02 अप्रैल 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
मनरेगा कार्यक्रमों ने 2017-18 में महत्वपूर्ण प्रगति की है। मनरेगा ने पूर्ण पारदर्शिता के साथ दीर्घावधि संपदा निर्माण करते हुए आजीविका प्रदान करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। कार्यक्रम के अंतर्गत निर्मित किए गए प्रत्येक संपदा की भौगोलिक टैगिंग की गई। इसके लिए आईटी/डीबीटी का उपयोग किया गया। नरेगासॉफ्ट से ली गई निम्न तालिका में पिछले पांच वर्षों के दौरान कार्यक्रम की प्रमुख विशेषताओं को दिखाया गया है।
प्रगति
वित्त वर्ष 2017-18*
वित्त वर्ष 2016-17
वित्त वर्ष 2015-16
वित्त वर्ष 2014-15
वित्त वर्ष 2013-14
अब तक सर्जित कुल कार्य दिवस (करोड़ में)
231.60(श्रम बजट का 100%)
235.6458
235.1465
166.21
220.37
रोजगार के औसत दिन प्रति परिवार
45.44
46
48.85
40.17
45.97
परिवारों द्वारा किया गया कुल कार्य (करोड़ में)
5.10
5.1224
4.8134
4.14
4.79
दिव्यांगजनों के द्वारा किया गया कार्य
4,69,393
4,71,819
4,59,597
4,13,316
4,86,495
पूर्ण किए गए कार्यों की संख्या (करोड़ में)
54.22
65.46
36.18
29.44
27.42
कृषि तथा कृषि संबंधित अन्य कार्यों पर परिव्यय का प्रतिशत
68.46
66
62.85
52.81
48.7
कुल परिव्यय (करोड़ में)
63,887.35
58,062.92
44,002.59
36,025.04
38,552.62
ईएफएमएस के जरिए कुल परिव्यय प्रतिशत में
96.31
92.33
91.19
77.35
37.17
15 दिनों में दिए गए भुगतान का प्रतिशत
85.75
43.43
36.92
26.85
50.09
* वित्त वर्ष 2017-18 के आंकड़े अस्थायी हैं, क्योंकि मार्च, 18 के आंकड़ों को अपलोड करने का कार्य 20 अप्रैल, 2018 तक जारी रहेगा।
तालिका से स्पष्ट है कि 15 दिनों के अंदर होने वाले भुगतान में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। 2014-15 में यह 26.85 प्रतिशत था, जो 2017-18 में बढ़कर 85.75 प्रतिशत हो गया। 2017-18 का कुल परिव्यय 63,887 करोड़ रुपये है, जो 2013-14 में व्यय की गई कुल धनराशि से लगभग 25,000 करोड़ रुपये अधिक है। इसी तरह आजीविका सुरक्षा और दीर्घावधि संपदा निर्माण के लिए कृषि तथा अन्य संबंधित क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया गया। यह परिव्यय 2013-14 के 48.7 प्रतिशत से बढ़कर इस वर्ष 68.46 प्रतिशत हो गया।
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