---रंजीत लुधियानवी, कोलकाता, 22 अप्रैल 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
भारतीय जनता पार्टी की ओर से हाल तक राज्य में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस पर तुष्टीकरण का आरोप लगाया जाता रहा है। हावड़ा के उलबेड़िया लोकसभा सीट के उपचुनाव के लिए जब कांग्रेस, माकपा, तृणमूल कांग्रेस की ओर से मुस्लिम बहुल इलाका होने के कारण मुस्लिम उम्मीदवार खड़ा किया, तब भाजपा ने ऐसा नहीं किया। इस बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में तब प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा था कि हमें मुसलमान मतदाताओं की जरुरत नहीं है, इलाके के 53 फीसद वोट से हम चुनाव आसानी से जीत जाएंगे। हालांकि नतीजे जब आए तो पता चला कि करीब पांच लाख वोटों से भाजपा उम्मीदवार की हार हुई है। भाजपा भले ही दो नंबर पर रही, लेकिन ज्यादातर लोगों ने जिसमें बहुसंख्यक वर्ग के मतदाता भी शामिल थे, दल को नकार दिया गया था। इसलिए अब भाजपा भी दूसरे दलों की तरह अल्पसंख्यकों को तरजीह देने में लगी है। पंचायत चुनाव में दल की ओर से दो हजार से ज्यादा लोगों को टिकट दिया गया है।
भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष अली हुसैन का कहना है कि अगर नामांकन प्रक्रिया ठीक-ठाक रहती, तब 5000 मुस्लिम उम्मीदवार भाजपा से चुनाव लड़ सकते थे। अब दो हजार लोग चुनाव लड़ रहे हैं। उनका मानना है कि सोमवार को नामांकन में कुछ और लोग नामांकन दाखिल कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि फिलहाल यह तो बताना संभव नहीं कि कहां, कितने अल्पसंख्यक उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। लेकिन पंचायत समिति में 200, जिला परिषद में 14 उम्मीदवार हैं। सबसे ज्यादा मुस्लिम उम्मीदवार भाजपा की ओर से दक्षिण चौबीस परगना जिले में चुनाव लड़ रहे हैं। उनकी संख्या 200 बताई गई है। बासंती पंचायत में कुल मिलाकर 162 उम्मीदवार कमल के निशान पर चुनाव लड़ रहे हैं। सारे राज्य में यह संख्या दो हजार तक पहुंच गई है। उनका मानना है कि राज्य में विकास के लिए लोग हमारे दल के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ रहे हैं।
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