केंद्र बच्चों के मुंह से छीन रहा है निवाला...!



---रंजीत लुधियानवी, कोलकाता, 02 फरवरी 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

केंद्रीय बजट में आखरी बार 2015-16 वित्त वर्ष में मिड डे मिल (दोपहर के भोजन) की राशि में मामूली सी वृद्धि की गई थी। इसके बाद केंद्र दो बजट पेश कर चुका है, लेकिन इस मद में किसी तरह की वृद्धि नहीं की गई है। आरोप है कि इस साल के बजट में वित्त मंत्री ने दोपहर के भोजन के बारे में दो शब्द भी नहीं कहे हैं। महंगाई के दौर में छात्र-छात्राओं के लिए दोपहर के भोजन में राशि में वृद्धि नहीं किए जाने से राज्य के शिक्षा जगत से जुड़े लोग नाराज तो हैं, चिंतित भी हैं।

गौरतलब है कि बजट से विभिन्न लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। खास तौर पर गांव का बजट बताए जाने पर ग्रामीण इलाकों में रहने वाले छात्र-छात्राओं के लिए ही दोपहर के भोजन का ज्यादा महत्व होने के बावजूद उन्हें उपेक्षित किए जाने से सवाल उठ रहे हैं कि आखिर ऐसा क्यों किया गया ? महंगाई के दौर में यह सवाल भी पूछे जा रहे हैं कि ऐसा ही रहा तो बच्चों को दोपहर का भोजन कैसे दिया जा सकता है ?

शिक्षा जगत से जुड़े लोग सवाल उठा रहे हैं कि दोपहर के भोजन में हफ्ते में दो दिन अंडा और हफ्ते भर प्रोटीन युक्त भोजन देने के बारे में निर्देश है। दाल-चावल-सब्जी के अतिरिक्त दूसरे खाद्य पदार्थ थाली में शामिल होने चाहिए। इन दिनों एक अंडा ही पांच-छह रुपये में मिल रहा है, जबकि थाली के लिए महज 4 रुपए 13 पैसे प्रदान किए जाते हैं।

वित्त मंत्री की ओर से बजट पेश किए जाने के बाद से सर्व शिक्षा अभियान से जुड़े अधिकारी परेशान हैं, उनका मानना था कि महंगाई के दौर में इस साल दोपहर के भोजन की राशि में खासी वृद्धि की जाएगी। लेकिन मंत्री की ओर से दोपहर के भोजन के बारे में एक भी शब्द उच्चारित नहीं किया गया, जिससे गुस्सा दिख रहा है।

स्कूल शिक्षा विभाग के सूत्रों का कहना है कि पहली बार 2001 में आठवीं कक्षा तक पढ़ने वालोें के लिए दोपहर के भोजन की व्यवस्था शुरू हुई थी। केंद्र सरकार की ओर से इस परियोजना को शुरू करने का उद्देश्य था कि बच्चे स्कूल छोड़कर काम-धंधे में नहीं लगें। हालांकि 2001 में सर्व शिक्षा मिशन के तहत परियोजना चालू होने के बाद वास्तव में देश भर में यूपीए सरकार के दौर में 2004 में देश भर में यह परियोजना चालू हुई थी। इसके बाद 2014-15 तक हर साल सात फीसद की दर से राशि में वृद्धि होती रही है। 2015-16 में मामूली वृद्धि की गई थी, लेकिन इसके बाद वृद्धि नहीं की गई।

स्कूल शिक्षा विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि 2016-17 वित्त वर्ष में केंद्र ने दोपहर के भोजन के लिए आबंटित राशि ही नहीं भेजी। बच्चों के मुंह से निवाला छीना जा रहा है। जबकि खुद बेहिसाब खर्च कर रहे हैं।

विकास भवन सूत्रों का कहना है कि अब प्राइमरी स्कूल के बच्चों के लिए दोपहर के भोजन के लिए प्रति छात्र 4 रुपए 13 पैसे, उच्च प्राथमिक स्कूल के लिए 6 रुपए 18 पैसे खर्च का प्रावधान है। इसमें केंद्र 60 फीसद राशि देता है और राज्य को 40 फीसद राशि देनी पड़ती है। लेकिन केंद्र यह तय करता है कि प्रति छात्र-छात्राएं कितने पैसे खर्च किए जाएंगे। बीते दो सालों रकम में वृद्धि नहीं किए जाने और इस साल भी वृद्धि नहीं होने से स्कूल शिक्षा विभाग की चिंताएं बढ़ रही हैं। अगर एक अंडे की कीमत ही साढ़े पांच-छह रुपए हो, तब दूसरा सामान कैसे खरीदा जा सकता है ? हालांकि दोपहर के भोजन में धांधली के आरोप मिलने के बाद उस पर लगाम लगाने की कोशिशें हो रही हैं। अब अधिकारियों की चिंता यह है कि कैसे इतनी कम रकम में बच्चों को भोजन दिया जा सकेगा ?

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