कोलकाता, 14 जनवरी 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
---रंजीत लुधियानवी। नोटबंदी के पहले जाली नोटों का कारोबार करने वाले ज्यादातर 500 रुपये और 1000 रुपये के जाली नोट बना रहे थे। लेकिन साल भर पहले नोटबंदी के दौरान सरकार ने 1000 रुपये और 500 रुपये के नोट बंद कर दिए। इसके बाद जाली नोटों का कारोबार करने वालों ने 2000 रुपये के साथ ही 50 और 100 रुपये के जाली नोट बनाने पर जोर देना शुरू किया है।
मालूम हो कि करीब तीन दिन पहले बेलियाघाटा के सरकार बाजार से पुलिस ने जाली नोटों की तस्करी के मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया था। लेकिन जब वहां छापा मारा तो यह देख कर हैरान रह गए कि भारी संख्या में 100 रुपये के जाली नोट मौजूद हैं। बताया जाता है कि सिर्फ उस अड्डे से ही 100 रुपये के 234 जाली नोट बरामद किए गए।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि एनसीआरबी के आंकड़े भी यही कहानी बयां करते हैं कि अब लोगों ने सौ और पचास रुपये के जाली नोट बनाना शुरू कर दिया है। आंकड़ों के मुताबिक राज्य में बरामद जाली नोटों में 2015 में एक हजार रुपये के 3916 और पांच सौ रुपये के 4522 नोट थे। जबकि सौ और पचास रुपये का कोई नोट नहीं था। तब तक दो हजार रुपये के नोट छापे ही नहीं गए थे। इससे पता चलता है कि लोग 50-100 रुपये के जाली नोट नहीं छाप रहे थे। 2016 में एक हजार रुपये के 13786 और पांच सौ रुपये के 10 और एक सौ रुपये के 68 नोट बरामद किए गए थे। इसके बाद 2017 में एक हजार रुपये के 31, 500 रुपये के जहां 318 नोट बरामद किए गए, वहीं दो हजार रुपये के 2876, एक सौ रुपये के 278 और 50 रुपये के 532 नोट बरामद किए गए। आंकड़ों से पता चलता है कि 2018 के जनवरी में ही एक जगह छापामारी करके 50 रुपये के 121 और 100 रुपये के 234 जाली नोट बरामद किए गए। सूत्रों का कहना है कि जाली नोटों के तस्करों को गिरफ्तार करने पर सुरक्षा एजेंसियों को पहले पता चलता था कि पाकिस्तान से अच्छे कागज को खरीदकर बांग्लादेश में सीमा के नजदीक जाली नोटों को छापा जाता था। जिसे बाद में सीमा पार करके पश्चिम बंगाल के रास्ते देश के विभिन्न भागों में भेजा जाता था। अब खुफिया अधिकारियों का मानना है कि शायद अच्छे कागज की कमी और बड़े नोटों की अच्छी प्रति बनाने में नाकाम रहने पर छोटे नोट बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
खुफिया विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि सिर्फ बंगाल ही नहीं दूसरे राज्यों में भी बरामद किए जाने वाले नोटों में 100 रुपये और 50 रुपये के नोटों की संख्या में वृद्धि हुई है। ऐसे राज्यों में आंध्र प्रदेश, दिल्ली, गुजरात, तमिलनाडू समेत कई राज्य शामिल हैं।
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