---रंजीत लुधियानवी, कोलकाता, 16 फरवरी 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
महानगर कोलकाता में जबरन धर्मांतरण की कोशिश के बारे में पुलिस-खुफिया विभाग की भूमिका को लेकर जहां सवाल उठाए जा रहे हैं। दूसरी ओर, एक बार फिर प्रशासन की ओर से टैबलायड, पोर्टल व सोशल मीडिया पर खास नजर रखी जा रही है। जिससे दोबारा ऐसी घटनाएं नहीं हो सकें।
सूत्रों का कहना है कि भड़काने वाले वीडियो, फेसबुक के प्रचार पर पुलिस नजर रखेगी। हिंदू संहति बीते 10 साल से भड़काने वाली कार्रवाइयां कर रही है। स्वदेश संहति संवाद नामक एक टैबलायड चालू किया गया था, जिसे बाद में मासिक पत्रिका में बदल दिया गया। इसके साथ ही हिंदू संहति के नाम पर पोर्टल चालू किया गया। हिंदू संहति ग्लोबल मीडिया, न्यूयार्क के साथ ही फेसबुक पेज स्ट्रगल फार हिंदू एगजिस्टेंट मौजूद है। बताया जाता है कि सारा कुछ तपन घोष की देखरेख में ही होता है। उसके साथ ही भाजपा के आध्यात्मिक सेल के चिंतक जुड़े हुए हैं। बताया जाता है कि संगठन का दावा है कि विदेशी नागरिकों समेत 35,000 सदस्य हैं और फिलहाल नए सदस्य नहीं लिए जा रहे हैं।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि राज्य के कम से कम 12 जिलों में संगठन की ओर से प्रचार अभियान चलाया जा रहा है। आरएसएस के साथ विवाद के बाद संगठन की स्थापना की गई थी। इसका घोषित उद्देश्य पीड़ित हिंदुओं की मदद करना, कानूनी सलाह-मश्विरा देना, उन्हें जागरुक करना, आत्मरक्षा के बारे में जानकारी देना शामिल है। गरीब, आदिवासी इलाकों में संगठन ज्यादा सक्रिय है। संगठन की ओर से जिस परिवार के धर्मांतरण का दावा किया गया, आरएसएस के पूर्व प्रचारक देवतनू भट्टाचार्य का कहना है कि वे बंगाल के रहने वाले नहीं हैं, उन्होंने असम के नेताओं को धर्म बदलने के बारे में पत्र लिखा था।
मालूम हो कि बुधवार को धर्मांतरण की कोशिश के दौरान पत्रकारों के साथ मारपीट करने के आरोप में घोष समेत चार लोगों को अदालत ने पुलिस हिरासत में भेजा है। पुलिस का कहना है कि संगठन की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
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