---हरेन्द्र शुक्ला, वाराणसी, 17 फरवरी 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
(★) ऐप के जरिए भोजपुरी को आमजनों तक पहुंचाने की जरुरत - प्रो वी एन मिश्र
काशी की आत्मा भोजपुरी है। यहां खडी बोली भोजपुरी की ओर से ही जाती है। काशी में तत्व की प्राप्ति के लिए वाद विवाद नहीं होता सिर्फ प्रतिस्पर्धा होती है। अध्यात्मिक चेतना का खनिज है भोजपुरी। यहां शिवता धर्म को लेकर नहीं मर्म को लेकर चलती है। अध्यात्म भी कहता है कि संगीत के माध्यम से शिव की प्राप्ति होती है। शिव का तत्व नादब्रह्म है, यही कारण है कि काशी का हर नागरिक शिव चेतना को प्राप्त है। यह बात शनिवार को बीएचयू भोजपुरी अध्ययन केन्द्र की ओर से आयोजित दस दिवसीय "काशी जनपद की सांगीतिक विरासत और उसकी वर्तमान स्थिति" विषयक संगोष्ठी का उद्घाटन करते हुये संगीत मर्मज्ञ प्रो राजेश्वर आचार्य ने कही। उन्होंने कहा कि संवेदनाओं का जागरण लोरी के माध्यम से माता करती हैं। मां की गोद शिशुओं के लिए खेल का मैदान है, शौचालय है और भोजनालय भी है। यही कारण है कि मातृ चेतना के साथ शिव को मां ही संभालती है। प्रो आचार्य ने काशी की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुये कहा कि काशी ही एक ऐसी जगह है जहां भोजपुरी ठगों से भी बचाती है। लोकाभियक्ति का प्रतिबिंब भी है। यहां समाज की प्रतिछाया कजरी, होरी, सोहर, विवाह गीत और चैती में देखने सुनने को मिलती है। भोजपुरी अन्य भाषाओं की गीता , कुरान, बाईबिल और गुरु ग्रंथ भी है। समारोह की अध्यक्षता करते हुये बीएचयू न्यूरोलॉजी विभाग के प्रो विजययनाथ मिश्र ने कहा कि लोक संगीत लोक की सांस्कृतिक विरासत है। लोक संस्कृति के संरक्षण के बिना समाजिक ताने- बाने को मजबूत नही किया जा सकता। उन्होंने भोजपुरी को समृद्ध करने के लिए भोजपुरी ऐप बनाने का भी सुझाव दिया ताकि इस डिजिटल दौर में भोजपुरी आमजन की भाषा बन सके। अतिथियों का स्वागत करते हुये भोजपुरी अध्ययन केन्द्र के समन्वयक प्रो श्रीप्रकाश शुक्ल ने कहा कि संगीत की विलक्षण विरासत के रुप मे प्रो विजययनाथ मिश्र को पाकर बीएचयू का भोजपुरी अध्ययन केन्द्र अभिभूत है। इस अवसर पर प्रो रामाज्ञा शशिधर, डा ज्ञानेशचन्द्र पाण्डेय, प्रो सी बी त्रिपाठी ,राकेश पाण्डेय आदि मौजूद रहे। समारोह का संचालन अनिल सूर्यधर एवं धन्यवाद ज्ञापन सुश्री ऋचा ने दिया।
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