---रंजीत लुधियानवी, कोलकाता, 21 मई 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
युवा तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी ने हाल में संपन्न पंचायत चुनाव के नतीजों का विश्लेषण करने के बाद दावा किया है कि पुरूलिया समेत आदिवासी प्रभावित जंगल महल इलाके में कहीं भी भाजपा सफल नहीं रही है। मालूम हो कि भाजपा नेताओं और मीडिया के कुछ हिस्सों की ओर से दावा किया जा रहा है कि आदिवासी बहुल इलाकों में भाजपा को भारी सफलता मिली है। लेकिन अभिषेक का कहना है कि अपनी नाकामी को छुपाने के लिए भाजपा की ओर से यह प्रचार किया जा रहा है कि उन्हें आदिवासी इलाकों में बहुत सफलता मिली है, लेकिन सच्चाई इसके विपरीत है। उनका दावा है कि पुरूलिया में कुल मिलाकर जिला परिषद की 38 सीटें हैं। इसमें तृणमूल कांग्रेस को 25 और कांग्रेस को तीन सीटें मिली है। जबकि भाजपा को सिर्फ 9 सीटें ही मिली थी। इसमें भी एक सीट पर दोबारा हुई गणना में तृणमूल उम्मीदवार जीत गए हैं। इस तरह तृणमूल की सीटें बढ़कर 26 हो गई हैं।
उन्होंने कहा कि पुरूलिया में भाजपा की टिकट पर जीतने वालों ने तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने के लिए अभी मुझसे संपर्क शुरू कर दिया है। भाजपा की ओर से गलत प्रचार किया जा रहा है कि पुरूलिया और पश्चिम मेदिनीपुर जिले में उन्हें शानदार सफलता मिली है। जबकि पुरूलिया के बांदोवान, मानबाजार एक और दो नंबर ब्लाक, बलरामपुर, काशीपुर समेत कई इलाकों में भाजपा का नामोनिशान नहीं है।
उन्होंने कहा कि रघुनाथपुर और बाघमुंडी जिला परिषद में भाजपा के दो उम्मीदवार विजयी रहे हैं, उसमें लिपीका महतो और सुबोध चंद्र महतो ने स्थानीय स्तर पर खुलेआम कांग्रेस और माकपा के साथ गठजोड़ करके चुनाव लड़ा था। लिपीका ने जहां से जीत हासिल की है, वह सीट पिछली बार माकपा के पास थी। जबकि सुबोध की सीट कांग्रेस के पास थी। इसलिए यह दावा करना कि भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस से कोई सीट छीन ली है, पूरी तरह से गलत और आधारहीन है। इसके साथ ही ग्राम पंचायत में भी भाजपा को जहां सफलता मिली है, वह सीटें कांग्रेस से छीनी है। माकपा के कब्जे में रही रघुनाथपुर की चेलियामा व मंगलदा मौत पंचायत, बलरामपुर ब्लाक की बलरामपुर व बेला ग्राम पंचायत,जयपुर ब्लाक के बड़ग्राम और रोपा ग्राम पंचायत, फारवर्ड ब्लाक के कब्जे में रही बाघमुंडी ब्लाक की सीट भाजपा ने जीती है।
उन्होंने कहा कि भाजपा की ओर से यह दावा किया जा रहा है कि उनके वोटों की संख्या में वृद्धि हुई है, लेकिन सच्चाई यह है कि 2013 और 2018 में कांग्रेस-माकपा के वोटों में ज्यादा फर्क नहीं हुआ है। इलाके में कांग्रेस-माकपा के साथ गठजोड़ करके दोनों दलों के वोट भाजपा के खाते में गए हैं।
इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि वोटों की गिनती के दौरान भाजपा समर्थित समाजविरोधी झारखंड और छत्तीसगढ़ राज्य से घुसे और बैलेट बाक्स लेकर भाग गए थे। इतना ही नहीं, प्रिसाइडिंग अफसर को धमका कर भाजपा उम्मीदवार गणेश सिंह के नाम पर बदमाशों ने विजयी उम्मीदवार का सर्टीफिकेट भी लिखवा लिया। इस बारे में तुरंत बीडियो ने चुनाव आयोग को सूचित किया। इसके बाद दोबारा आयोग ने वोटों की गिनती का निर्देश दिए और तृणमूल उम्मीदवार 1045 वोटों से जीत गया। हालांकि भाजपा ने इस मामले में अदालत में जाने का एलान किया है।
उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत में 65 पर तृणमूल ने पूर्ण बहुमत हासिल किया है। 170 पंचायतों में भाजपा को यहां सिर्फ 40 पंचायतों में जीत मिली है। हालांकि अभी तक 52 बोड त्रिशंकु हैं और वहां तृणमूल कांग्रेस ही बोर्ड गठन करेगी। इसी तरह, पंचायतों के 20 में 9 में हमें शानदार सफलता मिली है। सात त्रिशंकु में भी हमारा ही बोर्ड होगा। समिति में सिर्फ चार भाजपा के खाते में गई हैं।
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