---रंजीत लुधियानवी, कोलकाता, 10 मई 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
राज्य में 14 मई को होने वाले पंचायत चुनाव तय समय पर ही होंगे, कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ज्योतिर्मय भट्टटाचार्य और न्यायमूर्ति अरिजित बनर्जी की एक खंडपीठ ने इस मामले में आज अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि राज्य चुनाव आयोग सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित कर जब चाहे चुनाव करा सकता है। अदालत इस मामले में कोई हस्तक्षेप नहीं करेगी। कांग्रेस की ओर से सुरक्षा के मुद्दे पर दायर एक जनहित याचिका पर खंडपीठ ने उक्त फैसला दिया। लेकिन उसने कहा कि हिंसा और जान-माल का नुकसान होने की स्थिति में सरकार की जवाबदेही होगी और उसे ऐसे मामलों में हुए नुकसान का मुआवजा भरना होगा।
राज्य चुनाव आयोग ने अदालत को बताया कि वह राज्य सरकार की ओर से चुनाव के लिए की जाने वाली सुरक्षा व्यवस्था से संतुष्ट है। एक ही दिन चुनाव कराने के मामले में सुरक्षा का मुद्दा सबसे अहम हो गया था। आज सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने चुनाव आयोग से भी यही सवाल किया कि तीन दिन की बजाय एक दिन मतदान कराने पर चुनाव कितना शांतिपूर्ण होगा। उसने सवाल किया कि क्या आयोग राज्य सरकार की ओर से की गई सुरक्षा वयवस्था से संतुष्ट है ? इस पर आयोग ने बताया कि वह इससे पूरी तरह संतुष्ट है।
इसके बाद अदालत ने साफ तौर पर कहा कि चुनाव जब भी हों, शांतिपूर्ण, मुक्त व निष्पक्ष होने चाहिए। मतदान के दौरान किसी तरह की अशांति होने पर उसकी जिम्मेदारी सरकारी अधिकारियों पर होगी। जान के नुकसान की स्थिति में मुआवजा देना होगा। मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने कहा कि अगर चुनाव आयोग राज्य सरकार की ओर से मुहैया कराई गई सुरक्षा व्यवस्था से संतुष्ट है तो इस मामले में अदालत कोई हस्तक्षेप नहीं करेगी। वह जब चाहे चुनाव करा सकता है।
मालूम हो कि पंचायत चुनाव के दौरान सुरक्षा का जिम्मा 61 हजार सशस्त्र जवानों पर होगा। राज्य पुलिस व कोलकाता पुलिस के अलावा होमगार्ड व नेशनल वालंटियर फोर्स के जवान भी तैनात रहेंगे। इसके अलावा दूसरे राज्यों से दो हजार सशस्त्र जवान यहां आएंगे। आयोग ने कहा है कि 80 हजार सिविक वालंटियरों को भी चुनावी ड्यूटी में लगाया जाएगा। हर मतदान केंद्र पर एक सशस्त्र जवान के अलावा एक लाठीधारी जवान तैनात रहेगा।
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