कार्यकारी आधार पर चल रहा है महामना का विश्वविद्यालय



वाराणसी, 30 जनवरी 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

(★) पीएम के संसदीय क्षेत्र का बीएचयू 4 माह से कुलपति विहिन

---हरेन्द्र शुक्ला। देश की शैक्षिक धरातल को पुख्ता करने के लिए महामना पं• मदनमोहन मालवीय जिस काशी हिंदू विश्वविद्यालय की 102 वर्ष पूर्व रचना रचना की, वह विश्वविद्यालय इन दिनों शिक्षा सहित अन्य बुनियादी विकास की चिंतन करने वाली सरकार के बावजूद कार्यकारी आधार पर ही टिक गया है। यहां के तमाम ओहदे इस कदर खाली पड़े हैं कि किसी तरीके से काम ठरकाया जा रहा है। यह एक दिन की बात नहीं है महिनों महिनों की बात है।

गातव्य हो कि लगभग चार माह पूर्व निवर्तमान कुलपति प्रो• गिरीश चन्द्र त्रिपाठी का कार्यकाल समाप्त होने के बाद आज तक विश्वविद्यालय को स्थायी कुलपति नसीब नहीं हुआ। कुलपति प्रो• त्रिपाठी का कार्यकाल समाप्त होने के महिनों बाद प्रो• केलकर की अध्यक्षता में नये कुलपति की नियुक्ति के लिए सर्च कमेटी बनाई गई। जबकि इसके पहले कुलपतियों के कार्यकाल समाप्त होने के छ: माह पूर्व ही सर्च कमेटी का गठन हो जाया करता था ताकि विश्वविद्यालय कुलपति विहिन न रहे और शैक्षिक कार्य प्रभावित न हो।

मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा गठित सर्च कमेटी के पास लगभग 400 आवेदन तो जरूर आया लेकिन सर्च कमेटी 4 माह में भी बीएचयू को नया कुलपति देने में नाकाम रही। जिसके कारण रजिस्ट्रार को कार्यवाहक कुलपति बनाया गया है। इसके अलावा वित अधिकारी का पद लगभग एक वर्ष से खाली है इस महत्वपूर्ण पद को भी ज्वाइंट रजिस्ट्रार को कार्यवाहक वित अधिकारी बनाकर काम सरकाया जा रहा है। यही हाल केन्द्रीय ग्रंथालय, यूजीसी एकेडमिक स्टाफ कालेज, सर सुन्दरलाल अस्पताल, राजीव गांधी दक्षिणी परिसर का कमान कार्यकारी हाथों को ही सौंपकर किसी तरह मामले को निपटाया जा रहा है।

बीएचयू में चार माह बाद भी कुलपति की नियुक्ति न होने के कारण कार्यकारिणी परिषद और विद्वत परिषद की बैठक नही हो पा रही है जिसके कारण विश्वविद्यालय का शैक्षिक विकास प्रभावित होना लाजिमी है। यही नही इस वर्ष विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह भी प्रभावित होना स्वभाविक है।

इस बाबत सामाजिक कार्यकर्ता शमीम मिल्की का कहना है कि देश के यश्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में चार माह से बीएचयू कुलपति विहिन है ऐसे में शिक्षा के क्षेत्र में विकास की उनकी प्रतिबद्धता पर सवाल उठना लाजिमी है।

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