कोलकाता, 08 जनवरी 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
--- रंजीत लुधियानवी। भारतीय विद्या मंदिर और भारतीय संस्कृति संसद के संयुक्त तत्वावधान में स्वर्गीय माधोदास मूंधड़ा जी की जन्म शताब्दी के अवसर पर एक त्रिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन हुआ जिसमें विभिन्न सत्रों में कई कार्यक्रम हुए और हिंदीतर प्रांतों एवं विदेशों में हिंदी भाषा साहित्य की दशा दिशा पर विस्तृत चर्चा हुई।
इन सबके अलावा एक कवि सम्मेलन का सत्र सिन्धी के लब्ध प्रतिष्ठित रचनाकार भगवान अटलानी की अध्यक्षता और रावेल पुष्प के संचालन में हुआ जिसमें मुख्य अतिथि के रुप में उपस्थित थे - जम्मू कश्मीर से प्रोफेसर राजकुमार और बांग्लादेश से सैयदा रुखसाना ज़मान शानू। देश के विभिन्न प्रदेशों से आये कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से मानवीय मूल्यों के विघटन और देश की राजनीतिक स्थितियों पर अपनी महत्वपूर्ण रचनायें प्रस्तुत की।
इसमें शिरकत करने वालों में थे - सर्वश्री राम स्वरूप सिंह चंदेल, डॉ• वर्षा पुनवटकर, अनुजा बेगम, डॉ• उषा रानी, मोहम्मद असलम, सेराज खान बातिश, चिन्मय डेका, निर्मला गर्ग, दीदार खान, नथमल शर्मा, डॉक्टर वर्षा, वीरेंद्र बृजवासी, ध्रुव नारायण सिंह, डॉ• लता चौहान, कुंवर वीरसिंह मार्तंड, मिट्ठू मिठास, डॉ• मीना कौल, रामगोपाल भारतीय, जितेंद्र धीर, विवेक निर्मल, डॉ• शशिप्रभा, जगमोहन कौर, प्रभात तिवारी, सुरेश मंडल, सुजाता कुमारी, सुखविंदर, संतोषी महंत, सावन गुजराल, अहल्या तथा अन्य।
गौरतलब है कि इस त्रिदिवसीय सम्मेलन में कवि सम्मेलन के सत्र बिड़ला सभागार में तथा गुजराती सभागार में हुए जिसमें देर रात तक कवियों ने अपनी रचनाएं पूरे उत्साह से सुनाकर श्रोताओं को काव्य - सागर में गोते लगवाये।
https://www.indiainside.org/post.php?id=1396