---रंजीत लुधियानवी, कोलकाता, 14 फरवरी 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
पश्चिम बंगाल केंद्र सरकार की ओर से बजट में घोषित राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (एनएचपीएस) में शामिल नहीं होने का फैसला किया है। इस तरह मोदीकेयर के नाम से मशहूर उक्त योजना से बाहर होने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नदिया जिले के कृष्णनगर में अपनी एक जनसभा के दौरान इसका एलान किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की अपनी स्वास्थ्य सेवा योजना में 50 लाख लोगों को शामिल किया गया है। ऐसे में केंद्रीय योजना में शामिल होने की क्या तुक है ?
ध्यान रहे कि वित्त मंत्री अरुण जेटली ने वर्ष 2018-19 का बजट पेश करते हुए कहा था कि दुनिया की इस सबसे बड़ी बीमा योजना के दायरे में 50 करोड़ लोगों को शामिल किया जाएगा। इसके तहत एक परिवार को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करने पर सालाना 1200 रुपए का प्रीमियम लगेगा। राज्यों को भी अपनी सहूयिलत के मुताबिक योजना का चयन करना था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र ने एक ऐसी स्वास्थ्य योजना तैयार की है जिसका 40 फीसद खर्च राज्यों को देना होगा। उन्होंने सवाल किया कि जब राज्य में पहले से ही अपनी स्वास्थ्य साथी योजना है तो वह ऐसी ही दूसरे कार्यक्रम पर पैसे क्यों खर्च करेगी ? ममता ने कहा कि संसाधन रहने की स्थिति में राज्यों को अपनी योजना खुद बनाने का अधिकार है।
नीति आयोग व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि एनएचपीएस से सरकारी खजाने पर 100 से 120 अरब रुपए का बोझ पड़ेगा। केंद्र सरकार इसका 60 फीसद खर्च उठाएगी जबकि बाकी 40 फीसद राज्यों को देना होगा।
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