---रंजीत लुधियानवी, कोलकाता, 07 मई 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
देश में जब-जब चुनाव आते हैं, राजनीतिक दलों की कलई खुलती जाती है। आगामी कुछ दिनों में आयोजित होने वाले पश्चिम बंगाल के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के बारे में लोगों का मानना है कि राजनीति, आदर्श, जनसेवा समेत सारी धारणाएं मिट्टी में मिलाकर लोग सिर्फ निज हित पर ही जोर दे रहे हैं। चुनाव में लोगों को अपने फायदे के अलावा कुछ दिखाई ही नहीं दे रहा है। इससे लोगों को लग रहा है कि पता ही नहीं चलता है कि दल या किसी का कोई आदर्श भी होता है।
खानाकूल की चिंगड़ा पंचायत के प्रधान कार्तिक इशर और उनके साले जिला परिषद के सदस्य विभास मलिक एक ही परिवार और दल से उम्मीदवार हैं। दोनों के मकान करीब होने के बावजूद दो साल से बातचीत बंद है और उन्होंने एक दूसरे पर आरोप लगाया है कि किराए के हत्यारों की मदद से उनकी हत्या की कोशिश की गई है। एक दूसरे को भ्रष्ट तो दूसरा उसे गुंडा बता रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि दोनों तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार हैं और पिछली बार पंचायत गठन होने के बाद से ही एक दूसरे के खिलाफ हैं। इलाके के विकास का श्रेय दोनों लेना चाहते हैं। इस बार दोनों गुट की ओर से पंचायत और पंचायत समिति के लिए नामांकन किया था, लेकिन बाद में विधायक के हस्तक्षेप के बाद सीटों का बंटवारा किया गया। पंचायत की 15 सीटों में 8 कार्तिक गुट और सात विभास गुट को दी गई जबकि पंचायत समिति की तीन सीटों में कार्तिक गुट को एक और विभास गुट को दो सीटें मिली हैं।
एक ओर परिवार में ही लोग सत्ता हासिल करने के लिए एक दूसरे के खिलाफ खड़े हो गए हैं तो दूसरी ओर पंचायत चुनाव में पता ही नहीं चल रहा कि कौन किस दल में है। उत्तर चौबीस परगना जिले के हरिणघाटा की सुमी दास ने भाजपा उम्मीदवार के तौर पर जिला परिषद की सीट से नामांकन दाखिल किया था, लेकिन बाद में नाम वापस लेकर तृणमूल कांग्रेस के पक्ष में चुनाव प्रचार शुरू कर दिया है।
पश्चिम मेदिनीपुर के नारायणगढ़ को लोग राज्य माकपा के सचिव सूर्यकांत मिश्र का इलाका मानते हैं। यहां के ब्लाक में पूर्व माकपा सदस्य अमल मान्ना समेत 10 लोग माकपा छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। जबकि बसीरहाट दो नंबर ब्लाक के सहीदुल इस्लाम ने कांग्रेस छोड़ कर तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया है। पहले इस्लाम ने कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर जिला परिषद की सीट से नामांकन दाखिल किया था लेकिन बाद में नाम वापस लेकर तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए।
इसी तरह, वीरभूम जिले के मयुरेश्वर दो नंबर ब्लाक के छह और पूर्व बर्दवान जिले में कालना के नांनदाई के तीन भाजपा उम्मीदवार लड़ाई के मैदान से हटे ही नहीं हैं बल्कि उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार के पक्ष में चुनाव प्रचार भी शुरू कर दिया है।
मालूम हो कि मयुरेश्वर दो नंबर ब्लाक की उलकुंडा ग्राम पंचायत की 11 सीटों में छह पर भाजपा उम्मीदवारों ने नामांकन किया था। लेकिन बाद में भाजपा उम्मीदवार दीपंकर बागदी, छवि भल्ला, रंजीत भल्ला, प्रभातदास, अरुप दास और फाल्गुनी दास ने भाजपा छोड़कर तृणमूल का पल्ला थाम लिया। इस तरह यह पंचायत दखल करना सत्ताधारी दल के लिए सिर्फ औपचारिक एलान रह गया है। इस जिले में मयुरेश्वर को भाजपा का गढ़ माना जाता था, लेकिन वह ढह गया। इसी तरह, कालना एक नंबर पंचायत समिति की नांनदाई में भाजपा उम्मीदवार ने चुनाव से पहले ही दल बदल कर लिया है। इसमें एक पंचायत समिति और दो ग्राम पंचायत के उम्मीदवार हैं।
नांनदाई में पांच साल पहले माकपा को 9, कांग्रेस को 3 और तृणमूल कांग्रेस को 4 सीटों पर जीत मिली थी। लेकिन माकपा-कांग्रेस के विजयी सदस्य तृणमूल में शामिल हो गए और पंचायत पर सत्ताधारीदल ने कब्जा कर लिया था। अब 16 सीटों में माकपा ने एक और भाजपा ने 8 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे। तृणमूल के 8 सदस्य निर्विरोध जीत चुके हैं और भाजपा छोड़ तृणमूल में शामिल होने वालों का कहना है कि हमें गुमराह करके भाजपा से उम्मीदवार बनाया गया था, हमलोगों के घर जाकर कह रहे हैं कि हमें गुमराह किया गया था आप गुमराह मत होना।
पुरूलिया जिले के काशीपुर को किसी जमाने में लालदुर्ग माना जाता था, लेकिन अब वहां सत्ताधारी दल का मुकाबला करने के लिए माकपा-भाजपा-कांग्रेस एकजुट होकर प्रचार कर रहे हैं। तीनों दल के झंडे को लेकर शनिवार को 30 लोगों ने काशीपुर पंचायत में जुलूस निकाला। जुलूस मे शामिल भाजपा कार्यकर्ता देवाशीष बेलखरिया के मुताबिक पुरूलिया समेत बंगाल से तृणमूल का सफाया करना चाहते हैं। इसी तरह कई जिलों में कहीं प्रत्यक्ष तो कहीं अप्रत्यक्ष तौर पर माकपा-भाजपा-कांग्रेस-तृणमूल कांग्रेस के लोग एक दूसरे के साथ मिलकर दूसरे को पराजित करने में लगे हुए हैं। इससे लोगों को लग ही नहीं रहा है कि कोई दल अलग है। एक व्यक्ति के मुताबिक सभी किसी न किसी तरह दूसरे को पराजित करके जीत हासिल करना चाहते हैं।
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