गर्भपात करना मानवता की हत्या है : श्री १०८ प्रतीक सागर जी महाराज



हावड़ा, 15 फरवरी 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

हावड़ा के डाबसन रोड स्थित श्री दिगम्बर जैन पार्श्वनाथ मन्दिर के परिसर में आयोजित प्रैस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए श्री १०८ प्रतीक सागर जी महाराज ने कहा कि संत बादलों की भांति होते हैं, वे वर्षा करते हुए आगे बढ़ते हैं वही उस वर्षा से खेत हरियाली लाते है तो कुछ बंजर रह जाते है तो कहीं सड़कों पर पड़े गोबर भी धूल जाते हैं। संत किसी का परिवर्तन नहीं करते, वे मानव धर्म का प्रसार करते हैं।

भारत की संस्कृति पर बोतले हुए उन्होने कहा कि हमारी संस्कृति तप व त्याग की है, प्रेम व भाईचारे की है। भारत कोई ज़मीन का टुकड़ा नहीं अपितु दिलों को जीतने का स्थान है। विश्व को आदर्श व आचरणकर्ण बनाने की प्रेरणा देती है। यही वजह है कि इस धरती पर राम कृष्ण बुद्ध महावीर जैसी महान आत्माओं ने जन्म लिया जिन्होने मनुष्य को धार्मिक नहीं बल्कि एक अच्छा इंसान बनने की राह दी। क्योंकि आज का इंसान कल का भगवान है। इस पंच सितारा संस्कृति ने हमारी पूरी संस्कृति को नष्ट करने की कोशिश की है जिस कारण जिस भूमि पर कभी तीर्थअंतर व अवतार पुरुषों के गर्व कल्याण मनाए जाते थे आज वहीं गर्भपात किए जाते हैं। गर्भपात करना मानवता की हत्या है और इस मानवता की हत्या से बचने के लिए हम सभी को प्रयास करना होगा। आज देश में जननी व जनक का सम्मान घट रहा है। संतों के रहते हुए माता पिता को अनाथों की तरह जीवन जीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। जिस देश में बुजुर्गों का अनादर होता है उस देश व परिवार से लक्ष्मी अपना मुख फेर लेती हैं व दरिद्र अपना डेरा डाल लेता है।

आगे उन्होने कहा कि मैं मुनि प्रतीक सागर इस बंगाल की माटी पर प्रेम भाईचारा व मानवता का पाठ पढ़ाने आया हूँ, आदमी को आदमी से मिलाने आया हूँ और स्वयं राम कृष्ण महावीर समाज में व्याप्त बुराईयों से लड़ने की ताकत पैदा करने आया हूँ। आज लोग घर बदलने को तैयार हैं, भेस बदलने को तैयार हैं लेकिन अपना मन व स्वभाव बदलने को तैयार नहीं। आज आवश्यकता है घर में निवास के साथ साथ एक दूसरे को सांप्रदायिकता की अंधी दौड़ से निकालकर मानवता की पाठ अपनाने का। सांप्रदायिकता तो ताड़ती है वहीं मानवता मनों को जोड़ती है।

उन्होने बताया कि विश्व में किसी भी देश को मातृ का दर्जा नहीं है, मात्र भारत ही एक मातृ देश है। राजनीति पर सवालों का जवाब देते हुए प्रतीक सागर जी महाराज ने कहा कि आज कि राजनीति दुरा नीति है। विगत राजनीति कर रहे है तभी धर्म की आड़ ले रहे हैं।

https://www.indiainside.org/post.php?id=1772