कोलकाता, 07 जनवरी 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
--- रंजीत लुधियानवी। कोलकाता स्थित बड़ाबजार के गुरुद्वारा छोटा सिख संगत में रविवार को श्री गुरू गोविंद सिंह जी का 351वां प्रकाशोत्सव मनाया गया। इस मौके पर जहां विद्वानों ने गुरूवाणी का गायन किया, वहीं कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया गया। इस मौके पर कवियों ने सिख इतिहास का जिक्र करते हुए बताया कि गुरू गोविंद सिंह की ओर से जुल्म के खिलाफ संघर्ष की शुरुआत गुरू नानक देव जी के समय से ही हो गई थी। माता गुजरी को सात साल और नौ साल की उम्र के दो छोटे साहिबजादों के साथ मुगलों की कैद में पहुंचाने के लिए गंगू ब्राह्मण से लेकर सरहिंद के नवाब वजीर खान तक और दूसरी ओर, गुरू गोविंद सिंह की ओर से किशोर अवस्था के दो बड़े साहिबजादों को खुद जुल्म के खिलाफ शहीद करने के लिए तैयार करने, पिता के बलिदान समेत विश्व इतिहास में नई मिसाल कायम की।
कवियों में पंजाब से आए सतविंदर सिंह राटौल के अलावा गुरविंदर सिंह जम्मू, स्थानीय कवियों में भूपिंदर सिंह, गुरदीप सिंह संघा, जगमोहन सिंह खोखर समेत कई कवि शामिल थे। पंजाबी साहित्य सभा की ओर से आयोजित कवि सम्मेलन में संस्था के महासचिव जगमोहन सिंह गिल ने कविता सम्मेलन का आयोजन और संचालन किया। इस दौरान गुरू का लंगर भी चला जिसमें भारी संख्या में लोगों ने लंगर छका।
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