---रंजीत लुधियानवी, कोलकाता, 14 अप्रैल 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
बांग्ला नव वर्ष के मौके पर कैलेंडर बेचने वालों की चांदी रहती थी, लेकिन अब हालात बदल गए हैं। कैलेंडर का कारोबार भी चपेट में है। किसी भी कैलेंडर विक्रेता से यह पूछने पर कि इस साल बांग्ला नव वर्ष पर कितने आर्डर मिले हैं, ज्यादातर विक्रेता भड़क जाते हैं। उनका कहना है कि कारोबार की लालबत्ती जल गई है और सारा फायदा चींटीयां निगल गई हैं। इस कारोबार का भविष्य अंधेरामय दिख रहा है। जबकि कुछ कारोबारी साफ तौर पर कहते हैं कि कैलेंडर कारोबार में मंदी का कारण केंद्र की मोदी सरकार है। जीएसटी के कारण बंगाल में कैलेंडर, हाल खाते का कार्ड, बांग्ला पंजिका समेत इस तरह के दूसरे कारोबार बंद होने के कगार पर हैं। वैसे ही यह कारोबार मंदी के दौर से गुजर रहा था, जीएसटी ने हालात भयावह कर दिए हैं।
बांग्ला नव वर्ष के पहले कैनिंग स्ट्रीट की दुकानों में जहां भीड़ लगी रहती थी, वहां ज्यादातर दुकानदार मक्खियां मारते दिख रहे हैं। अमरेंद्र झा ने बताया कि इस बार जितना आर्डर मिला है, उससे कारोबार चलाना संभव नहीं है। घर से पैसे ला कर कारोबार चला रहा हूं। पहले हम लोग दुकानदारों से आर्डर लेने में व्यस्त रहते थे, लेकिन अब लगता है जैसे कारोबार ठहर गया है। पुराने ग्राहकों को फोन करके पूछा कि इस बार कितना आर्डर देंगे तो ज्यादातर का कहना था कि इस बार हम कैलेंडर नहीं छपवाएंगे, सिर्फ ग्राहकों को मिठाइयों के पैकेट ही देंगे। इसी तरह, विश्वनाथ चौधरी ने नाराजगी जताते हुए कहा कि कैलेंडर छपवाने वाले भी संख्या घटाने पर मजबूर हुए हैं। एक हजार छपवाने वाला 750, 500 छपवाने वाला 300 छपवा रहा है। यहां कैलेंडर छपवाने वाले कई दुकानदारों ने कहा कि बाजार मंदा है और कैलेंडर की कीमत भी बढ़ गई है। इसलिए इस साल कम संख्या में कैलेंडर छपवा रहे हैं।
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