---रंजीत लुधियानवी, कोलकाता, 10 अप्रैल 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव से पहले ही दो जिला परिषद जीत कर जहां पश्चिम बंगाल में नया इतिहास रचा है, वहीं विरोधियों के हौंसले भी पस्त कर दिए हैं। वीरभूम जिले में कुल मिलाकर जिला परिषद की 42 सीटें हैं। बगैर किसी मुकाबले के तृणमूल कांग्रेस ने 41 पर जीत हासिल कर ली है। जबकि बांकुड़ा जिले की 46 सीटों में 26 पर सत्ताधारी दल जीत चुका है।
दूसरे कई जिलों में भले ही जिला परिषद पर कब्जा नहीं हुआ है, लेकिन तृणमूल जीत की ओर दूसरों से काफी आगे दिख रहा है। दक्षिण चौबीस परगना जिले की 81 में 23 और पूर्व बर्दवान की 58 सीटों में 13 पर विरोधी कोई नामांकन दर्ज नहीं कर सके हैं। इतना ही नहीं, मुर्शिदाबाद जिले के कांदी में 30 पंचायत समिति में 29 तृणमूल कांग्रेस बगैर मुकाबले के जीत चुकी है। यहां भरतपुर की सभी 21 और भरवां की 37 सीटों पर तृणमूल का कब्जा हो गया है।
भले ही जिले में हिंसा की घटना नहीं हुई हो और किसी विरोधी दल ने प्रशासन के पास शिकायत नहीं की हो। लेकिन इसके बाद भी हावड़ा में सत्ताधारी दल का दबदबा किसी से छुपा नहीं है। बागनान -2 नंबर ब्लाक की चंद्रभाग पंचायत के अलावा सात पंचायत की 108 सीटों में 55 पर तृणमूल ने निर्विरोध जीत हासिल की है। बागनान- 2 नंबर पंचायत समिति की 21 सीटों में तृणमूल बगैर मुकाबले के 12 पर जीत हासिल कर चुकी है। इसके साथ ही उदयनारायणपुर में ग्राम पंचायत की 154 सीटों में 89 पर निर्विरोध जीत हासिल कर चुकी है। जबकि उदयनारायणपुर पंचायत समिति की 33 में 14 पर तृणमूल का कब्जा हो चुका है।
विरोधी नेताओं का आरोप है कि इस बार शुरू में ही खेल खत्म करने की रणनीति तृणमूल कांग्रेस ने बना रखी थी। इसलिए नामांकन दाखिल करने के दौरान व्यापक हिंसा की गई। प्रशासन सूत्रों का कहना है कि 5 अप्रैल तक बांकुड़ा जिले में हिंसा की 20 घटनाओं में 20 लोग घायल हुए और एक व्यक्ति की मौत हुई। जबकि वीरभूम में 11 हिंसक घटनाओं में कई लोग घायल हुए।
माकपा नेता रोबिन देव का कहना है कि बगैर मुकाबले जीतने वालों में सत्ताधारी दल के लोग ही ज्यादा हैं। इसके साथ ही नामांकन दाखिल करने वालों पर भी नाम वापस लेने के लिए दबाव डाला जा रहा है। भाजपा के राष्ट्रीय सचिव राहुल सिन्हा का कहना है कि अगर सत्ताधारी दल विकास के नाम पर जीत का दावा करता है, तब हिंसा क्यों की जा रही है। हालांकि वीरभूमि जिले के तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष अनूव्रत मंडल ने कहा है कि अगर विरोधी दल को उम्मीदवार नहीं मिल रहे थे, तब मुझसे संपर्क कर सकते थे।
एडीजी (कानून-व्यवस्था) अनुश शर्मा का कहना है कि चुनाव के दौरान सभी बूथों पर सशस्त्र पुलिस तैनात की जाएगी।
दूसरी ओर, राज्य चुनाव आयोग ने चौबीस घंटे के भीतर अपने पूर्व फैसले से यू टर्न लेते हुए अगले महीने होने वाले पंचायत चुनावों के लिए नामांकन दाखिल करने की बढ़ी समयसीमा वापस ले ली है। भाजपा ने आयोग के इस फैसले के खिलाफ मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की जिस पर कल सुनवाई होगी। सोमवार को नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख थी। लेकिन आयोग ने विपक्षी दलों की शिकायत के आधार पर इसकी समयसीमा एक दिन के लिए बढ़ा दी थी।
प्रदेश भाजपा का आरोप है कि राज्य चुनाव आयोग ने सत्तारुढ़ तृणमूल कांग्रेस के दबाव में ही समयसीमा बढ़ाने का आदेश वापस लिया गया है। प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने दावा किया कि आयोग के फैसला बदलने की वजह से पार्टी के कई उम्मीदवार अपना नामांकन पत्र दाखिल नहीं कर सके हैं। दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस नेता व सांसद कल्याण बनर्जी ने विपक्ष के आरोपों को निराधार ठहराया है। उन्होंने कहा कि विपक्षी राजनीतिक दलों के दबाव के चलते ही चुनाव आयोग ने समयसीमा बढ़ाने का गैर-कानूनी फैसला किया था।
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