कोलकाता, 30 जनवरी 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
---रंजीत लुधियानवी। पश्चिम बंगाल के कालना इलाके के कालीनगर गांव में रहने वाले युवक काम की तलाश में महाराष्ट्र गए थे, लेकिन आरोप है कि उन्हें प्रताड़ित कियाजा रहा है। कई लोगों को गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया जा रहा है। इससे इलाके के लोगों में आतंक कायम है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके से करीब 100 युवक विभिन्न चरणों में काम की तलाश में महाराष्ट्र गए थे, ऐसे लोगों में ज्यादातर श्रमिक श्रेणी में काम करने वाले लोग शामिल हैं।
आरोप है कि उनके पास सचित्र मतदाता पत्र, आधार कार्ड होने के बावजूद उन्हें बांग्लादेशी का तमगा लगाकर मुंबई पुलिस जेल में ठूंस रही है। ऐसे परिवार के बच्चों को भी नहीं छोड़ा जा रहा है। बताया जाता है कि ऐसे करीब 15 श्रमिक मुंबई की जेलों में कैद हैं।
गांव वालों का कहना है कि बंगालियों को बांग्लादेशी बता कर प्रताड़ित किया जाना बंद किया जाना चाहिए। बताया जाता है कि बीते 30 सालों के दौरान कालना के कालीनगर गांव के करीब 300 लोग रोजगार की तलाश में मुंबई समेत विभिन्न इलाकों में गए हैं। कई लोग सपरिवार वहां रहते हैं। ऐसे लोगों में कोई मछली बाजार में तो कोई गहनों की दुकान, सब्जी बाजार समेत दूसरी जगह काम कर रहे हैं। ऐसे लोगों को पुलिस प्रताड़ना का शिकार होना पड़ रहा है।
गांव के रहने वाले इंद्रिश अली सरकार का कहना है कि मेरे भाई शफीकुल सरकार को महज बंगाली होने के कारण जेल में कैद करके रखा गया है। पुलिसिया आतंक के कारण मुंबई से भागकर आए बाबर अली का कहना है कि बांग्ला भाषा में बात करने वालों को पुलिस बांग्लादेशी मान कर गिरफ्तार कर लेती है।
वहां रहने वाले श्रमिक नुरूल मोल्ला और उसकी पत्नी रीना को पुलिस ने बांग्लादेशी के तौर पर गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही 12 साल के किशोर रफीकुल और आठ साल की लड़की नर्गिस को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इस बारे में कालना पुलिस और स्थानीय प्रशासन से हस्तक्षेप की गुहार की जाएगी, जिससे इलाके के लोगों की घर वापसी हो सके।
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