बंगाल : पंचायत चुनाव में विरोधी दलों के 86 हजार से ज्यादा उम्मीदवार मैदान में



---रंजीत लुधियानवी, कोलकाता, 27 अप्रैल 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एलान कर दिया है कि राज्य में होने वाले त्रिस्तरीय चुनाव में वे तृणमूल कांग्रेस के लिए प्रचार नहीं करेंगी। हाल में एक निजी टीवी चैनल में इंटरव्यू के दौरान उन्होंने साफ किया कि बीते सात साल के कामकाज और संगठन का यह असर है कि 58 हजार से ज्यादा सीटों पर लोगों ने नामांकन किया और उनका मानना है कि 100 फीसद सीटों पर सफलता उन्हें मिलेगी। हालांकि पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव में प्रचार के लिए सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस कमर कस चुकी है। मालूम हो कि तृणमूल कांग्रेस पहले ही 27 फीसद सीटों पर चुनाव जीत चुकी है क्योंकि वहां मुकाबले के लिए कोई विरोधी उम्मीदवार ही नहीं है। इसके बाद भी दल किसी तरह का मौका छोड़ना नहीं चाहता है। इसलिए दल प्रचार में पूरा ताकत के साथ उतरने की तैयारी कर चुकी है।

नामांकन के अंतिम दिन तृणमूल कांग्रेस की ओर से एक लाख से ज्यादा और विरोधी दलों की ओर से 86 हजार से ज्यादा नामांकन भरे गए थे। चुनाव आयोग की ओर से नामांकन की जांच के दौरान करीब 10,000 लोगों के नामांकन रद्द हो गए हैं। रद्द होने वाले उम्मीदवारों में तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवारों की संख्या सबसे ज्यादा है।

सूत्रों ने बताया कि जिला परिषद की 825 सीटों के लिए तृणमूल के 1085 से 935, भाजपा के 832 से 764, माकपा के 568 से 523 और कांग्रेस के 430 में से 398 उम्मीदवारों के नामांकन सही पाए गए हैं। इसी तरह, पंचायत समिति की 9217 सीटों के लिए तृणमूल कांग्रेस के 12860 नामांकन से 11842, भाजपा के 6351 नामांकन से 5954, माकपा के 4509 से 4279 और कांग्रेस के 1807 नामांकन से 1733 ठीक मिले हैं। ग्राम पंचायत की सीटों में भी यही हाल देखा जा रहा है। कुल मिलाकर 59736 नामांकन में 55973, भाजपा के 28696 से 27065, माकपा के 17904 नामांकन में 16876 और कांग्रेस के 7649 नामांकन में 7293 नामांकन वैध पाए गए हैं।

तृणमूल कांग्रेस के एक नेता के मुताबिक पंचायत चुनाव में जिसकी जीत होती है, लोकसभा और विधानसभा पर उसका ही परचम फहराता है। बंगाल की यह परंपरा इस बार भी कायम रहेगी और तृणमूल शत प्रतिशत सीटों पर जीत हासिल करके 2021 तक जीत की राह आसान कर लेगी। दूसरी ओर, विरोधी दलों की ओर से भी सत्ताधारी दल को हराने के लिए रणनीति बनाई गई है। माकपा का कहना है कि जहां उनका उम्मीदवार नहीं हो वहां भाजपा और तृणमूल कांग्रेस को पराजित करने वाले किसी भी उम्मीदवार को वोट दें। जबकि भाजपा का कहना है कि पंचायत चुनाव में उसे शानदार जीत मिलेगी।

सरकार ने राज्य चुनाव आयोग को भरोसा दिया है कि वह अगले महीने होने वाले पंचायत चुनाव के दौरान राज्य के सभी 43,067 मतदान परिसरों में सशस्त्र सुरक्षा मुहैया करा सकती है। सरकार की दलील है कि केंद्रीय चुनाव आयोग ने भी मतदान परिसरों में सशस्त्र सुरक्षा मुहैया कराने की ही बात कही है। ऐसे एक परिसर में एक या उससे ज्यादा मतदान केंद्र हो सकते हैं। यही वजह है कि राज्य के 43,067 परिसरों में 58,467 मतदान केंद्र हैं। एक ही दिन मतदान कराने के फैसले के बाद सुरक्षा पर उठते सवालों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने हर मतदान परिसर में सशस्त्र सुरक्षा मुहैया कराने का दावा किया है।

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