* सिक्के बने बवाले जान, हर शख्स हुआ परेशान
संजय पाठक, वाराणसी। पच्चीस और पचास पैसों की तरह ही अब 10, 5, 2, 1, के सिक्के भी चलन से बाहर हो गये है। जी हॉ धार्मिक नगरी वाराणसी में रहने वाला हर शख्स इन दिनों इन्ही खनखनाते सिक्को के चलन से बाहर होने की बात करता नजर आ रहा है। काशी में इस अघोषित सिक्का बंदी की झूठी अफवाह ने गरीबों के सामने बहुत बड़ी मुशिबत खड़ा कर दिया है। धर्म नगरी में सिक्कों का दान करके लोगो की पुण्य कमाने की मनोकामना दान लेने वालों के इंकार के चलते अपूर्ण रह जा रही है।
नोट बंदी के बाद इन दिनो काशी नगरी में अघोषित सिक्का बंदी की अफवाह ने भिक्षावृति तथा दिहाड़ी मजदूरी करने वाले लोगो को दो जून की रोटी के लिए भी मोहताज कर दिया है। बताया जाता है कि अधिकांश दुकानदार 10, 5, 2, 1, के सिक्कों को लेने से मना कर दिये है। छोटे दुकानदार कहते है कि होलसेलर नही ले रहे है। होलसेलर पूछने पर सीधा जबाब देते है कि बैंक सिक्कों को अपने यहॉ जमा नहीं कर रहे हैं। बैंकिंग सेवा से जुड़े लोग पूछने पर बताते है कि हमारे यहॉ सिक्का गिनने का मशीन न होने से कैशियर को काफी समय लग जाएगें इसी के चलते हम सिक्के लेने से मना कर रहे हैं।
अनुमान लगाया जा रहा है कि बैंक कर्मियों के इसी जबाब को अफवाह की फैला दिया गया है। इस अफवाह के चलते गरीबों में सरकार के प्रति तेजी से आक्रोश व्याप्त हो रहा है। हालाकि इस खबर को मीडिया में विशेष तवज्जों नहीं दिये जाने से इस झूठ को लोगो मे सच की तरह प्रसारित करने का मौका मिल रहा है।
इस मामले में जिला प्रशासन को जनता की ओर से अभी तक कोेई लिखित सूचना न मिलने की बात कही जा रही हैं। वाराणसी और आस पास के जनपदों से भी लोग एक दूसरे को सिक्का न लेने की अपील फोन पर करते सुने जा रहे हैं। जीएसटी लागू होने के तत्काल बाद ऐसी अफवाह ने आस पास के जिलों को भी प्रभावित कर दिया है। अगर जल्दी ही इस मुद्दे पर सरकार या आरबीआई ने अपनी राय स्पष्ट जारी नहीं की तो बाढ़ की संभावित खतरों के मध्य सिक्का बंदी की झूठी अफवाह कोढ़ में खाज की तरह साबित होगा।
https://www.indiainside.org/post.php?id=161