पंचायत चुनावों पर खंडपीठ में गई राज्य सरकार तो उम्मीदवारी के लिए भाजपा नेता ने किया निकाह



---रंजीत लुधियानवी, कोलकाता, 13 अप्रैल 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

● पंचायत चुनावों पर खंडपीठ में गई राज्य सरकार

राज्य में अगले महीने होने वाले पंचायत चुनावों के आयोजन की प्रक्रिया पर राज्य सरकार ने शुक्रवार को कलकत्ता हाईकोर्ट की खंडपीठ के समक्ष एक याचिका दायर की। इस पर सोमवार को सुनवाई होगी। ध्यान रहे कि हाईकोर्ट ने कल अगले आदेश तक पंचायत चुनावों की प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी।

भाजपा की ओर से दायर एक याचिका पर सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति सुब्रत तालुकदार ने राज्य चुनाव आयोग से सोमवार तक चुनाव प्रक्रिया पर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। इस मामले की अगली सुनवाई 16 अप्रैल को होगी। अदालत ने चुनाव आयोग से दूसरी तथ्यों के अलावा नामांकन पत्रों की तादाद और रद्द होने वाले नामांकनों का प्रतिशत भी बताने को कहा गया है। अदालत के अगले आदेश तक नाम वापस लेने और नामांकन पत्रों की जांच की प्रक्रिया ठप रहेगी।

● उम्मीदवारी के लिए भाजपा नेता ने किया निकाह

चुनाव में उम्मीदवार बनने और टिकट हासिल करने के लिए लोग पता नहीं क्या-क्या करते हैं। ऐसी ही एक घटना के तहत भाजपा उम्मीदवार की तलाश में निकाह किया गया। करणदीघी के एक ग्राम पंचायत की सीट महिला के लिए आरक्षित है और इसके लिए उम्मीदवार का चुनाव भी हो गया था। लेकिन अंतिम समय महिला ने चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया। इससे भाजपा नेताओं के हाथों के तोते उड़ गए। एक युवक इलाके में लोकप्रिय होने के कारण पंचायत जीत सकता था, लेकिन वह कुंवारा था। इमरजंसी हालात को देखते हुए उत्तर दिनाजपुर जिले के करणदीघी के रसाखावत में बुलाई गई बैठक में कहा गया कि अगर शाहजान आलम को उम्मीदवार बनाया जाता तो यह सीट आसानी से भाजपा को मिल जाती। लेकिन महिला के लिए रिजर्व सीट पर पुरुष उम्मीदवार कैसे हो सकता था ? किसी ने मजाक में कहा कि इसकी शादी कर दो और पत्नी को टिकट दे देंगे। यह सुनकर आलम घबरा गए कि शादी वह भी चुनाव के लिए अचानक कैसे हो सकती है ? लेकिन दल की ओर से तय किया गया कि शादी हम करवाएंगे और तुम्हारी पत्नी को उम्मीदवार बनाएंगे। उसने भी मजाक में कह दिया ठीक है, लड़की ढूंढ लो।

गांव में शादी योग्य कोई लड़की नहीं थी लेकिन भाजपा नेता मोहम्मद जलील ने ठान लिया कि विवाह करवाकर दुल्हन को उम्मीदवार बनाना ही है। करीब के गांव छागलगाछी की शाहना खातून के बारे में पता चला, जो स्नातक है और उसे वैसे ही टिकट दिया जा सकता था। भाजपा नेता तुरंत उसके घर पहुंचे और शादी की बात तय की। लड़का-लड़की वाले राजी हो गए और शनिवार को शादी की बात शुरू होकर रविवार को विवाह और सोमवार को नामांकन भी दाखिल हो गया। बुधवार को पता चला कि नामांकन मंजूर हो गया है।

आलम का कहना है कि उसने सोचा भी नहीं था कि ऐसे भी शादी हो जाएगी। दूसरी ओर, ससुराल पहुंच कर शादी की मेहंदी सूखने से पहले ही शाहना चुनाव प्रचार में जुट गई। उसका कहना है कि अचानक शादी, चुनाव प्रचार और अगर जीत मिलती है तो यह सोच कर ही बहुत अच्छा लग रहा है। यह पूछे जाने पर कि अचानक शादी के लिए कैसे तैयार हो गई। उसने कहा कि परिवार वाले राजी थे और मुझे किसी तरह की आपत्ति नहीं थी।

हालांकि कुछ लोगों में हुई शादी को लेकर किसी को अफसोस नहीं है। आलम का कहना है कि चुनाव के बाद पार्टी दी जाएगी। पत्नी अगर चुनाव जीत जाती है तब जश्न जोरदार होगा। चुनाव प्रचार में भाजपा उम्मीदवार को एक ही परेशानी का सामना करना पड़ रहा है कि जिस घर में भी वह प्रचार करने जाती हैं लोग भरपेट भोजन करवाकर ही भेज रहे हैं। ऐसे में चुनाव की तारीख तक खा-खा कर बेचारी की क्या हालत होगी यह सोच कर ही परिवार वाले परेशान हैं।

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