राग-रागिनियों से संकट का हो रहा है मोचन



---हरेन्द्र शुक्ला, वाराणसी, 09 अप्रैल 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

● संगीत समारोह की स्वरलहरियों से होड कर रही है कूंची और कैनवास

● संकटमोचन संगीत समारोह की पांचवीं निशा

विश्व प्रसिद्ध श्री संकट मोचन संगीत समारोह की पांचवीं निशा में कलाकारों ने वादन, नृत्य और गायन से श्रोताओं को इस कदर विभोर कर दिया कि जैसे उनके संकट का मोचन हो गया। रविवार को पांचवी निशा की पहली प्रस्तुति प्रख्यात ड्रमबाज शिवमणि की रही। उसके बाद जो कार्यक्रम का कारवां चला जो सुबह तक चलता रहा, श्रोता जो जहां था वहीं बैठ कर प्रभु श्री हनुमान की चरणों मे नृत्य, वादन और गायन के रस में इस कदर डूबा रहा की कब सुबह हुई पता ही नहीं चला।

पांचवी निशा की शुरुआत ड्रमबाज शिवमणि के ड्रम के अद्भुत वादन से हुआ। उनके साथ ड्रम के साथ कई ऐसी चीजें भी थी जिन्हें देखकर लोगों को आश्चर्य हो रहा था। उनके पास भगवान को जल चढ़ाने वाली श्रृंगी, बाल्टी, घंटा और घड़ियाल तब तो लोगों को समझ में आया मगर इस ड्रम सेट के साथ रखी पानी से लबालब भरी बाल्टी ने सभी श्रोताओं का कौतूहल बढ़ा दिया। ड्रम बजाने वाली स्टिक से बाल्टी पर बजाई गई ताल से ऐसा समा बांधा कि श्रोताओं की ओर से तालियों का सैलाब बह निकला। पारंपरिक वाद्यों, पूजा के पात्रों और बर्तनों को संगीत का उपकरण बनाकर उन्होंने जिस अंदाज में प्रस्तुत किया वह देखने और सुनने वालों के लिए अद्भूत रहा। ड्रमबाज शिवमणि और उनके सहयोगी कलाकारों ने राग हंसध्वनि में गणेश वंदना से कार्यक्रम का श्रीगणेश किया। मेंडोलिन वादक पं• यू• राजेश, तबला वादक तनु तंजौर गोविंदराजन, मृदंग वादक एसबी रमणी ने तालवाद्य कचहरी लगायी। ड्रमबाज पं• शिवमणि ने ड्रम वादन करते हुए भगवान को जल अर्पित करने वाली श्रृंगी उठाई और उसे बजाते हुए रखी बाल्टी के अंदर-बाहर करने लगे। पानी से लबालब बाल्टी के अंदर जाती हुई श्रृंगी से निकलने वाली ध्वनि और पुनः बाहर निकालते समय उत्पन्न होने वाली ध्वनि में अंतर को लोगों ने साफ साफ महसूस किया।

इसी कड़ी में हैदराबाद की सुप्रसिद्ध कुचिपुड़ी नृत्यांगना वनजा उदय और उनकी टीम ने अपनी प्रस्तुति दी। उनकी नृत्य की यह खासियत रही बात की वह रामायण और हनुमान चालीसा के नृत्य आत्म अभिव्यक्ति थी। वनजा उदय और उनके साथी कलाकारों ने श्रीराम राज्याभिषेक के कथानक को बड़े ही सहज अंदाज में दर्शकों को परोस दिया। इसके बाद समापन प्रस्तुति उन्होंने हनुमान चालीसा को नृत्य में अभिव्यक्ति दी। यह दोनों ही प्रस्तुतियां उन्होंने संकटमोचन संगीत समारोह के लिए खास तौर पर तैयार की थी। इसकी प्रथम अंजलि संकट मोचन संगीत समारोह में राम और हनुमान की कथा के बीच उन्होंने कार्यक्रम की शुरुआत गणपति वंदना से की और श्रीकृष्ण के बाल लीला प्रसंग पर भावपूर्ण नृत्य किया।

वनजा उदय के साथ वेंकट नाथ साईं, राधाकृष्णन, विश्व शांति, किरणमई और कुमारी प्रगति ने मंच पर नृत्य किया। नृत्य के दौरान पारंपरिक शैली को यथावत रखा गया। पांव के नीचे थाली और सिर पर जल से भरा हुआ कलश दोनों के बीच समन्वय बनाते हुए नर्तकों का संतुलन दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित करने में कामयाब रहा। पांचवी निशा की तीसरी प्रस्तुति पं• उल्हास कशालकर की रही। उन्होनें दुर्लभ राग कौस की अवतारणा कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। इनके साथ गायन पर विशाल और तबले पर पं• सुरेश तलवरकर ने सधी हुई अंदाज में संगत की। इसी क्रम में पं• कदरी गोपालनाथ का सेक्सोफोन वादक हुआ । उन्होंने सेक्सोफोन पर शास्त्रीय रागों की अवतारणा करने के बाद गांधी जी का भजन " वैष्णो जन तो कहिये ...का धुन बजाकर खूब धमाल मचाया। वहीं नयी दिल्ली से आये पं• विश्वनाथ ने अपने गायन से लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पं• सुरेश तलवलकर की तालवृंद ने श्रोताओं पर अपनी गहरी छाप छोड़ने में कामयाब रही। इनके साथ तबले पर सावनी तलवलकर, पखावज पर ओंकार दलवी वेस्टर्न ड्रम्स पर अभिषेक, कजोन पर उमेश, संवादिनी पर मिलिन्द्र कुलकर्णी और गायन पर रामदासन ने जोरदार संगत की। पंचवी निशा का समापन रितेश-रजनीश मिश्रा के गायन से हुआ। इनके साथ तबले पर संजू सहाय और हारमोनियम पर पं• धर्मनाथ मिश्र ने सधी अंदाज में लहरा दिया।

अतिथि कलाकारों, श्रोताओं का स्वागत संकटमोचन मंदिर के महंत प्रो• विश्वम्भरनाथ मिश्र ने किया। वहीं दूसरी तरफ संकटमोचन मंदिर में न्यूरोलाजिस्ट प्रो• विजयनाथ मिश्र के संयोजन में तूलिकाविद्दों द्वारा लगायी गयी श्रीहनुमत चित्र प्रदर्शनी, कूंची के सिपाही शीर्षक से देश- दुनियां के 108 कलाविदों का चित्र एवं मूर्तिकार राजेश द्वारा मिट्टी से पांच भारतरत्नों की मूर्तियां बरबस ही लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं। यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि मंदिर परिसर में आयोजित संकटमोचन संगीत समारोह की स्वरलहरियों से कूंची और कैनवास होड़ कर ही है।

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