बीएचयू के वैश्विक रफ्तार की साथी होगी, अनुभवों की थाती



---हरेन्द्र शुक्ला, वाराणसी, 28 मार्च 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

● नव नियुक्त वाइसचांसलर प्रो• राकेश भटनागर ने संभाला कार्यभार, कहा सलाहकारों की उपयोगिता पर करुंगा विचार

अनुसंधान एवं शैक्षिक गुणवत्ता के बल पर काशी हिंदू विश्वविद्यालय को अन्तर्राष्ट्रीय पटल पर स्थापित करुंगा। मेरी तीन प्राथमिकताओं में पहली प्राथमिकता यह है कि यहां का पाठ्यक्रम रोजगार परक हो, दुसरी - योग्य अध्यापक हो ताकि शैक्षणिक माहौल का वातावरण तैयार हो सके और तीसरी प्राथमिकता किसी भी समस्या का समाधान संवाद के जरिए हो। यह बात बीएचयू के नव नियुक्त वाइसचांसलर प्रो• राकेश भटनागर ने बुधवार को पदभार ग्रहण करने के बाद केन्द्रीय कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में कही।

उन्होंने कहा कि पिछले इतिहास से सबक लेकर आगे की योजना बनाई जायेगी। विश्वविद्यालय प्रशासन, शिक्षक एवं छात्रों के साथ संवाद करके जटिल से जटिल समस्यायों का हल निकाला जायेगा। बीएचयू में सेवानिवृत्ति के बाद भी वित एवं प्रशासन, सुरक्षा सलाहकारों के पद पर नियुक्ति के सवाल पर प्रो• भटनागर ने कहा कि किसी का सलाह लेना अच्छी बात है, सलाह लेना भी चाहिए लेकिन बीएचयू योग्यता का भंडार है ऐसे में उच्चपदस्थ व्यक्ति जब सलाहकारों के बल पर निर्भर रहेगा तो उसकी अक्षमता मानी जायेगी। विश्वविद्यालय के सलाहकारों की उपयोगिता क्या है इस पर मैं विचार करके ही आगे बढूंगा।

विश्वविद्यालय में नियुक्तियों के बाबत सवाल के जबाब में नव नियुक्त वाइसचांसलर ने कहा कि योग्य व्यक्ति के बल पर ही राष्ट्र विकास के पथ पर अग्रसर होता है। ऐसे में विश्वविद्यालय के किसी भी विभाग में योग्यता और योग्य अभ्यर्थियों का चयन ईमानदारी के साथ बिना किसी हस्तक्षेप के किया जायेगा ताकि विश्वविद्यालय का शैक्षिक स्तर ऊंचाइयों को छू सके। परिसर में आये दिन होने वाले बवाल की तरफ जब पत्रकारों ने प्रो• भटनागर का ध्यान आकृष्ट कराया तो उन्होंने कहा कि कहा कि समस्या का होना बड़ी बात नहीं है, समस्या का शीघ्र समाधान होना जरूरी है। वह मैं करूंगा।

उन्होंने कहा कि छात्रों की समस्याओं को सुनने के लिए उन्हें मैं अलग से समय दूंगा ताकि किसी भी तरह की समस्याओं का समाधान संवाद के जरिए निकाला जा सके। वहीं उन्होंने यह भी कहा कि नकारात्मक बातें और अराजकता फैलाने वालों के लिए मेरे पास कोई समय नहीं रहेगा। अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सकारात्मक सोच के साथ जो भी मिलना चाहेगा उसके लिए दरवाजा खुला है। लेकिन केवल अराजकता फैलाने वाली बातों के लिए मेरे पास कतई समय नहीं है। वैसे मैं संवाद में विश्वास रखता हूं, संवादहीनता में नहीं। परिसर में आए दिन छात्राओं के साथ छेड़-छाड़ की घटनाओं के सवाल पर उन्होंने कहा कि इसके लिए छात्रों को मोटिवेट किया जाएगा। वर्कशॉप और सेमीनार आयोजित किए जाएंगे। मेरी कोशिश होगी कि छात्रों के दिल दिमाग में महिलाओं के प्रति सम्मान का भाव आए। इसके लिए खुद को उदाहरण के तौर पेश भी करना होगा, वह चाहे मैं खुद हूं या विश्वविद्यालय के अन्य शिक्षक। छात्र से लेकर शिक्षक तक को यह मानना होगा कि महिलाओं को सम्मान देना है, उन्हें बराबरी का हक देना है।

परिसर की सुरक्षा के बाबत उन्होंने कहा कि यह कोई बड़ी समस्या नहीं है। उन्होंने संकेत दिए कि भविष्य में विश्वविद्यालय की हर समस्या के लिए पुलिस प्रशासन की मदद के लिए गुहार नहीं लगाएंगे। उन्होंने कहा कि जब बच्चा मेरी बात नहीं सुनेगा तो पुलिस की भी नहीं सुनेगा। उन्होंने विश्वविद्यालय के भ्रष्टाचार से लेकर जातीय राजनीति तक पर खुल कर बात की और कहा कि मैं बायोटेक्नॉलाजिस्ट, मुझे उन अदृश्य शक्तियों को जानने और समझने की शक्ति है, ऐसे में वो कोई दिक्कत नहीं है। हर समस्या को निबट लिया जाएगा। महामना की बगिया से अभिभूत प्रो• भटनागर ने कहा कि बीएचयू में देश की सभ्यता है। यहां देश की संस्कृति सही मायने में संरक्षित की जाती है। ऐसे में मैं अपने अनुभवों का बीएचयू में प्रयोग करके इसको वैश्विक रंग में रंगने का प्रयास करुंगा।

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