जल संसाधन मंत्रालय के सार्वजनिक उपक्रम एनपीसीसी ने पूरे किए 61 वर्ष



10 जनवरी 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

(●) बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं के क्षेत्र में भी काम शुरू करेगी एनपीसीसी - मेघवाल

केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण तथा संसदीय कार्य राज्‍य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा है कि केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय का सार्वजनिक उपक्रम नेशनल प्रोजेक्‍ट कंस्‍ट्रक्‍शन कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनपीसीसी) अब बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं जैसे भवन, सड़क और अन्‍य पर्यावरण परियोजनाओं का भी निष्‍पादन करेगी। कल नई दिल्‍ली में एनपीसीसी के 61 वर्ष पूरे करने पर आयोजित एक समारोह की अध्‍यक्षता करते हुए उन्‍होंने कहा कि सरकार देश के बुनियादी ढाँचे के विकास के अलावा नदियों को जोड़ने और स्‍वच्‍छ गंगा परियोजना की जरूरत पर सतत् रूप से ध्‍यान केंद्रित कर रही है। श्री मेघवाल ने जानकारी दी कि एनपीसीसी ने स्‍वच्‍छ गंगा परियोजना के तहत नोडल एजेंसी के तौर पर झारखण्‍ड में काम शुरू भी कर दिया है। केंद्रीय जल संसाधन राज्‍य मंत्री ने कहा कि ‘’आने वाले समय में हमारे मंत्रालय तथा विशेष रूप से सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के निर्माण कार्यों की अच्‍छी खासी संभावनाएं हैं। मुझे यकीन है कि एनपीसीसी इस अवसर का लाभ उठाएगी और उच्‍च गुणवत्‍ता के साथ निर्धारित लागत में प्रभावी ढंग से परियोजनाओं को पूरा करके राष्‍ट्र के विकास में अपना बहुमूल्‍य योगदान करने में सक्षम होगी।‘’ उन्‍होंने एनपीसीसी की प्रगति और सफलता की कामना करते हुए विश्‍वास व्‍यक्‍त किया कि कम्‍पनी अपने गौरवशाली अतीत को पुन: प्राप्‍त करते हुए निर्माण क्षेत्र में एक अग्रणी कम्‍पनी बन सकेगी। श्री मेघवाल ने कम्‍पनी के कर्मचारियों की निष्‍ठा और समर्पण की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे ऐसे दुर्गम क्षेत्रों में परियोजनाओं का निर्माण करते है जहाँ दूसरों के जाने की हिम्‍मत भी नहीं होती।

अर्जुन राम मेघवाल का स्वागत करते हुए एनपीसीसी के अध्‍यक्ष और प्रबंध निदेशक संजय कुंडू ने कंपनी की उपलब्‍धियों का उल्‍लेख करते हुए कहा कि यह सब कर्मचारियों, शेयर होल्‍डरों, ग्राहकों और अन्‍य संबंधित लोगों के सहयोग से ही संभव हो सका है। उन्‍होंने कहा कि पिछले 50 वर्षों के दौरान कंपनी ने कई उतार-चढ़ाव देखे और भारत सरकार ने वर्ष 2009-10 के दौरान इसका पुनरुत्‍थान किया था और तब से कंपनी लगातार मुनाफा दे रही है। उन्‍होंने बताया कि कंपनी ने 50 वर्षों के अंतराल के बाद पहली बार वर्ष 2015-16 में भारत सरकार को 1.02 करोड़ रुपए का लाभांश दिया। कंपनी ने सरकार को वर्ष 2016-17 में 2.05 करोड़ रुपए का लाभांश दिया।

पिछले छह दशकों के दौरान एनपीसीसी ने ऐसे दुर्गम क्षेत्रों में कई महत्‍वपूर्ण परियोजनाओं को अंजाम दिया जहाँ निजी क्षेत्र की कंपनियां जाने की हिम्‍मत नहीं करतीं। कंपनी की निर्माण क्षमता को दर्शाने वाली कुछ महत्‍वपूर्ण उपलब्‍धियों में एक ही कामकाजी सत्र के दौरान दिल्‍ली में यमुना में वजीराबाद बैराज का निर्माण, आंध्र प्रदेश में गोदावरी नदी पर एशिया के सबसे लंबे और अर्थर कॉटन बैराज का निर्माण, मणिपुर में सिंगदा और खूगा बांधों का निर्माण, त्रिपुरा में महारानी, खोवई और मनु बैराजों का निर्माण और मणिपुर में लोकतक जल विद्युत परियोजना का निर्माण शामिल है।

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