1880 का मुगलसराय स्टेशन अब बना पं0 दीनदयाल नगर स्टेशन!!
विभिंन्न राजनीतिज्ञों के विरोध और भारी शोर शराबों के बीच केंद्रीय कैबिनेट के मंजूरी के बाद गृह मंत्रालय ने आखिरकार मुगलसराय स्टेशन के नये नामकरण को स्वीकार कर लिया। स्थानीय लोगो में इस बात को लेकर काफी प्रशंनता है। विदित हो कि जनसंध के नेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय का शव इसी रेलवे स्टेशन पर ट्रेन की एक बोगी से बरामद हुआ था। हॉलाकि राजनीतिक गलियारे में इस मंजूरी को लेकर काफी दिनों तक गर्मागर्म बहस की उम्मीद से इंकार नहीं किया जा सकता ।
इस नामकरण को लेकर भाजपा के अल्पसंख्यक चेहरों में शुमार मुख्तार अब्बास नकवी का अभी तक कोई बयान नहीं आया आया है। ज्ञात हो कि नकवी भाजपा के पास अल्पसंख्यकों के विरोधाभाषी टिप्पणियों के बाबत एक मजबूत ढाल है, पूर्व में भी इन्होंने कई मामलों में मुगलबादशाहों की जमकर खिचाई की है। मगर मुगलसराय जक्शन के नामकरण के मामले में किसी मुगल शासक या जमीदारों की मर्जी का कोई उल्लेख नहीं मिलता। दावा किया जाता है कि अंग्रेजों ने ही इसका यह नामकरण किया था।
मुगलसराय का संक्षिप्त परिचय
बताया जाता है कि साल 1862 में जब हाबड़ा से दिल्ली के लिए रेल लाईन का विस्तार किया जा रहा था उसी समय इस स्टेशन के इमारत का निर्माण प्रारम्भ किया गया जो 1880 में पूर्ण किया गया। पहली बार अंग्रेजों के जमाने में ही बनवाए गये शिलापट्ट पर इस इस स्टेशन का नाम मुगलसराय अंकित पाया गया है। बाद के वर्षो में 1905 में यहॉ के रेल भवन का सुधार किया गया। 1976 में रेल मंत्री बनने के बाद पं कमलापति त्रिपाठी ने रेल भवन का नविनीकरण प्रारम्भ करवाया जो 1982 मे पूरा हुआ। इसी साल मुगलसराय स्टेशन परिसर जनता के लिए खोल दिया गया। यह स्टेशन पूरे एशिया का सबसे बड़ा रेलवे यार्ड है। जिसकी लंबाई 12.6 किमी है , जिसमें 250 किमी लम्बी रेल लाईन बिछाई गयी है। इस यार्ड को संचालित करने के लिए 10 ब्लाक केबिन तथा 11 यार्ड केबिन बनाए गये है। यहॉ बने विद्युत लोको शेड में 140 रेल इंजन रखने की व्यवस्था की गयी है।
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