुछ सालों के बाद एक के बाद दूसरी पराजय के बाद माकपा का उबरना बहुत मुश्किल है।
हालांकि माकपा और तृणमूल कांग्रेस के नेता नहीं मानते ही पश्चिम बंगाल में भाजपा के लिए किसी भी तरह की संभावना मौजूद है। मालूम हो कि उलबेड़िया माकपा का गढ़ रहा है और माकपा के हन्नान मोल्ला ने यहां से लगातार आठ बार जीत दर्ज की थी। बाद में राज्य में ममता बनर्जी की लहर के दौरान परिवर्तन की हवा में यह सीट तृणमूल कांग्रेस के सुल्तान अहमद ने छीन ली थी। दूसरी बार, 2014 में भी वे यहां से जीतने में सफल रहे थे। माकपा यहां बीते दो लोकसभा चुनाव में दूसरे स्थान पर रही है, हालांकि भाजपा के वोटों में वृद्धि लगातार जारी है।
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