• किशोर कुमार को भारत रत्न
गीतं, वाद्यम तथा नृत्यम त्रयं संगीत मुच्यते।
अर्थात- गीत, वाद्य तथा नृत्य, ये तीनों मिलकर संगीत कहलाते हैं।
वास्तव में ये तीनों कलाएं गाना बजाना व नृत्य एक दूसरे से स्वतंत्र हैं किन्तु स्वतंत्र होते हुए भी गान के अधीन वादन तथा वादन के अधीन नृत्य है अतः इन तीनों कलाओं में “गान” को ही प्रधानता दी गयी है। प्राचीन काल में इन तीनों कलाओं का प्रयोग अधिकांशतः एक साथ ही हुआ करता था। संगीत और गीत शब्द में‘सम’उपसर्ग लगाकर बना है, सम यानि सहित तथा गीत यानि गान। गान के सहित अर्थात अंगभूत क्रियाओं नृत्य व वादन के साथ किया हुआ कार्य संगीत कहलाता है।
नृत्यम वाद्यानुगं प्रोक्तं वाद्यम गीतानुवर्ती च।
अतो गीतं प्रधानत्वादत्रादवमभिदियते।।
अर्थात- गान के अधीन वादन तथा वादन के अधीन नृत्य है अतः इन तीनों कलाओं में “गान” को ही प्रधानता दी गयी है।
निःसंदेह आज भी हमारे सुख दुख मनोदशा दौरान संगीत एक परम मित्र समान है।
गायन आवाज के साथ संगीत के आवाज़ का निर्माण करने का कार्य है और निरंतर रंग-शैली, लय और मुखर तकनीकों की विविधता के उपयोग से नियमित भाषण को बढ़ाता है। जो व्यक्ति गायन की प्रस्तुति करते है उन्हे गायक कहते हैं।
कल 4 अगस्त है। एक महान गायक किशोर कुमार का जन्म दिवस जिन्होने कई पीड़ियों को अपने जादुई आवाज़ से बांधे रखा है और आज भी उनका करिश्मा कायम है और आगे भी रहेगा। आज के कितने नामी गायक भी अपने शुरुआती दौर में उन्हीं के गानों के सहारे गायन के क्षेत्र में कदम रखा था, सफलता हासिल कर नाम कमाया और आज भी उनके गीतों को गाया करते हैं।
किशोर कुमार का जन्म 4 अगस्त 1929 को मध्य प्रदेश के खंडवा शहर में वहाँ के जाने माने वकील कुंजीलाल के यहाँ हुआ था। किशोर कुमार का असली नाम आभास कुमार गांगुली था। किशोर कुमार अपने भाई बहनों में दूसरे नम्बर पर थे। उन्होंने अपने जीवन के हर क्षण में खंडवा को याद किया, वे जब भी किसी सार्वजनिक मंच पर या किसी समारोह में अपना कार्यक्रम प्रस्तुत करते थे, शान से कहते थे “किशोर कुमार खंडवे वाले”, अपनी जन्म भूमि और मातृभूमि के प्रति ऐसा ज़ज़्बा बहुत कम लोगों में दिखाई देता है। भारतीय सिनेमा के सबसे मशहूर पार्श्वगायक समुदाय में से एक रहे हैं। वे एक अच्छे अभिनेता के रूप में भी जाने जाते हैं। हिन्दी फ़िल्म उद्योग में उन्होंने बंगाली, हिंदी, मराठी, असमी, गुजराती, कन्नड़, भोजपुरी, मलयालम, उड़िया और उर्दू सहित कई भारतीय भाषाओं में गाया था। उन्होंने सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायक के लिए 8 फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार जीते और उस श्रेणी में सबसे ज्यादा फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार जीतने का रिकॉर्ड बनाया है। उसी वर्ष उन्हें मध्यप्रदेश सरकार द्वारा लता मंगेशकर पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उस वर्ष के बाद से मध्यप्रदेश सरकार ने "किशोर कुमार पुरस्कार" (एक नया पुरस्कार) हिंदी सिनेमा में योगदान के लिए चालु कर दिया था।
किशोर कुमार इन्दौर के क्रिश्चियन कॉलेज में पढ़े थे और उनकी आदत थी कॉलेज की कैंटीन से उधार लेकर खुद भी खाना और दोस्तों को भी खिलाना। वह ऐसा समय था जब 10-20 पैसे की उधारी भी बहुत मायने रखती थी। किशोर कुमार पर जब कैंटीन वाले के पाँच रुपया बारह आना उधार हो गए और कैंटीन का मालिक जब उनको अपने पाँच रुपया बारह आना चुकाने को कहता तो वे कैंटीन में बैठकर ही टेबल पर गिलास और चम्मच बजा बजाकर पाँच रुपया बारह आना गा-गाकर कई धुन निकालते थे और कैंटीन वाले की बात अनसुनी कर देते थे। बाद में उन्होंने अपने एक गीत में इस पाँच रुपया बारह आना का बहुत ही खूबसूरती से इस्तेमाल किया। शायद बहुत कम लोगों को पाँच रुपया बारह आना वाले गीत की यह असली कहानी मालूम होगी।
किशोर कुमार की शुरुआत एक अभिनेता के रूप में फ़िल्म शिकारी (1946) से हुई। इस फ़िल्म में उनके बड़े भाई अशोक कुमार ने प्रमुख भूमिका निभाई थी। उन्हें पहली बार गाने का मौका मिला 1948 में बनी फ़िल्म जिद्दी में जिसमें उन्होंने देव आनंद के लिए गाना गाया। किशोर कुमार के०एल० सहगल के जबर्दस्त प्रशंसक थे इसलिए उन्होंने यह गीत उन की शैली में ही गाया। जिद्दी की सफलता के बावजूद उन्हें न तो पहचान मिली और न कोई खास काम मिला। उन्होंने 1951 में फणी मजूमदार द्वारा निर्मित फ़िल्म 'आंदोलन' में हीरो के रूप में काम किया मगर फ़िल्म फ़्लॉप हो गई। 1954 में उन्होंने बिमल राय की 'नौकरी' में एक बेरोज़गार युवक की संवेदनशील भूमिका निभाकर अपनी जबर्दस्त अभिनय प्रतिभा से भी परिचित किया। इसके बाद 1955 में बनी "बाप रे बाप", 1956 में "नई दिल्ली", 1957 में "मि० मेरी" और "आशा" और 1958 में बनी "चलती का नाम गाड़ी" जिसमें किशोर कुमार ने अपने दोनों भाईयों अशोक कुमार और अनूप कुमार के साथ काम किया और उनकी अभिनेत्री थी मधुबाला। यह भी मजेदार बात है कि किशोर कुमार की शुरुआत की कई फ़िल्मों में मोहम्मद रफ़ी ने किशोर कुमार के लिए अपनी आवाज दी थी। मोहम्मद रफ़ी ने फिल्म ‘रागिनी’ तथा ‘शरारत’ में किशोर कुमार को अपनी आवाज उधार दी तो मेहनताना लिया सिर्फ एक रुपया। काम के लिए किशोर कुमार सबसे पहले एस० डी० बर्मन के पास गए थे जिन्होंने पहले भी उन्हें 1950 में बनी फ़िल्म "प्यार" में गाने का मौका दिया था। एस० डी० बर्मन ने उन्हें फिर "बहार" फ़िल्म में एक गाना गाने का मौका दिया। कुसुर आप का और यह गाना बहुत हिट हुआ।
शुरू में किशोर कुमार को एस० डी० बर्मन और अन्य संगीतकारों ने अधिक गंभीरता से नहीं लिया और उनसे हल्के स्तर के गीत गवाए गए लेकिन किशोर कुमार ने 1957 में बनी फ़िल्म "फंटूस" में दुखी मन मेरे गीत पर अपनी ऐसी धाक जमाई कि जाने माने संगीतकारों को किशोर कुमार की प्रतिभा का लोहा मानना पड़ा। इसके बाद एस० डी० बर्मन ने किशोर कुमार को अपने संगीत निर्देशन में कई गीत गाने का मौका दिया। आर० डी० बर्मन के संगीत निर्देशन में किशोर कुमार ने 'मुनीम जी', 'टैक्सी ड्राइवर', 'फंटूश', 'नौ दो ग्यारह', 'पेइंग गेस्ट', 'गाईड', 'ज्वेल थीफ़', 'प्रेमपुजारी', 'तेरे मेरे सपने' जैसी फ़िल्मों में अपनी जादुई आवाज से फ़िल्मी संगीत के दीवानों को अपना दीवाना बना लिया। एक अनुमान के अनुसार, किशोर कुमार ने वर्ष 1940 से वर्ष 1980 के बीच के अपने करियर के दौरान करीब 574 से अधिक गाने गाए। किशोर कुमार ने हिन्दी के साथ ही तमिल, मराठी, असमी, गुजराती, कन्नड़, भोजपुरी, मलयालम और उड़िया फ़िल्मों के लिए भी गीत गाए। किशोर कुमार को आठ फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार मिले, उनको पहला फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार 1969 में अराधना फ़िल्म के गीत रूप तेरा मस्ताना प्यार मेरा दीवाना के लिए दिया गया था। किशोर कुमार की खासियत यह थी कि उन्होंने देव आनंद से लेकर राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन के लिए अपनी आवाज दी और इन सभी अभिनेताओं पर उनकी आवाज ऐसी रची बसी मानो किशोर खुद उनके अंदर मौजूद हों। किशोर कुमार ने 81 फ़िल्मों में अभिनय किया और 18 फ़िल्मों का निर्देशन भी किया। फ़िल्म 'पड़ोसन' में उन्होंने जिस मस्त मौला आदमी के किरदार को निभाया वही किरदार वे जिंदगी भर अपनी असली जिंदगी में निभाते रहे।
1975 में देश में आपातकाल के समय एक सरकारी समारोह में भाग लेने से साफ मना कर देने पर तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री विद्याचरण शुक्ला ने किशोर कुमार के गीतों को आकाशवाणी से प्रसारित किए जाने पर रोक लगा दी थी और किशोर कुमार के घर पर आयकर के छापे भी डाले गए मगर किशोर कुमार ने आपात काल का समर्थन नहीं किया।
आज 3 अगस्त को हावड़ा के बाबुडांगा स्थित टोल कट लेन मैदान के ठीक समीप एक स्टुडियो में उत्तर हावड़ा विधायक व पश्चिम बंगाल सरकार में खेल राज्य मंत्री व क्रिकेटर लक्ष्मी रतन शुक्ला एक नयी पारी खेलते नज़र आए। हालाकि क्रिकेट के मैदान में व बंगाल विधान सभा में तो वो देखे गए थे परन्तु एक स्टुडियो में किशोर कुमार के गाने गाते हुए रिकॉर्डिंग करवाते हुए पहली दफा देखे गए। इस सावन के महीने में किशोर कुमार के गीतों के बारिश में वे पूरी तरह भीग चुके है। उनके द्वारा गाया गया किशोर कुमार का गाना “चलते चलते” अभी तक हजारों उत्तर हावड़ा के लोगों के मोबाइल तक पहुँच चुकी है। वहीं गाते वक़्त विडियो भी शूट किया गया है जो रात्रि तक सोसल मीडिया प्लैटफ़ार्म पर दिखने लगेगी। इन सब की वजह मात्र बस एक है, किशोर दा को “भारत रत्न”।
सालकिया किशोर कुमार मेमोरियल कल्चरल एसोशिएसन द्वारा किशोर कुमार के जन्मदिवस के अवसर पर 4 अगस्त को कोलकाता के धर्मतल्ला से लेकर हावड़ा सालकिया धर्मतल्ला तक सुबह 7:30 बजे से एक विशाल रैली का आयोजन किया जा रहा है जिसके माध्यम से किशोर कुमार को भारत रत्न से सम्मानित किया जाए, की आवाज़ को केन्द्र तक पहुँचाने का एक बेहतरीन प्रयास होगा। ज्ञात हो संस्था सालकिया किशोर कुमार मेमोरियल कल्चरल एसोशिएसन द्वारा गत 3 वर्षों से यह प्रयास किया जा रहा है वहीं संस्था द्वारा आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में मास पिटिशन भी चलाया जाता रहा है।
कल की रेली विशाल होगी जिसमें हजारों की संख्या में किशोर कुमार प्रेमी होंगे। इन हजारों दिलों का नेतृत्व करेंगे मुख्य अतिथि पश्चिम बंगाल सरकार में सहकारिता मंत्री अरूप राय, सालकिया किशोर कुमार मेमोरियल कल्चरल एसोशिएसन के चीफ़ पेट्रोन, खेल राज्य मंत्री, क्रिकेटर लक्ष्मी रतन शुक्ला, संस्था के पेट्रोन, एमएमआईसी बानी सिंघा राय, प्रकाश शुक्ला व भारत वर्ष के विभिन्न प्रदेशों से आए हुए विशेष अतिथिगण व सक्रिय भूमिका में होंगे संस्था के सांस्कृति सचिव समित घोष, कोषाध्यक्ष किशोर देशानी, सचिव सुब्रोतो सिन्हा, सहायक सचिव सुरोजीत घोष व अन्य।
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