वैलेंटाइन डे पर बंगाल सरकार ने बेचे गुलाब फूल



---रंजीत लुधियानवी, कोलकाता, 14 फरवरी 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल में जब से तृणमूल कांग्रेस की सरकार सत्तारूढ़ हुई है, होली-दीवाली, ईद-बकरीद, सरस्वती पूजा-दुर्गापूजा से लेकर हर तरह के सामाजिक-धार्मिक त्योहार में राज्य सरकार बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेती है। इसके एक ओर राज्य सरकार के राजस्व में भारी वृद्धि हो रही है तो दूसरी ओर प्रशासन को लोगों के साथ मिलने का मौका मिल रहा है। हाल ही में लिट्टी समारोह का आयोजन करने के बाद वैलेंटाइन डे के मौके पर प्रेम दिवस का पालन करने वालों को सस्ता और सुलभ दर पर गुलाब पहुंचाने के लिए फूलों की बिक्री की। इससे प्रेमी जोड़ों की खुशी का पारावार नहीं रहा, हालांकि मौका देख कर भारी कीमत में फूल बेचने वाले फिर भी कई जगह लोगों से ज्यादा कीमत वसूलने में सफल रहे।

राज्य खाद्य प्रसस्ंरण व उद्यान पालन निगम बुधवार सुबह से ही फूलों की छह गाड़ियां लेकर विक्टोरिया मेमोरियल, मिलेनियम पार्क, नंदन, कालेज स्कवायर, सिटी सेंटर और टू प्रांगण में पहुंच गया था। यहां देशी लाल गुलाब, मिनी पल व डच गुलाब जहां युवाओं को लुभा रहे थे। वहीं, लिलि, कारोनेशन व आर्किड जैसे फूल भी मौजूद थे। इसके साथ ही छोटे टब में फूल के साथ खाद और फूलों को सजाने वाली टोकरी भी यहां मिल रही थी। यहां एक गुलाब 10 रुपए से लेकर 30 रुपए तक, लिलि 35 रुपए से लेकर 40 रुपए तक और टब समेच गुलाब का पेड़ 150 रुपए से लेकर 250 रुपए में मिल रहा था।

निगम के एक अधिकारी ने बताया कि ग्लोब नर्सरी के साथ मिलकर वैलेंटाइन डे दिवस पर प्रेमी जोड़ों को खुश करने के तहत यह बिक्री की गई है। पिछले साल प्रायोगिक तौर पर फूलों की बिक्री में लोगों का जबरदस्त उत्साह देखते हुए इस साल व्यापक पैमाने पर फूल खरीदे गए।

मालूम हो कि दक्षिण चौबीस परगना और पूर्व मेदिनीपुर जिले के किसानों से देशी गुलाब के फूल खरीदे गए तो ऊटी से डच गुलाब मंगवाए गए। देशी गुलाब की डाल लंबी होती है और ज्यादा कांटे होते हैं, जबकि डच गुलाब लगभग कांटा रहित होता है। डच गुलाब ज्यादा समय तक तरोताजा रहता है, इससे उसकी मांग ज्यादा रहती है। हालांकि देशी गुलाब की सुगंध का जवाब नहीं। राज्य सरकार की ओर से इस बारे में भी सोचा जा रहा है कि क्या वैलेंटाइन डे के अलावा दूसरे किसी मौकों पर भी क्या इस तरह फूलों की बिक्री की जासकती है ? ऐसा किए जाने से कहां किसानों को फायदा होगा, वहीं लोगों को भी खुशी मिल सकेगी।

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