पीएम के संसदीय क्षेत्र में जनसंख्या विस्फोट का असर!



पीएम के संसदीय क्षेत्र में जनसंख्या विस्फोट का असर!
वाराणसी में हर दूसरा व्यक्ति भूखा रहने को मजबूर!
भारत जैसे विशाल प्रजातांत्रिक देश में बर्थ कंट्रोल को लेकर आम आदमी कही भी गंभीर नहीं लगता। परिणाम स्वरूप हमारे देश में विकास के सारे पहिए धीमी रफ्तार से चलने लगे है। हम अगर रोटी कपड़ा और मकान की आवश्यकता के लिए भी सरकार पर निर्भरता प्रकट करें, किन्तु बर्थ कंट्रोल की सरकारी नीति की अवहेलना करे तो यह न्यायोचित कत्तइ नहीं कहा जाएगा। अगर सरकारे इसको लेकर सख्त हो तो राजनीतिक पार्टियों के लिए मुद्दा बन जाता है।
असफल रहा प्रयास।
संतति नियमन की दिशा में सरकारी या गैर सरकारी संस्थाओं से अब तक जो भी प्रयास किये गये उसका संतोषजनक परिणाम देश भर में कही भी देखने को नहीं मिल रहा है। तेजी से बढ़ रही जनसंख्या के सामने सबसे गंभीर मुद्दा भोजन की उपलब्धता बन चुकी है। भरोसेमंद सूत्रों के ऑकड़ो को माने तो पीएम के संसदीय क्षेत्र में जनसंख्या विस्फोट के परिणाम स्वरूप यहॉ का हर दूसरा आदमी भोजन के अभाव में जिन्दगी जी रहा है।
पुरानी जनगणना है खाद्यान्न वितरण का आधार।
सरकारी ऑकड़ों पर गौर करे तो तो ज्ञात होता है कि जिले का आपूर्ति विभाग सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों के माध्यम से जो खाद्यान्न की सप्लाई करवाता है, वो साल 2011 की जनगणना पर आधारित है। उस समय पूरे जनपद की आबादी 36 लाख 76 हजार 841 थी। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू होने के बाद जिले का खाद्यन्न विभाग पुरानी जनसंख्या को आधार मान कर प्रति व्यक्ति भोजन उपलब्ध कराने की नाकाम कोशिश कर रहा है। जिसके चलते जिले के हर दूसरे आदमी तक भोजन का आभाव बना हुआ है।
ये है सरकारी आकड़े।
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार शहर की लगभग 16 लाख जनसंख्या में लगभग ढाई लाख परिवार शामिल है, जबकि ग्रामीणों की करीब 21 लाख की जनसंख्या में लगभग तीन लाख पॉच हजार परिवार है। कुल जनसंख्या में लगभग 19 लाख 21 हजार पुरूष तथा 17 लाख 54 हजार महिलाएं है।
राशन कार्डों को आधार मान कर देखा जाए तो अन्त्योदय के 6592 कार्ड शहर में तथा 42906 ग्रामीण क्षेत्र में है जिस पर प्रतिकार्ड 35 किलो राशन दिए जाने का प्राविधान है। इसी तरह शहरी क्षेत्र में 2 लाख 20 हजार 837 तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 3 लाख 36 हजार 445 सफेद कार्डधारक है। इन्हें 5 किलों प्रति यूनिट राशन दिया जाता है।
सरकार कम दे रही है अनाज।
जिले में वितरण के लिए फिलहाल जो आकड़े है वो इस प्रकार है। लगभग 17 हजार 200 टन गेहूॅ तथा 56 हजार 300 टन चावल को स्वीकृत किया गया है। जिला पूर्ति विभाग के अधिकारी भी मानते है कि मौजूदा अनाज का आवंटन जनसंख्या के हिसाब से कम है। इसे बढ़ाने की मॉग भी काफी दिनों से चल रही है। विचारणीय ये भी है कि ये अंतहीन मॉग क्या जनसंख्या नियंत्रण से नियंत्रित की जा सकती है।

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