हावड़ा, 25 अप्रैल 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
जीवन एक गुलाब का पौधा हैं। अगर फूल चाहिए तो कांटे भी साथ आएँगे - सुख चाहिए तो दुख भी साथ में मिलेगा इसलिए सुख में फूले नहीं व दुख में बिलखे नहीं। यह बाते क्रांतिवीर मुनि श्री प्रतीक सागर जी महाराज ने उत्तर हावड़ा के डबसन रोड स्थित पारसनाथ दिगम्बर जैन मंदिर के सभागृह में धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए कहा।
आगे उन्होंने कहा कि संसार प्रति ध्वनि हैं जो बोलोगे वही वापस आयेगा, अपमान करने वाले को अपमान व सम्मान देने वाले को सम्मान मिलता है। सन्त मुनिओं को देखकर श्रद्धा भाव से झुक जाना उन में दोष मत देखना। अगर किसी संत में दोष दिख जाए तो संकल्प कर लेना कि मैं अगर कभी संत बना तो यह काम नहीं करूंगा। मुनि श्री ने आगे कहा कि हर रात को जीवन की आखरी रात मानकर सोना और हर सुबह को जीवन की पहली सुबह मानकर जिए। अगर ऐसा मानकर जिए तो हर दिन उत्सव होगे व हर रात पूर्णिमा। मुनि श्री ने कहा कि सम्राट की तरह पैदा होना गौरव की बात नहीं है बल्कि सम्राट की तरह जीना सम्राट की भाँति मरना गौरव की बात है।
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